यूपी में कानून व्यवस्था सत्तासीनों की ‘लौंडी-चेरिया’ बनकर रह गई है। अपराध चरम पर है, अपराधी सीना ताने सरेआम घूम रहे। खाकी नतमस्तक होने को मजबूर है। बगैर लाग-लपेट के कहा जाए तो यूपी में इन दिनों एक नए समाजवाद का ‘उदय’ हो रहा है। ऐसा इसलिए भी है कि सत्ता की कुर्सी पर बैठे कई ‘माननीय’ और उनके परिजन ही अराजक की भूमिका में आकर समाज में खौफ पैदा करने का काम कर रहे हैं। समाज में भय का माहौल बनता जा रहा है। पता नहीं, सत्ता में जिम्मेदारी वाली कुर्सी पर बैठे लोग इसे क्यों नहीं देख पा रहे हैं। आखिर, उनकी आंखों पर लगे चश्मे के शीशे का रंग कितना गाढ़ा है, जो उन्हें यह सब नहीं दिखता।
हालात तब और ज्यादा बिगड़ जाते हैं जब बाड़ ही फसल चरने लगती है। यूपी में भी कुछ ऐसी ही दशा है। ताजा मामला प्रतापगढ़, बलिया और मिर्जापुर जिले के हैं। 15 दिसंबर को प्रतापगढ़ जिले के पट्टी क्षेत्र के गधियावां मोलनापुर गांव में प्रदेश के खादी मंत्री राजाराम पांडेय के भतीजे विनोद पांडेय, सपा के जिला उपाध्यक्ष व मंत्री के पीआरओ देवेंद्र पांडेय करीब पचास समर्थकों के साथ आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के गधियावां मोलनपुर गांव में जमीन कब्जा करने की कोशिश की। इस दौरान मारपीट के बाद पचास राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दहशत फैला दी।
भयभीत ग्रामीण अपने घर छोड़ पलायन करने को मजबूर हो गए। घटना की सूचना पाकर मौके पर पट्टी के कोतवाल प्रभातेश श्रीवास्तव, सीओ प्रेमचंद्र और देवसरा थाने की फोर्स पहुंची तो माहौल में थोड़ी शांति आई। घटना में महिला अनीता समेत कमलेश, अशोक कुमार, विनोद कुमार, तुलसीदास पांडेय, विनोद पांडेय घायल हुए हैं। घायलों को सीएचसी अमरगढ़ भेजा गया पर गंभीर दषा होने से कमलेश और डबलू को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सीओ पट्टी प्रेमचंद का कहना है कि ‘कहा जा रहा है कि खादीमंत्री के भतीजे ने भूमि विवाद में फायरिंग की है, इसमें किसी को चोट नहीं लगी है, किसी ने तहरीर भी नहीं दी है।’ इतनी बड़ी घटना को पुलिस किस तरह से पी जाने की कोशिश में लगी है, यह पुलिस क्षेत्राधिकारी के बयान से साफ जाहिर हो जाता है। पुलिस अफसर यूं ही नहीं नतमस्तक होने को मजबूर हो रहे हैं। इसके पीछे सत्ता का खौफ है।
उधर, बलिया का हाल सुनिए। कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी के चचेरे भाई व ब्लाक प्रमुख के पति सतीश कुमार चौधरी उर्फ नागा शनिवार को अपने चार पांच समर्थकों के साथ इनोवा कार से उपकोशागार पहुंचे और स्वास्थ्य विभाग के सीनियर क्लर्क दयाशंकर को मारपीट कर अधमरा कर दिया। शोरगुल सुनकर वहां कई कर्मचारी पहुंचे पर तब तक हमलावर मौके से भाग निकले। जाते-जाते हमलवरों ने क्लर्क दयाशंकर के पूरे परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी है।
कर्मचारियों के साथ कोतवाली पहुंचे दयाशंकर ने घटना की तहरीर दी है। घटना से आक्रोशित कई कर्मचारी संगठन हड़ताल के रास्ते पर हैं। धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया है। कर्मचारी नेता हमलावरों के गिरफ्तारी की मांग पर अडे़ हुए हैं। मिर्जापुर जिले के मड़िहान इलाके में मड़िहान के तहसीलदार ने जमुई गांव के पट्टाधारक रमाशंकर लोहार को उसके घर से उठवा लिया। रास्ते में मारपीट और धमकी देने के बाद छोड़ दिया। भुक्तभोगी युवक ने एसडीएम को शिकायती पत्र देने के बाद इलाकाई थाने में तहरीर दी है।
एक ही दिन में प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों में सत्ता से जुड़े लोगों का इस तरह की वारदातों को अंजाम देना निश्चित ही अच्छे संकेत नहीं दे रहे। यूपी को बेहतर शासन देने की बात करने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह जी आखिर यह क्या हो रहा है? इस पर अंकुश लगाइए।
इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट


