Sandip Naik : बेहद आहत हूँ Vasant Shendye के निधन की खबर से। वसन्त और स्मिता सन 2005 में लगभग मेरे साथ ही भोपाल आये थे, हम अच्छे दोस्त बनें और बहुत करीबी दोस्त बन गए। इस बीच हम हमेशा मिलते और काम की और बाकी दीगर बातें भी करते। वसन्त ने बाद में साइट सेवर ज्वाइन कर लिया था। इधर उन्होंने भोपाल में अपना मकान भी ले लिया था और अक्सर कहते कि यार अबकी बार आओ तो यही रह जाना गप शप करेंगे। अंधत्व निवारण को लेकर हम खूब बातें करते। मैं कभी ग्वालियर से या डिंडोरी से दृष्टि बाधित बच्चों और वृद्ध लोगों की समस्याओं का हल पूछता।
आज आरती ने यह दुखद सूचना फेस बुक पर डाली कि वसंत का उप्र के प्रतापगढ़ के एक होटल में आग लगने से और कमरे में ही घुटकर मर जाने से निधन हो गया, तो मैं पगला गया और लगभग चीखते हुआ बोला आरती ये क्या लिख रही हो, होश में हो, क्या पता था की यह खबर सच निकलेगी। Arti Pandey ने बताया कि उनकी पार्थिव देह को लेकर लोग इलाहाबाद से गुजर रहे होंगे, और मैं इलाहाबाद पहुंचा ही हूँ। कितना कष्टप्रद है यह सब लिखना !!! वसंत के साथ साइट सेवर के चार और साथी थे , साथ ही पांच अन्य मुसाफिर भी मर गए! क्या देश है, क्या व्यवस्था है और क्या सरकार है, ये उत्तर प्रदेश कितना निकृष्ट हो गया है कि दस इंसान जलकर मर जाए और वो भी बिजली जैसी समस्या के कारण !!! किस तरह की व्यवस्था में हम रह रहे है ? इस होटल और सम्बंधित प्रशासन पर दस हत्याओं का मुकदमा चलना चाहिए। मप्र में हम लोग अभी डा अजय खरे की मौत का सदमा भूले भी नही, उबर भी नही पाये है, और अब वसन्त की यह दुखद मौत, उफ़्फ़। Smita Shendye और श्रावणी हम सब तुम्हारे साथ है हिम्मत नही हारना। वसंत के लिए हार्दिक श्रद्धांजलि और नमन।
Sachin Kumar Jain : आज सुबह अखबार में पढ़ा कि शुक्रवार को उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ की एक होटल में आग लगने से दस लोगों की मृत्यु हो गयी. इनमें से भोपाल के एक वसंत सिंधे भी हैं. एक पल को लगा भोपाल के वसंत सिंधे; क्या ये अपने वसंत भाई है? फिर लगा ये क्या सोचा रहा हूँ? वे वंसत सिंधे नहीं हैं. अभी पता चला के वे तो अपने वसंत भाई ही हैं…..पिछले दो-तीन महीनों से उत्तरप्रदेश में कुछ कामों को लेकर उनसे लगातार बात हो रही थी. ये आखिर हो क्या रहा है? क्यों हो रहा है और किनके साथ हो रहा है? यह बड़ा आघात है!
Rajeev Dhyani : अभी-अभी एक बहुत बुरी खबर मिली है. यकीन ही नहीं हो पा रहा है. फेसबुक पर हमारे मित्र और प्रखर सामाजिक एक्टिविस्ट भाई Dharmendra Rai का प्रतापगढ़ में एक दुर्घटना में देहांत हो गया. भाई लेनिन और वाराणसी के दूसरे मित्रों से अभी पता चला है. हम सभी का बहुत बड़ा नुकसान है ये. अंतिम संस्कार संभवतः कल प्रातःकाल मणिकर्णिका घाट पर होगा. ईश्वर उन्हें अपने बहत पास स्थान दे. और उनके परिवार और मित्रों को दुःख का सामना करने की शक्ति भी. बहुत दूर तक याद आयेंगे आप धर्मेन्द्र भाई… कालाय तस्मै नमः
संदीप नाईक, सचिन कुमार जैन और राजीव ध्यानी के फेसबुक वॉल से.


