Amitabh Thakur : महिला आयोग की सहायता से मंत्री श्री गायत्री प्रजापति द्वारा हमें दो फर्जी रेप केसों में फंसाने के सम्बन्ध में एफआईआर लिखवाने मेरी पत्नी नूतन 10 जून को थाना गोमतीनगर गयी. एफआईआर दर्ज नहीं हुआ, कहा गया डीआईजी के कहने पर एफआईआर होगा. वे 11 जून को डीआईजी श्री आर के चतुर्वेदी से मिलीं, उन्होंने कहा 3 दिन में जांच कर एफआईआर हो जाएगा. आज 4 दिन बीत गए हैं. अब हम इस एफआईआर के लिए डीजीपी साहब से मिलेंगे. क्या बिना जान दिए एफआईआर दर्ज नहीं हो सकता?
महिला आयोग की सहायता से मंत्री श्री गायत्री प्रजापति द्वारा हमें दो फर्जी रेप केसों में फंसाने के सम्बन्ध में एफआईआर लिखवाने सम्बंधित हमारा प्रार्थनापत्र डीजीपी साहब ने ले कर रख लिया और एफआईआर दर्ज करने के सम्बन्ध में कोई निश्चित बात नहीं कही. अब कोई कहाँ जाए?
कल डीजीपी आवास से गुजरते समय देखा कि डीजीपी सुरक्षाकर्मी सहित सरकारी गाडी में बैठे थे और उनके आगे और पीछे कई सुरक्षाकर्मियों से भरी दो गाड़ियां चल रही थीं. इसके विपरीत मुझे जरुरत के बाद भी एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं दिया जा रहा है. मेरी जानकारी के अनुसार डीजीपी को शासनादेश दिनांक 09/05/2014 के अनुसार यह सुरक्षा कत्तई अनुमन्य नहीं है. ऐसे में शासनादेश के विपरीत खुद के लिए यह सुरक्षा किस तरह? और यदि डीजीपी को इतनी सुरक्षा की जरुरत तो उनके एक आईजी को एक सुरक्षाकर्मी भी क्यों नहीं?
यूपी कैडर के आईपीएस और वर्तमान में आईजी अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.


