
बिहार शरीफ : सहारा इंडिया दोबारा कोर्ट में अपीलीय प्रक्रिया में उलझा कर अपना हित साधा जा रहा है. निवेशकों की जमा राशि लौटने के बजाय उसे कन्वर्जन किया जा रहा है. कहीं सहारा इंडिया की यह चाल उसे डूबा न दे. प्राप्त जानकारी के अनुसार बाज़ार नियामक सेबी ने सहारा इंडिया की सहारा हाऊसिंग तथा सहारा रियल स्टेट की दो योजनाओं के मार्फ़त वसूल की गए राशि को अवैध करार दिया था. जानकर बताते हैं कि आदेश के समय लगभग 96000 करोड़ रुपये दो योजनाओं में जनता ने निवेश किया था. दो योजनाओं को सेबी द्वारा अवैध ठहराने के बाद सहारा इंडिया अपने अन्न योजनाओं में उक्त राशि को कन्वर्जन करवाना शुरू कर दिया था. अपीलीय प्रक्रिया में उलझा कर सहारा इंडिया ने अपना हित साधने का काम किया है. बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसला आने तक सहारा इंडिया ने लगभग 17400 करोड़ रुपया ही उक्त दोनों योजनाओं में जमा रहने की बात बतायी गयी है.
सहारा इंडिया के दुबारा देश के कई अखबारों में दो-दो पेज का विज्ञापन छपवाकर यह कहा गया था कि निवेशक घबराये नहीं. हमारे पास पैसे की कमी नहीं है. सभी की राशि सुरक्षित है. परन्तु, दावा के विपरीत हकीकत कुछ और ही हैं. सहारा इंडिया अगर पाक-साफ होती तो माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तुरंत राशि लौटा देती लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. सहारा इंडिया के एजेंट निवेशकों को कनवर्जन करवाने हेतु किसी हद तक भी जाने को तैयार है. एजेंट द्वारा निवेशकों को यह कहा जा रहा है कि आप कनवर्जन करवा लें वरना आपकी राशि वापस लेने हेतु पटना-मुम्बई दौड़ना पड़ेगा. कब राशि मिलेगी वह भी पता नहीं. अधिकांश निवेशक इन एजेंट के झांसा में आकर कनवर्जन करवाने हेतु मजबूर हो रहे हैं, आखिर करे तो क्या? एक निवेशक ने बताया कि क्या करूं, पैसा अटकता हुआ है. सहारा इंडिया एक ही बार न धोखा देगी. एजेंट दुबारा पुनः नया खाता मांगने पर चपल से मारेंगे. कई निवेशक एजेंट के झांसा में नहीं आ रहे हैं. एजेंट गलत-सलत बातें बता रहे हैं. परन्तु इन पर कोई असर नहीं हो रहा है. वे कह रहे हैं, जो होगा देखा जाएगा. सहारा इंडिया दुबारा हमेशा कहा जाता है कि यह कंपनी निवेशकों के हित की रक्षा करती है. परन्तु हकीकत कुछ और ही है. आम निवेशक अपने जरूरत के अनुसार सहारा की विभिन्न योजनाओं में निवेश करती है. कोई बच्ची की शादी तो कोई बच्चे की पढ़ाई हेतु निवेश करता है. ताकि समय आने पर राशि का उपयोग अपने जरूरतों को पूरा करने में कर सकें.
परन्तु, हकीकत आज के राजनेताओं की तरह है. अपना हित साधो, भांड़ में जाये जनता. उसी प्रकार सहारा की मंशा है -अपना हित साधो, भाड़ में जाये निवेशक. आम निवेशकों के साथ सहारा इंडिया मनमानी करती ही है, अपने कर्मचरियों का शोषण करने में जरा-भी गुरेज नहीं करती है. ऑफिस की ड्यूटी है- १० से ५ बजे तक, काम लिया जा रहा है. देर रात तक कर्मचारी करें तो क्या करें. सहारा इंडिया में कोई यूनियन नहीं है. जानकार बताते हैं कि सहारा इंडिया में कला धन का निवेश ज्यादा है. ऐसे निवेशक पकड़ जाने के भय से अपना निवेश दूसरे योजनाओं में तुरंत करवा लेते हैं. सेबी दोबारा अगर पूरे निवेशकों की जमा राशि की जांच किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से करायी जाये तो बहुत बड़ा काला धन का पता चल सकता है. सहारा इंडिया दोवारा निवेशकों को धन वापस करने की बजाय कनवर्जन के मार्फत दूसरे अन्य योजनाओं में निवेश से तो सहारा इंडिया को तात्कालिक फायदा तो हो सकता है, परन्तु भविष्य में उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. एक-एक खाता के तरसना पड़ सकता है.
नालंदा से संजय कुमार की रिपोर्ट.


