टीवी जर्नलिस्ट और एंकर Atul Agrawaal अपने एफबी स्टेटस पर लिखते हैं- ”लोकसभा में आज फिर ये साबित हो गया कि हमारे नेता जो कहते हैं वो करते नहीं। मुलायम सिंह और मायावती समेत 14 दलों ने FDI के विरोध में लोकसभा में भाषण दिया मगर जब मतदान की बारी आई तो माया-मुलायम सदन का बॉयकाट कर दिया। यानि कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार की मदद कर दी और FDI पास हो गया। मतलब ये हुआ कि माया और मुलायम ने जनता के साथ गद्दारी की। दोनों ने जनता से वादा किया था कि FDI का विरोध करेंगे मगर कांग्रेस की हनक या CBI के डंडे के आगे माया-मुलायम ने घुटने टेक दिए… वाह री राजनीति, तुम पर तो शर्म आती है अब।”
अतुल का यह बयान सिर्फ अतुल का नहीं बल्कि पूरे भारतीय जनमानस का है. ये अलग बात है कि अशिक्षा, जातीयता और धार्मिक भावनाओं के कारण लोग अपना वृहत्तर हित नहीं देख पाते और तात्कालिक लाभ हानि के चक्कर में अवसरवादी पार्टियों को जिताते-हराते रहते हैं और इन्हीं भ्रष्टाचारियों में से अपना एक प्रभु चुन लिया करते हैं. एफडीआई के पक्ष में ज्यादा वोट आने से स्तब्ध लोगों में से एक डा. कुमार विश्वास कहते हैं- ”देश के लिए एक शर्मनाक शाम ! कर्णधारों ने जनता के साथ भद्दा मज़ाक किया है ! पुराने वक़्त में गद्दारों के नाम होते थे…जयचंद, मीरजाफर….अब तो नाम भी सब ने एक जैसा रख लिया…”नेता” ! अपने ही मालिकों की पीठ में छुरा…? उफ़…अगर यही राजनीती है तो इसे खत्म कर के, इस देश के नौज़वानो को एक नयी “धर्मनीति” बनानी पड़ेगी…चाहे वोट से बने या रक्त से….!”
उल्लेखनीय है कि एफडीआई के पक्ष में 253 वोट, विपक्ष में 218 पड़े. कुल471 वोट पड़े. मुलायम और मायावती की पार्टियों ने एफडीआई पर वोटिंग में बहिष्कार किया. युवा पत्रकार शिवानन्द द्विवेदी सहर की टिप्पणी है- मुलायम तुमको नहीं माफ करेगा देश …!!, यही मुलायम का असली चरित्र है, समाजवादियों को भागते हुए देख लो देशवासियों ! इस देश का समाजवाद ऐसा ही भगेडू है !! युवा पत्रकार Nihal Singh भी यही कहते हैं- ”दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि देश आज हार गया है और FDI(FIR INDIA DUBEGA) जीत गया है। ऐसा लग रहा है कि शायद इस समय देश में महात्मा गांधी होते तो क्या होता..”
Amit Kumar की टिप्पणी है- ”अजब मुलायम की गजब कहानी.” चन्द्रभाल सिंह कहते हैं- ”शर्म आ रही की हम उसी प्रदेश से है जहाँ से देशद्रोही मुल्लायम और दौलत की बेटी माया है ….इन्होने हम सभी उत्तर प्रदेश वासियों का सर शर्म से झुका दिया..”
Raj Kamal का फेसबुक पर कहना है- ”मुलायम सिंह ने आज देश को यह बता दिया कि वो देश के लिए नहीं बल्कि अपने स्वार्थ के लिए राजनीति करते हैं।”
कुछ अन्य टिप्पणियां-
Himanshu Dwivedi : Mulayam & Mayawati are spineless and shameless political leader who don’t have guts & nuts to express their opinion on an issue on a democratic platform given to them by the people. They simply chose to escape. Or of they are not above they are mindless to have any opinion or view on national issues.
Shravan Kumar Shukla : सीबीआई है कांग्रेस का सबसे विश्वसनीय “सहयोगी”, जिसके दम पर ‘यूपीए’ ने ‘एनडीए’ को हरा दिया..! लो भैया..आखिर ‘सीबीआई’ ले ही आई अपने भाई ‘एफडीआई’ को..!
Pankaj Jha : ’एफडीआई बनाम सीबीआई’ क्या सुन्दर सूत्र था सुषमा जी का. इसके बाद क्या कहना शेष रह जाता है. वास्तव में भारत अपने ही घर में हार गया है.
Harishankar Shahi : सरकार को बचाने में किसी भी पार्टी से ज्यादा महत्व सीबीआई का है. ना मानिए तो आज के आंकड़े देखिये. खैर जिसे समाजघात का न्युकिलियर डील याद हो उसे समाजवादीयों का का वाक आउट अजीब नहीं लगेया. कम्युनल कम्युनल कहते रहिये और फायदा उठाते रहिये. अब ऐसे भी पीएम बनेंगे उफ़.
Zafar Irshad : वाह नेता जी और बहेन जी..आप दोनो तो पिछडो-दलितों के बहुत बड़े सरदार माने जाते है..और जब मौका आया तो संसद से मुंह छिपा कर भाग गये..क्या डील की कांग्रेस से???
Danish Azmi : मुलायम और माया भले ही सड़क से लेकर संसद तक FDI के विरोध की बात करते रहे हो मगर आज उनका अलग ही रूप देखने को मिला । मगर आज हुए मतदान के दौरान भले ही अलग मुद्दों को लेकर -सपा बसपा सदन का बहिस्कार कर गये हो मगर सरकार को एक बार फिर इनके बहिस्कार ने वाक्वर दे दिया है । किसानो और आम आदमी के विकास के नाम पर उनका कबाड़ा निकलने वाले सपा सुप्रीमो का चेहरा समूचे देश के सामने आ चूका है । अब तो अखिलेश सरकार उत्तर परदेश में FDI को लागु करना चाहिए अगर लागु नही करते है तो यह साफ़ हो जाएगा की मुलायम की मंशा कुछ और ही है। वोह ख्वाब कुछ और ही देख रहे हो मगर उनका ख्वाब कभी भी पूरा नही हो सकता है । क्यों की कोंग्रेस की सियासी ज़मीन सपा ने जोता है । जिसको अब वोह चुदाने के मूड में है ।
Prashant Pathak : माया मुलायम मुहबोले भाई बहन है मनमोहन के ….बोले कुछ भी करेगे वही जो मन्नू कहेगे …भाजपा को यह बात पता थी वोह तो दो दिन से यही दिखाने में जुटी थी ….माया मुलायम और मन्नू मैकडोनल के लिए दो फीट का आलू देख रहे थे सुषमा जी भी जा पहुची महज़ मसखरी करने अब यह तिकड़ी तो गाठ खोलने से रही …..
Ranjit Singh : रिटेल में एफडीआई पर वोटिंग से पहले सपा-बसपा ने लोकसभा से वॉकआउट किया। इस वाकये पर एक पंक्ति याद आती है… सबका मालिक एक – सीबीआई.


