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राहुल की राजनीति ने बसपा, भाजपा और सपा को परेशानी में डाला

इन दिनों भारत का सबसे चर्चित चेहरा यदि कोई है तो वो हैं राहुल गाँधी. राहुल ना सिर्फ़ कांग्रेस के बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण नाम हैं. राजनीतिक पार्टियों की मानें तो राहुल इन दिनों उत्तर प्रदेश में तरह-तरह के नाटक कर रहे हैं. पहले उन्हों ने भट्टा पारसौल गाँव के परेशान किसानों से मुलाक़ात की और फिर उसके बाद ग्रेटर नोएडा से अलीगढ़ तक पदयात्रा. राहुल और उनके लोग यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि राहुल जनता से बहुत प्रेम करते हैं इसलिए वो कभी दलित के यहां खाना खाने जा रहे हैं तो कभी दलित का हाल चाल पूछने पहुँच जा रहे हैं. कुछ हद तक देखा जाये तो यह सही भी है।

इन दिनों भारत का सबसे चर्चित चेहरा यदि कोई है तो वो हैं राहुल गाँधी. राहुल ना सिर्फ़ कांग्रेस के बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण नाम हैं. राजनीतिक पार्टियों की मानें तो राहुल इन दिनों उत्तर प्रदेश में तरह-तरह के नाटक कर रहे हैं. पहले उन्हों ने भट्टा पारसौल गाँव के परेशान किसानों से मुलाक़ात की और फिर उसके बाद ग्रेटर नोएडा से अलीगढ़ तक पदयात्रा. राहुल और उनके लोग यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि राहुल जनता से बहुत प्रेम करते हैं इसलिए वो कभी दलित के यहां खाना खाने जा रहे हैं तो कभी दलित का हाल चाल पूछने पहुँच जा रहे हैं. कुछ हद तक देखा जाये तो यह सही भी है।

जो राहुल चैन की नींद सो कर सिर्फ बयानबाजी से काम चला सकते थे वो यदि जनता के बीच जा रहे हैं तो इस से यह साबित तो होता ही है कि उन्‍हें आम जनता से प्रेम है। मगर उनसे कोई यह क्यूं नहीं पूछता कि आपको सबसे अधिक परेशान उत्तर प्रदेश के लोग ही क्‍यों नज़र आ रहे हैं. क्या देश के बाक़ी हिस्सों के किसान बहुत खुश हैं उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है. ऐसा नहीं है. ईमानदारी से देखा जाए तो देश के दूसरे भागों खास तौर पर विदर्भ के किसानों की हालत को कौन नहीं जानता. वहाँ आए दिन किसानों के आत्महत्या की खबरें सुनने को मिलती हैं. मगर राहुल को चिंता है तो सिर्फ़ यूपी के किसानों की.

इस की सब से बड़ी वजह है यूपी का चुनाव. अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले है और इसी चुनाव में लाभ उठाने के लिए राहुल यह सारा खेल खेल रहे हैं. यह हो सकता है की देश के दूसरे नेताओं की भाँति राहुल पूरी तरह से बेईमान नहीं हों, उनके अंदर जनता के प्रति कुछ ना कुछ हमदर्दी है,  मगर यह तो तय है कि पदयात्रा या फिर ग्रेटर नोएडा के किसानों के साथ उनकी जो सहानुभूति दिख रही है वो पूरी तरह से राजनीतिक है. कांग्रेस देश की सबसे बड़ी पार्टी तो है मगर उसके अंदर बेईमान नेताओं की कमी नहीं है,  ऊपर से इन दिनों इस सरकार का कोई ना कोई मंत्री किसी ना किसी मामले में आए दिन जेल पहुँच रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस के पास राहुल ही एक ऐसा चेहरा है जिसे जनता पसंद करती है. इसलिए राहुल को उत्तर प्रदेश की जंग जीतने के लिए तरह तरह की नौटंकी करने के लिए कहा जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि उत्तर प्रदेश के इलेक्शन में राहुल की इस राजनीतिक नौटंकी का क्‍या और कितना लाभ कांग्रेस को मिलता है।

मगर राहुल की पदयात्रा को पूरी तरह से राजनीतिक नौटंकी कह कर नकार देना भी उचित नहीं है। खुद राहुल की मानें तो उनकी इस पदयात्रा का मक़सद भट्टा परसौल से आगरा और अलीगढ़ तक हो रहे भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हुये किसानों से मिलना और उनकी समस्याएं जानना था। अखबार में आई तस्वीरों से तो यह ज़रूर पता चला कि राहुल बहुत सारे किसानों से मिले। गंदे गंदे गांव की खाक छानी, किसानों की समस्याएं सुनी मगर किसानों की इन समस्याओं का वो कितना समाधान कर पाएंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा। भट्टा पारसौल गाँव में पुलिस कारवाई के बाद राहुल उस गाँव गए भी थे धरने पर भी बैठे थे और गिरफ्तारी भी दी थी।

चूंकि अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं इसलिए राहुल की इस पूरी कोशिश को राजनीतिक कहना गलत तो नहीं होगा,  मगर उनकी इस कोशिश की सराहना इस लिए भी की जा सकती है कि ऐसे में जब आज की राजनीति में छोटे छोटे नेता सिर्फ डींगें हाँकते हैं, हेलीकाप्टर में बैठ कर रैली को संबोधित करने चले जाते हैं और एयरकंडीशन कमरों में बैठ किसानों की चिंता की बात करते हैं,  ऐसे में देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति का पैदल यात्रा करना और गाँव की खाक छनना मामूली बात नहीं है। राहुल को कितने कांग्रेसियों का समर्थन प्राप्त है यह तो नहीं पता अलबत्‍ता वो जो कर रहे है उस से दूसरी राजनीतिक पार्टियों को चिंता ज़रूर हो रही है। उन्हें कहीं न कहीं यह डर ज़रूर साता रहा है कि राहुल अपनी इस लोगों से मिलने मिलाने की हरकत से लोगों के बीच मक़बूल हो रहे है और इसका लाभ हर हाल में कांग्रेस को ही मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी यह तीनों पार्टियां ऐसी है जो राहुल की इस पूरी यात्रा को महज़ एक नाटक मान रही है। मगर यहाँ एक खास बात यह भी है कि जिन पार्टियों को राहुल की पदयात्रा या फिर उनका भट्टा परसौल जाना महज़ एक नाटक नज़र आ रहा एएन शिबलीहै वो पार्टियां किसानों के लिए खुद किया कर रही हैं यह भी देखने वाली बात होगी। जहां तक राहुल का सवाल है तो हम उनकी इस यात्रा को नाटक कहें या फिर राजनीतिक लाभ हासिल करने का एक तरीका,  मगर यह तो मानना ही पड़ेगा कि जनता राहुल को खूब पसंद कर रही है। यही कारण है कि वो जहां भी जा रहे हैं उन्हें सुनने और उनसे मिलने के लिए लोगों का तांता लग जाता है। अब राहुल आम जनता के बीच अपनी यह पैठ कितने दिनों तक बनाए रख पाते है यह भी देखना दिलचस्प होगा।

एएन शिबली पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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