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डासना जेल के कैदियों ने निकाला अखबार

डासना जेल (गाजियाबाद) में सजा भुगत रहे कैदियों ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपना खुद का अखबार निकाला। इसके संपादक खुद जेल अधीक्षक बने, जबकि पूरी संपादकीय टीम कैदियों की रही। इस टीम में ज्यादातर कैदी उच्च शिक्षित हैं। आठ पेज का त्रैमासिक अखबार का नाम ‘डासना टाइम्स’ नाम से प्रकाशित हुआ।  इस अखबार में जेल की खबर के अलावा कैदियों की ओर से किए जाने वाले कार्यक्रमों और उनकी समस्याओं को प्रकाशित किया जाएगा। बताया जाता है कि अखबार निकालने का प्रस्ताव छह महीने पहले कैदियों की ओर से ही आया था। एनआरएचएम घोटाले में जेल में बंद अतुल निगम ने यह प्रस्ताव दिया था।

डासना जेल (गाजियाबाद) में सजा भुगत रहे कैदियों ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपना खुद का अखबार निकाला। इसके संपादक खुद जेल अधीक्षक बने, जबकि पूरी संपादकीय टीम कैदियों की रही। इस टीम में ज्यादातर कैदी उच्च शिक्षित हैं। आठ पेज का त्रैमासिक अखबार का नाम ‘डासना टाइम्स’ नाम से प्रकाशित हुआ।  इस अखबार में जेल की खबर के अलावा कैदियों की ओर से किए जाने वाले कार्यक्रमों और उनकी समस्याओं को प्रकाशित किया जाएगा। बताया जाता है कि अखबार निकालने का प्रस्ताव छह महीने पहले कैदियों की ओर से ही आया था। एनआरएचएम घोटाले में जेल में बंद अतुल निगम ने यह प्रस्ताव दिया था।

नआरएचएम घोटाले में जेल में बंद अतुल निगम जर्नलिज्म बैकग्राउंड के हैं, वह सात सदस्यीय संपादकीय टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। इस टीम में पूर्व बैंक मैनेजर सुभाष झा भी शामिल हैं, जो दहेज हत्या के मामले में सात साल की सजा काट रहे हैं। जेल अधीक्षक आरआर यादव ने कहा कि वह खुश हैं कि इस पहले से कैदियों को अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इन कैदियों में से कई बहुत अच्छे लेखक और कवि भी हैं।

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