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बलात्‍कार की शिकार युवती व उसके परिजन को डरा रहे हैं आरोपी, पुलिस चुप

देवरिया। इस समय पूरे देश में जहां बलात्कार के आरोपियों को फांसी की सजा देने के लिए मुहिम चल रहा है और देश की राजधानी दिल्ली आन्दोलन का केन्द्र बनी हुई है। वहीं जिले की पुलिस एक बलात्कारी को बचाने का पूरा प्रयास कर रही है। पुलिस ने पहले तो अभियुक्त पक्ष से मिलकर लेन देन करते हुए समझौता का प्रयास किया और प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने से साफ इन्कार कर दिया। लेकिन 7 माह बाद जब पुलिस महानिदेशक के आदेश से किसी तरह मुकदमा दर्ज हुआ तो पुलिस इस समय अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय वादी और उसके परिजनों को ही परेशान कर रही है। इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है, वह इसको देखेंगे।

देवरिया। इस समय पूरे देश में जहां बलात्कार के आरोपियों को फांसी की सजा देने के लिए मुहिम चल रहा है और देश की राजधानी दिल्ली आन्दोलन का केन्द्र बनी हुई है। वहीं जिले की पुलिस एक बलात्कारी को बचाने का पूरा प्रयास कर रही है। पुलिस ने पहले तो अभियुक्त पक्ष से मिलकर लेन देन करते हुए समझौता का प्रयास किया और प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने से साफ इन्कार कर दिया। लेकिन 7 माह बाद जब पुलिस महानिदेशक के आदेश से किसी तरह मुकदमा दर्ज हुआ तो पुलिस इस समय अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय वादी और उसके परिजनों को ही परेशान कर रही है। इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है, वह इसको देखेंगे।

प्रकरण है तरकुलवा थाना अन्तर्गत ग्राम कंचनपुर का। आरोप है कि इस वर्ष बीते 4 फरवरी को हाई स्कूल की छात्रा ममता सैनी (नाबालिबग) पुत्री नत्थु सैनी के साथ गांव के मनबढ़ गुडडू जायसवाल पुत्र इन्द्रासन जायसवाल ने स्कूल से वापस आते समय गन्ने के खेत में बलात्कार किया। घटना की सूचना पीड़िता के परिजनों ने तरकुलवा थाने की पुलिस को दिया। लेकिन इस मामले में पुलिस ने आदतन इसे पचाने का कार्य किया और दोनों पक्षों में समझौता करने के लिए हर सम्भव प्रयास किया। यहां तक कि गांव की पंचायत ने, जिसमें पुलिस वाले भी शामिल थे, बलात्कार पीड़िता लड़की के अस्मत की कीमत साठ हजार रुपया लगाई और पुलिस थाने में ही आरोपी पक्ष से साठ हजार रुपया नकदी पीड़ित पक्ष को दिलवाकर कई कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए एवं अंगूठा निशान ले लिया गया। इसके बाद पुलिस ने वादी पक्ष के लोगों को डांट फटकार कर थाने से भगा दिया।

उसके बाद इस मामले को लेकर बलात्कार की शिकार की युवती के भाई ने जिले के लगभग सभी अधिकारियों से अपनी गुहार लगाई। उसने महिला आयोग को भी प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। अन्ततः पुलिस महानिदेशक के हस्तक्षेप से बलात्कार की घटना के लगभग सात माह बाद 19 नवम्बर 12 को इस मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई। लेकिन स्थिति अब भी वही है, पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही है न ही उसे फरार घोषित कर जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है। इस दौरान आरोपी तथा उसका भाई योगेन्द्र जायसवाल खुले आम पीड़िता औरे उसके परिजनों से मुकदमा वापस उठा लेने के लिए दबाव बना रहे हैं तथा जान माल की घुड़की धमकी दे रहे हैं। बलात्कार की पीड़िता के भाई ने इस सम्बन्ध में पुलिस के उच्चाधिकारियों से उचित कार्रवाई के लिए निवेदन किया है। इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक दिनेश पाल सिंह का कहना है प्रकरण अभी उनके संज्ञान में नहीं है। वह इसे देखेंगें तथा उचित कार्रवाई करेंगे।

देवरिया से पत्रकार ओपी श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.

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