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सिस्टम में बने रहकर प्रदेश सरकार से आईएएस सूर्य प्रताप सिंह लड़ते तो उन्हें ज्यादा जनसमर्थन हासिल होता

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अमिताभ ठाकुर आईपीएस को उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा धमकी के बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने तथा इस लड़ाई को केंद्र तक ले जाने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को राज्य सरकार ने प्रतिशोध की कारवाही करते हुए १४ जुलाई २०१५ को निलंबित किया था तथा बलात्कार का मुकदमा भी दर्ज कराया था। उसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार में व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक अन्य वरिष्ठ आईएएस सूर्य प्रताप सिंह को प्रो. रामगोपाल सिंह यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में सीधी धमकी दी गयी। यह 37 सेकंड का टेप सुनें, सब साफ़ हो जायेगा।

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अमिताभ ठाकुर आईपीएस को उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा धमकी के बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने तथा इस लड़ाई को केंद्र तक ले जाने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को राज्य सरकार ने प्रतिशोध की कारवाही करते हुए १४ जुलाई २०१५ को निलंबित किया था तथा बलात्कार का मुकदमा भी दर्ज कराया था। उसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार में व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक अन्य वरिष्ठ आईएएस सूर्य प्रताप सिंह को प्रो. रामगोपाल सिंह यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में सीधी धमकी दी गयी। यह 37 सेकंड का टेप सुनें, सब साफ़ हो जायेगा।

एक पत्रकार ने रामगोपाल यादव से प्रदेश में नौकरशाही के अकारण ट्रान्सफर एवं निलंबन से गिरते मनोबल तथा बागी अधिकारियों अमिताभ ठाकुर आईपीएस व सूर्य प्रताप सिंह आईएएस के बाबत सवाल पूछा। साथ ही ये भी कहा कि ये अफसर सरकार के अनैतिक कार्यों पर ऊँगली उठा रहें है। इस पर सांसद राम गोपाल सिंह यादव, जो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा हैं, ने अपने बागी तेवरों के लिए फिलहाल सुर्ख़ियों में शुमार सूबे के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के बारे में निम्न टिपण्णी कर सावर्जनिक अपमान किया, संबंधों की दुहाई दी, और फिर धमकी दी, यही तो करता है, आज का उत्तर प्रदेश का नेता. रामगोपाल यादव, सूर्य प्रताप सिंह के बारे में बोल रहे हैं….टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=ItOK9VSTFsU

“ऐसा है कि कुछ लोगो… का कभी-कभी कुछ नट-बोल्ट ढीले हो जातें हैं, मन चाहे तरह की बात करतें है। मैं एस.पी. सिंह पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता हूँ। वो हमारे सीनियर लीडर रहे हैं …गजेन्द्र सिंह.. उनके दामाद हैं, इस रिश्ते से मैं उनके बारे में कुछ कहना नहीं चाहता हूँ। जानता बहुत कुछ हूँ कि वे क्या कुछ करतें है …. दस साल तक बिना सरकार की अनुमति लिए बाहर रहे, अगर जांच शरू हो जाएगी तो ये दिक्कत में पड़ जायेंगे, इस लिए मैं कुछ कहना नहीं चाहता हूँ।”

इस टेप से तीन बातें सामने आती हैं … एक तो सूर्य प्रताप सिंह के दिमाग के नट-बोल्ट ढीले हो गए हैं अर्थात एक ईमानदार निष्ठावान आईएएस अधिकारी को पागल करार दिया जा रहा है, जो उनका सार्वजनिक रूप से अपमान है। इसी प्रकार का अपमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने १० अप्रैल २०१५ को सूर्य प्रताप सिंह को अपने आवास ५, कालिदास मार्ग पर मीटिंग के बहाने बुलाकर गेट पर खड़ा रखकर किया था।

दूसरी बात, जैसा मुलायम सिंह यादव ने भी अमिताभ ठाकुर के साथ किया, सूर्य प्रताप सिंह को भी उनके ससुराल से संबंधों की दुहाई दी गयी। बाद में अमिताभ ठाकुर को निलंबित कर दिया गया। आज का नेता बाहर से विनम्र दिखाई देता है तथा होता है अन्दर से क्रूर व कुटिल, यही शायद उत्तर प्रदेश के जातिवादी, परिवारवादी यादव परिवार का भी हाल है।

तीसरी बात, सूर्य प्रताप सिंह को अमिताभ ठाकुर जैसी ही धमकी है, जिसमे सीधे-सीधे कहा जा रहा है कि सुधर जाओ नहीं जो जांच पीछे लगा दी जाएगी। यह उत्तर प्रदेश के वर्तमान के नेतायों की कुटिलता है, छल कपट है, जो वे निष्ठावान अधिकारियों के साथ उत्तर प्रदेश में कर रहे हैं और भ्रष्ट तथा दागी अफसर मलाईदार पदों पर बैठा रखे हैं।

सूर्य प्रताप सिंह को आचार संहिता का हवाला दे कर कभी नोटिस तो कभी चार्जशीट की खबर कुछ बिकाऊ पत्रकारों से छपवाई जाती है, जब कि वास्तव में कोई नोटिस या चार्ज शीट सूर्य प्रताप सिंह को कभी नहीं मिली। ऐसा शायद श्री सिंह को दबाब में लेने व बन्दरघुड़की के रूप में किया जा रहा है, ताकि नतमस्तक होकर अन्य चमचों की भांति चरण वन्दना करने लगें। सूर्य प्रताप सिंह नियमानुसार अध्ययन अवकाश लेकर अमेरिका गए थे तथा सभी छुट्टियाँ भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार से स्वीकृत हैं, कोई अनियमितता नहीं की गयी। यदि कोई अनियमितता थी, तो अमेरिका से आने के बाद उन्हें कैसे कार्यभार ग्रहण करा दिया जाता? औद्योगिक विकास विभाग जैसे महत्पूर्ण पद पर कैसे तैनात कर दिया जाता? सरकार के उलटे-सीधे, अनैतिक कार्यों में सहयोग न करने के कारण सूर्य प्रताप सिंह को पिछले 2 वर्ष की अवधि में उ.प्र. की निक्कमी सरकार ने 7 बार ट्रान्सफर कर हतोत्साहित किया। क्यों न धमकी देने वाले रामगोपाल यादव के खिलाफ भी FIR दर्ज करायी जाये? क्यों ऐसे कुटिल राजनीतिज्ञों को बख्शा जाये … जनता तो सब देख रही है। हालांकि वरिष्ठ आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने वीआरएस लेने की अर्जी देकर प्रदेश सरकार से अपनी सीधी जंग को टाल दिया है लेकिन फिर भी उनसे हम सब उम्मीद करते हैं कि वे नौकरी में रहें या न रहें, अन्याय के खिलाफ बेखौफ आवाज उठाते रहेंगे। ये सच है कि अगर वह सिस्टम में बने रहकर प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहते तो उन्हें ज्यादा जनसमर्थन प्राप्त होता।

लेखक यशवंत सिंह हिंदी के चर्चित मीडिया पोर्टल भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक हैं.

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