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लीक से हटकर फिल्में बनाने वाले मणि कौल नहीं रहे

फिल्मफेयर क्रिटिक्स श्रेणी में ‘उसकी रोटी (1971), आषाढ़ का एक दिन (1972), दुविधा (1974) और इडियट (1993) के लिए पुरस्कार पा चुके प्रख्यात फिल्म निर्देशक मणि कौल का निधन हो गया है. 66 वर्षीय मणि कौल का निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ. उन्हें कल ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई पर उनकी घर पर मौत हो गई. उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं. कौल का अंतिम संस्कार लोधी रोड स्थित श्मशान घाट पर किया गया.

फिल्मफेयर क्रिटिक्स श्रेणी में ‘उसकी रोटी (1971), आषाढ़ का एक दिन (1972), दुविधा (1974) और इडियट (1993) के लिए पुरस्कार पा चुके प्रख्यात फिल्म निर्देशक मणि कौल का निधन हो गया है. 66 वर्षीय मणि कौल का निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ. उन्हें कल ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई पर उनकी घर पर मौत हो गई. उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं. कौल का अंतिम संस्कार लोधी रोड स्थित श्मशान घाट पर किया गया. ‘घासीराम कोतवाल’, ‘ध्रूपद’, ‘माती मानस’, ‘नजर’, ‘नौकर की कमीज’ ‘सतह से उठता आदमी’ जैसी अन्य फिल्में भी उन्होंने बनाईं. ये फिल्में यथार्थ जीवन से जुड़ी हैं और लीक से हटकर हैं. कौल का जन्म 25 दिसंबर 1944 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ. उन्होंने भारतीय फिल्म एवं टेलीवीजन संस्थान (एफटीआईआई) में बांग्ला नवयथार्थवादी सिनेमा के पुरोधा ऋत्विक घटक के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त की. ऋत्विक के सरोकारों का युवा कौल के मन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा. कौल को उन भारतीय सिने निर्देशकों की श्रेणी में गिना जाता था, जिन्होंने लीक से हटकर फिल्में बनाईं और नए भारतीय सिनेमा को आकार देने में एक अहम भूमिका अदा की.

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