इलाहाबाद के गंगापार इलाके में साम्प्रदायिकता की चिंगारी सुलग रही है। चिंगारी को हवा देने की कोशिशें भी की जा रही हैं। गनीमत है कि अभी तक कोई बड़ी वारदात नहीं हुई पर इतना तय है कि अगर जल्द ही प्रभावी कदम न उठाया गया तो निकट भविश्य में किसी बड़ी वारदात से इनकार भी नहीं किया जा सकता। साम्प्रदायिकता की सुलगती चिंगारी में प्रशासन केवल ऊपर से मिट्टी डालने का काम कर रहा है। यूपी की सबसे बड़ी टाऊन एरिया है लालगोपालगंज। करीब चालीस हजार हिंदू-मुस्लिमों की मिली जुली आबादी है। मोहर्रम की प्रशासनिक तैयारी के तहत यहां पांच दिन पहले स्थानीय पुलिस चौकी में बुलाई गई पीस कमेटी की बैठक में मारपीट हो गई।
बैठक में मौजूद सीओ सोरांव राहुल मिश्रा और एसडीएम विवेक श्रीवास्तव के सामने जमकर कुर्सियां चलीं। सीओ ने चेयरमैन के पति मुख्तार अहमद को इसके लिए फटकार लगाई। दूसरे दिन सीओ को हटाने की मांग कर दी गई। ऐसा न होने पर लालगोपालगंज में मोहर्रम न मनाने का ऐलान हो गया। इस निर्णय की जानकारी लखनऊ शासन से लेकर जिले के आला अफसरों को भी दे दी गई। इसके बाद प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। तीन दिनों तक अफसरों ने नाराज मुसलमानों को मनाने की लंबी मशक्कत की। 22 नवंबर को यहां से पुलिस सीओ को हटाया गया पर तब तक लालगोपालगंज के बगल गांव बरईपुर रामनगर में शरारती तत्वों ने 21 नंवबर की रात एक मकान में रखा ताजिया फूंक कर 22 नवंबर को साम्प्रदायिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की। दिनभर तनातनी का माहौल बना रहा। बरईपुर रामनगर हिंदू-मुसलमानों की मिली जुली आबादी वाला ऐसा गांव है जहां रामलीला मंचन में मुसलमान कौशल्या, केकैयी का रोल करते हैं तो हिंदू मोहर्रम पर ताजिये को कंधा देकर आपसी सद्भाव की मिसाल पेश करते आए हैं।
बरईपुर रामनगर में ताजिया जला देने की आंच ठंडी भी न हुई थी कि नवाबगंज के ही इलाके वाले पचदेवरा गांव में 22 नवंबर की रात प्राचीन मंदिर दुर्गाधाम में दुर्गा की मूर्ति और शिवलिंग को क्षतिग्रस्त कर के एक बार फिर इलाके को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की कोशिश की। यहां भी गांव वालों ने आपसी सूझबूझ का परिचय देकर सद्भाव के माहौल को कायम रखा। प्रयाग की धरती पर लगातार ऐसी खतरनाक वारदातों के पीछे आखिर किन लोगों का हाथ है, यह जानने की कोशिश नहीं की जा रही है। इन खुराफातों के लिए अभी तक किसी को चिन्हित तक नहीं किया जा सका। साजिशों की जानकारी ले पाने में यहां का खुफियातंत्र भी पूरी तरह असफल रहा है। ऐसे में जब डेढ़ महीने बाद यहां विश्व का सबसे बड़ा मेला महाकुंभ होने जा रहा है, जिसमें एक महीने तक करोड़ों लोग संगम तट पर एकत्रित होने जा रहे हैं।
इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.


