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बेटे ने स्कूल में लिखा- ”मैं अवैध संतान, मेरी मां भी इंद्राणी जैसी”

मीडिया द्वारा किसी भी खबर की गैरजिम्मेदार तरीके से रिपोर्टिंग और बेवजह बखिया उधेड़ने की आदत का कैसा प्रभाव ग्रोविंग किड्स पर पड़ता है, इसकी बानगी दिल्ली के एक नामी प्राइवेट स्कूल में देखने को मिली. पिछले हफ्ता शीना बोरा मर्डर केस और इंद्राणी मुख़र्जी का मामला मीडिया में खूब छाया रहा. इस खबर को इस तरह से सनसनीखेज बनाया गया कि लोग कन्फ्यूज्ड हो गए. रिश्ते, सेक्स और लालच का यह कैसा ‘इंद्राणी’ जाल है जो सुलझने का नाम नहीं ले रहा. इसका असर समाज पर तो पड़ा ही लेकिन देश के उन नौनिहालों पर भी पड़ा जिनका अभी इनसे कुछ लेना देना भी नहीं. दिल्ली में 7वीं कक्षा का पढ़ने वाला छात्र क्लास में एक नोट पास करते हुए टीचर द्वारा पकड़ा गया. टीचर ने सोचा ऐसा तो बच्चे करते हैं, लेकिन टीचर के होश उस समय फाख्ता हो गए जब उस नोट में लिखे गए सेंटेंस को पढ़ा. उसमे लिखा था: “मैं अपनी मां-बाप की अवैध संतान हूँ, मेरी मां भी इंद्राणी मुख़र्जी जैसी है. उसके कई मर्दों के साथ संबंध है.”

मीडिया द्वारा किसी भी खबर की गैरजिम्मेदार तरीके से रिपोर्टिंग और बेवजह बखिया उधेड़ने की आदत का कैसा प्रभाव ग्रोविंग किड्स पर पड़ता है, इसकी बानगी दिल्ली के एक नामी प्राइवेट स्कूल में देखने को मिली. पिछले हफ्ता शीना बोरा मर्डर केस और इंद्राणी मुख़र्जी का मामला मीडिया में खूब छाया रहा. इस खबर को इस तरह से सनसनीखेज बनाया गया कि लोग कन्फ्यूज्ड हो गए. रिश्ते, सेक्स और लालच का यह कैसा ‘इंद्राणी’ जाल है जो सुलझने का नाम नहीं ले रहा. इसका असर समाज पर तो पड़ा ही लेकिन देश के उन नौनिहालों पर भी पड़ा जिनका अभी इनसे कुछ लेना देना भी नहीं. दिल्ली में 7वीं कक्षा का पढ़ने वाला छात्र क्लास में एक नोट पास करते हुए टीचर द्वारा पकड़ा गया. टीचर ने सोचा ऐसा तो बच्चे करते हैं, लेकिन टीचर के होश उस समय फाख्ता हो गए जब उस नोट में लिखे गए सेंटेंस को पढ़ा. उसमे लिखा था: “मैं अपनी मां-बाप की अवैध संतान हूँ, मेरी मां भी इंद्राणी मुख़र्जी जैसी है. उसके कई मर्दों के साथ संबंध है.”

इसके बाद तो स्कूल में हडकंप मच गया. बात प्रिंसिपल तक पहुंची और पेरेंट्स को बुलाया गया. फिलहाल अभी लड़के को स्कूल से निलंबित कर उसकी काउन्सलिंग की जा रही है. हालांकि स्कूल ने मामले को दबाने की पूरी कोशिश की लेकिन वे इस मामले में अपने को असहज महसूस कर रहे थे. सवाल यहां यह है कि आप इसे कैसे रोकोगे? सवाल यह है कि आप कैसे अपने बच्चों से कहोगे की न्यूज़ न देखें क्योंकि इसका मनोवैज्ञानिक असर उनके ऊपर पड़ सकता है. यह घटना दिखाती है की आज मीडिया का कैसा असर टीनऐजर्स और छोटे बच्चों पर हो रहा है. आज लगभग सभी स्कूल बच्चों को अखबार पढ़ने की सलाह देते हैं लेकिन तब क्या जब सभी राष्ट्रीय अखबार एक महिला के पर्सनल लाइफ की इस तरह बखिया उधेड़े. सीनियर लॉयर और चाइल्ड राईट एक्टिविस्ट अशोक अग्रवाल ने कहा कि अभी इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया कि मीडिया का क्या असर आज के नौजवानों पर पड़ रहा है. शीना बोरा मर्डर केस दिखता है कि मीडिया ने कैसे अपनी सारी हदें पार कर दी है. (साभार- News18)

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