Shambhunath Shukla : मुझे समझ नहीं आ रहा कि फेसबुक में ब्राह्मणवाद पर जितना अधिक हमला होता है उतना ही अधिक वह और मजबूत होता जाता है ठीक चीनी पुराणों के फीनिक्स पक्षी की तरह जो अपनी राख से ही फिर पैदा हो जाता है। दरअसल सच्चाई तो यह है कि फेसबुक के दलित पुरोधा ब्राह्मणवाद की बजाय उन लोगों पर हमला करते हैं जो दुर्भाग्य से ब्राह्मण घरों में पैदा हो गए हैं। पूजा और पुजापा अब दलित और पिछड़ों में अधिक है। हाथ देखना और भाग्य बांचने का धंधा अब तमाम पिछड़ी जातियों के लोग कर रहे हैं।
तंत्र-मंत्र और जादू टोना तथा ऐसे ही तमाम टोटके गैर ब्राह्मण हिंदू और मुसलमान करते हैं। यूं ब्राह्मण जाति ही इस सारे परपंच की जनक है लेकिन अब वह कुछ हद तक उससे मुक्त होने लगी है और पिछड़े व दलित उसके गुलाम। अगर हमला करना है तो जड़ पर करो। हिंदू धर्म ही इसका मूल कारक है इसलिए प्रयास यह होना चाहिए कि हिंदू धर्म का ही नाश हो। जब हिंदू धर्म नहीं रहेगा तो न तो जाति रहेगी न ब्राह्मणवाद।
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से साभार.


