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आंखों में मिर्च डालने के बाद भी फरार नहीं हो सका कैदी

इटावा : अदालत मे पेशी के दौरान कैदियों के भागने की घटनाएं अमूमन सामने आती रहती हैं। शातिर कैदी पुलिस को चकमा देकर भागने का हमेशा प्रयास करते रहते हैं। इटावा मे आज एक शतिर कैदी ने दो पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च डाल कर भागने की कोशिश की, लेकिन साहसी पुलिस कर्मियों ने मिर्च डाले जाने के बाद भी कैदी को पकड़ लिया और भागने नहीं दिया अब वारदाती कैदी के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।

इटावा : अदालत मे पेशी के दौरान कैदियों के भागने की घटनाएं अमूमन सामने आती रहती हैं। शातिर कैदी पुलिस को चकमा देकर भागने का हमेशा प्रयास करते रहते हैं। इटावा मे आज एक शतिर कैदी ने दो पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च डाल कर भागने की कोशिश की, लेकिन साहसी पुलिस कर्मियों ने मिर्च डाले जाने के बाद भी कैदी को पकड़ लिया और भागने नहीं दिया अब वारदाती कैदी के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।

मिर्च डालने की वारदात को अंजाम देने वाले कैदी ने अपने 3 अन्य साथियों की मदद से भरथना के नगला जगे गांव में साल 2006 मे 12 साल के लडके की हत्या कर दी थी और इसी मामले में मनोज समेत सभी को 12 जुलाई को उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। सिपाहियों की आंखों में मिर्च डाले जाने की घटना के बाद कचहरी में हडकंप मच गया। शिवमंगल सिंह नामक सिपाही कैदी मनोज उर्फ बंटी के अलावा दो कैदी को अदालत में पेशी के बाद वापस हवालात ला रहा था। बीच रास्ते में कैदी मनोज ने अपने वकील से मिलने की जिद शुरू कर दी और जबरदस्ती करके वकील की ओर जाना शुरू कर दिया। जब सिपाही ने इनकार कर दिया तो कैदी ने शिवमंगल की आंखों में मिर्च डाल दी और भागने की कोशिश की,  इसी बीच एक अन्य पुलिसकर्मी प्रणवीर सिंह ने कैदी को पकड़ने की कोशिश की तो कैदी उसकी आंखों में भी मिर्च डाल दी।

आंखों में मिर्च डाले जाने की जलन होने के बाद भी दोनों सिपाहियों ने कैदी को पकड़ लिया और उसके भागने के मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया। आंखों में मिर्च डाले जाने की वारदात के बाद कैदी ने साफ इनकार किया है कि उसने मिर्च नहीं डाली है,  लेकिन पुलिस उपाधीक्षक ने अपनी पड़ताल में पाया कि सिपाहियों की आंखों में कैदी की ओर से मिर्च डाली गई है। अब इस शतिर कैदी के खिलाफ मामला तो दर्ज किया ही गया है,  साथ ही कैदी को इटावा से बाहर भी स्थानांतरण किया जा रहा है। उधर, कानून के जानकार कहते है कि शातिर अपराधियों को अदालत में पेशी के लिये ले जाने के लिये पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होते हैं,  इसी वजह से ऐसी वारदातों को अंजाम देने में शातिर कैदी कामयाब हो जाते हैं।

 

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