चार-पांच जून की रात में दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के साथ जैसी रावणलीला दिल्ली पुलिस ने खेली थी, उससे नाराज सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई है. सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्यों बिना एफआईआर दर्ज किए उसने रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की. क्यों पंडाल में आंसू गैस छोड़े गए. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया कि वह अपने रावणलीला की कार्रवाई की फुटेज भी प्रस्तुत करे. न्यायालय ने शपथ पत्र दाखिल न करने के लिए केंद्रीय गृह सचिव को भी फटकार लगाई.
बाबा रामदेव ने अपने शपथ पत्र में अपने समर्थकों पर बर्बर पुलिसिया कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदम्बरम को कसूरवार और जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि चिदम्बरम को बुलाकर स्पष्टीकरण मांगा जाए और उन्हें भी इस मामले में पक्षकार जाए. सोमवार को बाबा रामदेव की तरफ से सीनियर एडवोकेट एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. दिल्ली पुलिस की कमान हरीश साल्वे ने संभाली. सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ के सामने जेठमलानी ने कहा कि आधी रात में बाबा के समर्थकों तथा भक्तों के पीछे कार्रवाई करने की क्या जरूरत थी?
जेठमलानी ने पीठ के सामने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे सीधे सीधे गृहमंत्री पी चिदम्बरम का हाथ है. उनके इशारे पर ही पुलिस ने ये रामलीला मैदान में आंसू गैस के गोले छोड़े लाठी चार्ज किया. पूरी रावणलीला में चिदम्बरम का हाथ है. जेठमलानी ने कोर्ट से आग्रह किया कि गृह मंत्री चिदम्बरम को सफाई देने के लिए खुद उन्हें नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए. इसके पहले उच्चतम न्यायालय ने मीडिया की खबरों को स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त दिल्ली को निर्देशित किया था कि वो निजी शपथपत्र दाखिल करके बताएं कि किन परिस्थितियों में बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की गई.
गौरतलब है कि बाबा रामदेव को दिल्ली के रामलीला मैदान से पुलिस ने लाठीचार्ज एवं आंसू गैस के गोले चलाकर उस समय खदेड़ दिया था, जब बाबा काले धन के खिलाफ अनशन कर रहे थे. बाबा को जबरिया हरिद्वार भेज दिया गया तथा 15 दिनों तक दिल्ली में प्रवेश करने पर पाबंदी लगा दी गई थी. इसके बाद ही बाबा रामदेव और उनके भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को नोटिस जारी किए जाने के बाद पिछले सप्ताह शपथपत्र दाखिल किया था. बाबा रामदेव का केस लड़ने वाले राम जेठमलानी ही वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने काले धन के खिलाफ सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल करके विदेशों में जमा कालेधन को भारत वापस लाने की पहल शुरू की थी.


