मनमोहन सरकार में यूपी कोटे के केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की खबर है। असल में कांग्रेस आलाकमान को पिछले काफी समय से ये खबरें मिल रही थी कि बेनी बाबू अपने पुराने समाजवादी घर में जाने को बेताब हैं और वो अपने पुराने समाजवादी सखा सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह से पींगे बढ़ा रहे हैं। बेनी बाबू के पाला बदलने की खबरों से चौकन्ने हुये कांग्रेस आलाकमान ने नाराज बेनी को मनाने के लिए उनका कद मंत्रिमंडल में बढ़ाने का निर्णय कर लिया है। सूत्रों के अनुसार बेनी बाबू को कैबिनेट मंत्री के पद से तो नवाजा ही जाएगा वहीं उनका मंत्रालय बदले जाने की भी संभावना है।
गौरतलब है कि बेनी वर्मा कुर्मी जाति के बड़े नेता हैं और यूपी में खासकर मध्य और पूर्वी यूपी के कुर्मी उन्हें काफी सम्मान देते हैं। इसी समीकरण से मुलायम सिंह को किसी जमाने में काफी फायदा मिलता था। लेकिन अमर सिंह एंड कंपनी ने बेनी वर्मा का भी वही हाल किया था जो हाल राज बब्बर जैसे नेताओं का हुआ था। कई खांटी समाजवादी अमर सिंह के कारण या तो किनारे लग गए या पार्टी छोड़कर ही चले गए। बताते चले कि जनवरी 2011 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भी नाराज बेनी को मनाने की गर्ज से ही उन्हें राज्य मंत्री के पद से नवाजा गया था। तब भी राज्य मंत्री का दर्जा मिलने से बेनी नाखुश थे, मुंहफट बेनी अपनी नाराजगी को मीडिया के सामने भी छुपा नहीं पाये थे। कांग्रेस आलाकमान के समझाने के बाद बेनी ने अपना मुंह दिल्ली में तो जरूर बंद कर लिया लेकिन लखनऊ और बाराबंकी में उनका और उनके प्यादों का दर्द यदा-कदा फूटता ही रहा। ऐसा भी नहीं है कि कांग्रेस आलाकमान को इसकी खबर नहीं है।
सोनिया राहुल के मुंह लगे पुनिया और किदवई बंधु बेनी के गृह जनपद बाराबंकी से ही तालुक रखते हैं। ऐसे में बेनी बाबू के हरकदम और बयान का गुणा-भाग कांग्रेस हाई कमान को पहुंचता रहता है। वहीं पुनिया और बेनी के जो रिश्ते हैं वो बाराबंकी में किसी से छिपे हुये नहीं हैं। दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। दरअसल बाराबंकी में पिछड़ों, दलितों की जमीन बरसों-बरस से बेनी बाबू ने सींची थी उसकी फसल पुनिया काट रहे हैं ऐसे में एक ही पार्टी में होने के बावजूद भी दोनों के बीच गहरे मतभेद और मनभेद हैं। ऐसे में सपा से पाला बदल कर कांग्रेस में आये बेनी के हर कदम पर कांग्रेस हाई कमान की नजर रहती है। दरअसल बेनी कुर्मी बिरादरी से हैं और बाराबंकी जिले में कुर्मी बिरादरी का अच्छा खासा प्रभाव है ऐसे में बेनी के आशीर्वाद के बिना बाराबंकी में पत्ता भी नहीं हिल पाता है। प्रदेश में पिछडे़ वर्ग के नेताओं में उनकी गिनती पहले नम्बर पर होती है। कांग्रेस सांसद पुनिया की जीत के पीछे भी बेनी बाबू का ही हाथ था।
बेनी प्रसाद पुराने खांटी समाजवादी नेता हैं, सपा में तेजी से फैलते अमर प्रभाव, फिल्मी चेहरों और कारपोरेट की दखलअंदाजी से परेशान बाबूजी अर्थात बेनी बाबू ने अपने पुराने समाजवादी सखा मुलायम सिंह को बाय-बाय कह दिया था और सढ़न-कुढ़न और चिढ़न के चलते उस कांग्रेस का दामन थाम लिया, जिसको बेनी बाबू और समाजवादी दोस्त जिंदगी भर कोसते रहे। 2009 के आम चुनावों में बेनी प्रसाद वर्मा ने कांग्रेस की टिकट पर गोण्डा लोकसभा सीट पर जीत का परचम फहराया था। कांग्रेस से हाथ मिलाते समय कांग्रेस और स्वयं बेनी बाबू को यह लग रहा था कि सूबे में पार्टी को एक कदावर पिछडे़ वर्ग का नेता मिल गया है जो प्रदेश में पार्टी की जड़े मजबूत करेगा और पिछड़ी जातियों को कांग्रेस के पक्ष में खड़ा करेगा। लेकिन बेनी बाबू की उम्मीदों पर पूर्व नौकरशाह एवं बाराबंकी से कांग्रेस सांसद एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पन्ना लाल पुनिया ने पानी फेर डाला। पुनिया प्रदेश में पार्टी का पिछड़ा और दलित चेहरा बनकर बड़ी तेजी से उभरे हैं और वो कदम-कदम पर माया सरकार को परेशानी में डालने का काम भी बखूबी कर रहे हैं। ऐसे में बेनी बाबू को जिस मकसद से कांग्रेस ने अपने आंगन में स्थान दिया था या जो कुछ सोचकर बेनी बाबू कांग्रेस में आये थे वो जगह पुनिया ले चुके हैं। वहीं पुनिया राहुल और सोनिया के करीबी माने जाते हैं।
अब सपा में भी अमर प्रभाव का खत्म हो चुका है। मन से खांटी समाजवादी बेनी का मन रह-रहकर सपा के पुराने साथियों से मिलने को ललचाता है लेकिन मजबूरियों के चलते बेनी बाबू बंधक का जीवन निर्वाह कर रहे हैं। बाराबंकी के सिविल लाइन वाले अपने पुराने नगर पालिका वाले मकान में आज भी बेनी बाबू की महफिल में उनके पुराने समाजवादी साथियों का जमावड़ा लगता है। पुनिया की वजह से ही बेनी बाबू की दुकान तो फीकी हुई ही है वहीं उनके बेटे व पूर्व कारागार मंत्री राकेश वर्मा का भी बोरिया बिस्तर राजनीति में बंध चुका है। आसन्न यूपी विधानसभा चुनावों में भी राकेश को कांग्रेस की टिकट मिलने की उम्मीद न के बराबर है, चुस्त और घिसे नेता बेनी को अपनी कीमत और हैसियत का बखूबी अंदाजा है। मुलायम सिंह भी यही चाहते हैं कि उनका पुराना साथी अपने घर में लौट आये, आजम खां तो वापिस आ ही चुके हैं और अगर बेनी बाबू वापिस आ जाये तो विधानसभा चुनावों में रंग जम जाएगा। अभी हाल ही में बाराबंकी जिले की मसौली सीट के बसपा विधायक फरीद अहमद किदवई अपने पुराने समाजवादी घर में जा चुके हैं।
आगामी एक दो दिनों में होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में बेनी बाबू को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने की खबर सूत्रों के माध्यम से आ रही है, असल में बेनी बाबू कांग्रेस में बंदी जीवन ही व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे समय में जब कांगेस 60 साल की उम्र से बड़े मंत्रियों की छुट्टी के संकेत दे रही है ऐसे वक्त पर बेनी बाबू का कद बढ़ाया जाना आखिरकर क्या संकेत देता है। वर्मा प्रदेश में पिछड़ी कुर्मी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं और वो आगामी विधानसभा चुनावों में कोई फेर बदल कर सकने में सक्षम हैं। कहीं बेनी कांग्रेस का बना बनाया खेल न बिगाड़ दे इसी को ध्यान में रखते हुए बेनी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का मन कांग्रेस आलाकमान ने बनाया है। असल में कांग्रेस आलाकमान को बाराबंकी जिले में अपने करीबी किदवई बंधुओं से ये खबर मिल गयी थी कि बेनी बाबू सपा से गलबहिया बढ़ा रहे हैं, ऐसे में उनका कद मंत्रिमंडल में बढ़ा दो वरना पता नहीं कब बेनी बाबू कांग्रेस से सपा में गुलाटी मार जांएगे। कैबिनेट में तो बेनी बाबू का कद तो शायद बढ़ भी जाएगा लेकिन बेनी बाबू आने वाले समय में कौन सी चाल और पैंतरा चलेंगे इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
डा. आशीष वशिष्ठ की रिपोर्ट.


