नई दिल्ली। भ्रष्टाचार और घोटालों से परेशान मनमोहन सरकार को मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद भी राहत नहीं मिली. सरकार को चुस्त दुरुस्त बनाने की कवायद को उस समय झटका लगा जब विभाग बदले जाने से नाराज गुरुदास काम ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. कामत गृह राज्य मंत्री के बजाय पेयजल और स्वच्छता मंत्री बनाए जाने से नाराज थे. नए मंत्रिमंडल विस्तार से श्रीकांत जेना भी खुश नहीं हैं. 1996 में संयुक्त मोर्चा की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, जबकि वे राज्य मंत्री के रूप में ही काम देख रहे हैं. जेना को उम्मीद थी कि इस फेरबदल में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा.
मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले गुरुदास कामत ने डा. मनमोहन सिंह एवं सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र में कहा है कि वह निजी कारणों से मंत्री पद का दायित्व छोड़ना चाहते हैं तथा संगठन की जिम्मेदारी का निर्वाह करने के इच्छुक हैं. माना जा रहा है कि यह नाराजगी प्रधानमंत्री के उस बयान के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगले लोकसभा चुनावों से पहले का यह अंतिम फेरबदल है. इससे माना जा रहा है कि कामत और जेना की उम्मीदें प्रभावित हुईं. कामत जहां अपने पोर्टफोलियो को लेकर नाराज रहे वहीं जेना कि नाराजगी का कारण यह था कि 96 के मंत्रिमंडल में उनके साथ कैबिनेट मंत्री रहे बेनीप्रसाद वर्मा को फिर से कैबिनेट मिनिस्टर बना दिया गया, जबकि उन्हें नजरअंदाज किया गया.


