नई दिल्ली। केंद्र सरकार को सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम को मनाने में सफलता नहीं मिली। सरकार ने आखिरकार गुरुवार को सॉलीसिटर जनरल का इस्तीफा मंजूर कर लिया। कपिल सिब्बल मामले की सुनवाई के लिए रोहिंगटन नरीमन को नियुक्त किए जाने से नाराज होकर सुब्रमण्यम ने पांच दिन पहले अपना त्यागपत्र दिया था। सरकार सुब्रमण्यम का इस्तीफा मंजूर नहीं करना चाहती थी, परन्तु सॉलिसीटर जनरल अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं थे।
जानकारी के अनुसार नए विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने गोपाल सुब्रमण्यम का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, इसकी जानकारी सुब्रमण्यम को भी दे दी गई है। सुब्रमण्यम को 15 जून 2009 में सॉलिसीटर जनरल बनाया गया था। भ्रष्टचार के कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की खिंचाई की थी। तब एक लाबी ने सुब्रमण्यम पर आरोप लगाया था कि वो मामलों की सुनवाई में कोर्ट में ढंग से सरकार की तरफ से दलीलें नहीं रख पा रहे हैं।
इसके बाद टेलीकॉम मिनिस्टर कपिल सिब्बल की ओर से रिलायंस को बड़ी छूट दिए जाने के मामले में एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इस मामले पर पैरवी के लिए सरकार ने निजी अधिवक्ता रोहिंगटन नरीमन की सेवाएं ली थीं, जिससे नाराज होकर सुब्रमण्यम ने अपना पद छोड़ने का फैसला ले लिया था तथा अपना इस्तीफा सरकार को सौंप दिया था। प्रधानमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने सुब्रमण्यम को मनाने का प्रयास भी किया था, लेकिन वे अपना इस्तीफा वापस लेने को तैयार नहीं थे।


