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लखनऊ में पत्रकारों का एक चाकर वर्ग भी है, जो सत्ता का चारण है…

Kashyap Kishor Mishra : समाजवादी सरकार का सच… इस मुल्क में एक सूबा है, उत्तर प्रदेश और इस प्रदेश में एक परिवार की समाजवादी सरकार है, जिसके मुखिया टीपू भईया उर्फ अखिलेश सिंह यादव है। यह सरकार बसपा सरकार के गुंडो के खात्में के वादे से आई थी और इसनें सपाई गुंडो के बल पर बसपा के गुंडों को सूबा बदर कर दिया। इस सरकार में सरकार का इकबाल इतना बुलंद है कि समाजवादी सरकार के खासमखास माफिया जमीन कब्जा करते हैं और उनके सामने शहर का पुलिस कप्तान बेबस हो जाता है।

Kashyap Kishor Mishra : समाजवादी सरकार का सच… इस मुल्क में एक सूबा है, उत्तर प्रदेश और इस प्रदेश में एक परिवार की समाजवादी सरकार है, जिसके मुखिया टीपू भईया उर्फ अखिलेश सिंह यादव है। यह सरकार बसपा सरकार के गुंडो के खात्में के वादे से आई थी और इसनें सपाई गुंडो के बल पर बसपा के गुंडों को सूबा बदर कर दिया। इस सरकार में सरकार का इकबाल इतना बुलंद है कि समाजवादी सरकार के खासमखास माफिया जमीन कब्जा करते हैं और उनके सामने शहर का पुलिस कप्तान बेबस हो जाता है।

 

पुलिस तभी हाथ हिलाती है, जब उसके उपर किसी मंत्री या समाजवादी पार्टी के किसी पदाधिकारी का वरदहस्त हो। पुलिस के लिए अपनी यह वफादारी जाहिर करने की ललक इतनी बेहिसाब है कि मंत्री-मंत्राणी के जूते साफ करनें से लेकर किसी पत्रकार को जला कर मार डालने जैसी हरकतें करने में भी उत्तर प्रदेश की मित्र-पुलिस पीछे नहीं रहती। सरकार अपने इन टुकड़ों पर पलनेवाले वफादारों का इतना ख्याल रखती है कि जो कोतवाल एक पत्रकार को जला कर मारने का आरोपी है, उसे इस अपराध के आरोप पर शाहजहाँपुर से उसका तबादला झाँसी कर देती है, राज्यमंत्री पर प्राथमिकी दर्ज हो जाती है। वैसे भी जो पुलिस समाजवादी सरकार के तलवे चाटती हो, और एक समाजवादी पार्टी की सरकार के मंत्री के इशारे पर, जैसा कि आरोप है, एक पत्रकार को जलाकर मार डालती हो, वो उस मंत्री के खिलाफ कैसी जाँच करेगी, इसका नमूना हम मोहनलाल गंज में निर्भया के बलात्कार और उसकी हत्या की जाँच के नतीजे में देख चुके हैं।

तो एक तरफ लखनऊ में, जब सूबे की सरकार हार्ट अटैक से मरे एक पत्रकार स्वर्गीय नथुनी यादव को बीस लाख की मदद दे रही होती है, तो दूसरी तरफ समाजवादी सरकार के एक मंत्री की दी मौत से तड़प तड़प कर, लखनऊ में एक पत्रकार अपनी आखिर साँस लेता है। लखनऊ की आबोहवा में कोई तनातनी नहीं, कोई शिकवा-शिकायत नहीं क्योंकि लखनऊ में पत्रकारों का एक चाकर वर्ग भी है, जो सत्ता का चारण है, यह समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता की तरह काम करते हुए एक मृत पत्रकार को मुख्यमंत्री की बीस लाख की मदद की खबर तो बनाता है पर समाजवादी पार्टी की सरकार के एक मंत्री द्वारा एक पत्रकार की हत्या की खबर दबा जाता है।

युवा पत्रकार कश्यप किशोर मिश्र के फेसबुक वॉल से.

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