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पुलिस फिर संजय नामदेव को फंसाना चाहती है

कॉमरेड संजय नामदेव को फर्जी मुकदमों में गिरफ्तार कर केवल चार दिनों तक ही जेल के अन्दर रख सकी जिला पुलिस ने उनकी रिहाई के दो दिनों बाद ही फिर से गिरफ्तारी का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ऐसा सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि श्री नामदेव की राजनैतिक और समजिक गतिविधियां प्रभावित की जा सके। कॉमरेड नामदेव के सहयोगियों ने यह सूचना दी है कि उनके घर, दफ्तर और बैठने की अन्य जगहों पर बरगवां थाने की पुलिस लगातार दबिश दे रही है। ताजा प्रकरण 307 के एक मुकदमे का है जो नवम्बर 2010 मे कायम हुआ था। मामला हिन्डालको परिसर में एक दुर्घटना में एक विस्थापित श्रमिक की मौत का है, जिसके खिलाफ विरोध प्रर्दशन आयेजित हुए थे। प्रर्दशन के दौरान हुई झड़प के फलस्वरूप कॉमरेड संजय पर 307 का यह मुकदमा कायम किया गया।  

कॉमरेड संजय नामदेव को फर्जी मुकदमों में गिरफ्तार कर केवल चार दिनों तक ही जेल के अन्दर रख सकी जिला पुलिस ने उनकी रिहाई के दो दिनों बाद ही फिर से गिरफ्तारी का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ऐसा सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि श्री नामदेव की राजनैतिक और समजिक गतिविधियां प्रभावित की जा सके। कॉमरेड नामदेव के सहयोगियों ने यह सूचना दी है कि उनके घर, दफ्तर और बैठने की अन्य जगहों पर बरगवां थाने की पुलिस लगातार दबिश दे रही है। ताजा प्रकरण 307 के एक मुकदमे का है जो नवम्बर 2010 मे कायम हुआ था। मामला हिन्डालको परिसर में एक दुर्घटना में एक विस्थापित श्रमिक की मौत का है, जिसके खिलाफ विरोध प्रर्दशन आयेजित हुए थे। प्रर्दशन के दौरान हुई झड़प के फलस्वरूप कॉमरेड संजय पर 307 का यह मुकदमा कायम किया गया।  

लोकविद्या जन आन्दोलन सिंगरौली जिले में राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर बढ़ते दमन का विरोध करता है। पिछले कुछ दिनों में जिले में एसे कई प्रकरण सामने आये है, जिनमें अधिकारगत मुद्दों को उठाने वाले कार्यकर्ताओं अथवा विस्थापित परिवार के सदस्यों को पुलिस द्वारा किसी न किसी मुकदमें में गिरफतार किया गया है। लोकविद्या आश्रम के साथ तमाम अन्य जनवादी संगठनों ने मिलकर नागरिक अधिकारों के हनन के खिलाफ आम आदमी से संवाद हेतु शुरू की गई लोक संघर्ष यात्रा को प्रभावित करने के उद्देश्य से सीपीआई के कार्यकर्ता और आश्रम के सहयोगी संजय नामदेव की गिरफ्तारी की गई। ज्ञात हो की मुकदमे के झूठे होने के कारण तीन दिन में संजय की रिहाई हो गई। पुलिस द्वारा दबाव बनाने की यह ताजा कोशिशें रिहाई के तुरन्त बाद कॉमरेड नामदेव के द्वारा जिले के नागरिक अधिकारगत मुद्दों पर पुनः सक्रिय हो जाने के कारण की जा रहीं है।

कॉरपोरेट लॉबी की तरफदारी में राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं के दमन का सिलसिला देश भर मे जारी है। सिंगरौली में चल रहे कॉरपोरेट लूट के खिलाफ उठती आवाजों को दबाने के लिए भी यही हथकण्डा अपनाया जा रहा है। विस्थापित और प्रभावित परिवारों के पक्ष मे बोलने को प्रशाशन के खिलाफत के रूप मे लिया जा रहा है, जो प्रशाशन को स्वयं ही अपराधिक संदेह के दायरे में खड़ा करता है। लोक पक्ष में सिंगरौली के सभी जनवादी संगठन इन गतिविधियों की आलोचना करते हैं। आने वाले दिनों में कॉरपोरेट-प्रशासन मीलिभगत और राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न रोका न गया तो सभी संगठन आन्दोलन खड़ा करने के लिए बाध्य होंगे। (प्रेस रिलीज)

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