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‘पहल’ का सौवां अंक : पत्रिका की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ज्ञानजी बधाई के पात्र हैं

Mukesh Kumar : पहल का सौवाँ अंक हाथ में है। सुंदर लाल कवर। आकार बदला हुआ और पठनीय सामग्री से भरपूर। पहल भारत के वैचारिक आंदोलन की हिंदी में सबसे महत्वपूर्ण पत्रिका है। कविता, कहानियों के अलावा विचारोत्तेजक सामग्री देने में उसका कोई सानी नहीं है। उसके रचनाकारों का संसार बहुत बड़ा है और बहुत ही प्रतिबद्ध एवं समर्पित भी है। इस पत्रिका को इतने लंबे समय तक (बीच में एक छोटे से व्यवधान को छोड़कर) उसकी गुणवत्ता को बनाए रखते हुए जीवित रखने के लिए ज्ञानजी बधाई के पात्र तो हैं ही, हम सब उनके प्रति आभारी भी हैं। हमारी यही कामना है कि वे और पहल दोनों दीर्घायु हों।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

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