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अन्ना के फैसले पर अग्निवेश का सवाल- सरकारी ड्राफ्ट देखे बिना आंदोलन क्यों?

स्वामी अग्निवेश भी विचित्र चीज हैं. कभी वह सरकारी प्रवक्ता लगने लगते हैं तो कभी जनता के सच्चे प्रतिनिधि. अन्ना हजारे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनलोकपाल बिल के लिए आंदोलन शुरू करने वाले स्वामी अग्निवेश अब सरकारी बोली बोल रहे हैं. उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन के औचित्य पर सवाल खड़ा कर दिया है. उनका कहना है कि अन्ना ने जो आंदोलन अभी प्रस्तावित किया है, वह ठीक नहीं है क्योंकि उन्होंने अभी तक सरकारी ड्राफ्ट देखा ही नहीं है. बिना सरकारी ड्राफ्ट देखे और बिना यह बताए कि सरकारी ड्राफ्ट में क्या सही है और क्या गलत है, आंदोलन का फैसला ले लेना उचित नहीं है.

स्वामी अग्निवेश भी विचित्र चीज हैं. कभी वह सरकारी प्रवक्ता लगने लगते हैं तो कभी जनता के सच्चे प्रतिनिधि. अन्ना हजारे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनलोकपाल बिल के लिए आंदोलन शुरू करने वाले स्वामी अग्निवेश अब सरकारी बोली बोल रहे हैं. उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन के औचित्य पर सवाल खड़ा कर दिया है. उनका कहना है कि अन्ना ने जो आंदोलन अभी प्रस्तावित किया है, वह ठीक नहीं है क्योंकि उन्होंने अभी तक सरकारी ड्राफ्ट देखा ही नहीं है. बिना सरकारी ड्राफ्ट देखे और बिना यह बताए कि सरकारी ड्राफ्ट में क्या सही है और क्या गलत है, आंदोलन का फैसला ले लेना उचित नहीं है.

स्वामी अग्निवेश ने ये बातें मेरठ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही. अग्निवेश का कहना है कि अन्ना लोकपाल के मुद्दे पर अब जल्दबाजी दिखाने लगे हैं. संसद में पेश जनलोकपाल बिल के ड्राफ्ट को देखे बिना आंदोलन या आंदोलन का प्रारूप या आंदोलन का स्थल तय कर लेना सही नहीं है. हम लोगों को इंतजार करना चाहिए कि सरकार कैसा बिल पेश करती है. अगर हम लोगों की अपेक्षा पर सरकारी बिल फिट नहीं बैठता है तो एक साथ मिलकर हम सभी फिर आंदोलन की रूपरेखा तय कर लेंगे. स्वामी अग्निवेश का कहना है कि आमरण अनशन हमारा आखिरी हथियार होना चाहिए, इसे पहला हथियार बनाने से बचना चाहिए. स्वामी अग्निवेश ने यह सब कहते हुए यह भी कहा कि वे अन्ना की टीम के सदस्य हैं और रहेंगे.

स्वामी अग्निवेश ने कहा कि सरकारों के पास सभी प्रकार की नीतियां व ताकत होती है. वे साम, दाम, दंड और भेद के आधार पर चीजों को टैकल करते हैं. लेकिन आंदोलन करने वालों के पास केवल ट्रांसपैरेंसी व सच की ताकत होती है. अगर हम ट्रांसपैरेंट नहीं होंगे तो उसका अंजाम भुगतने को हमें तैयार रहना चाहिए. अग्निवेश ने मनमोहन सिंह को आईएमएफ का एजेंट बताया. उन्होंने चिदंबरम के निर्वाचन पर सवाल खड़े करने वाली जया की मांग के आधार जांच कराए जाने का पक्ष लिया.

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