
नई दिल्ली: भारत-चीन बार्डर के सीमावर्ती इलाके लद्दाख में भारत और चीन की सेना एक बार फिर आमने-सामने आ गई हैं। लद्दाख के बुर्तसे इलाके में दोनों देशों के बीच तनाव तब बढ़ गया जब पैट्रोलिंग लाइन पर चीन की ओर से बनाए गए वॉच टावर को भारतीय फौज द्वारा गिरा दिया गया। इस इलाके में सीमा के दोनों तरफ बीते कुछ दिनों से फौज की तादाद बढ़ रही है।
चीनी सेना ने पैट्रोलिंग लाइन (वह लाइन जिसके भीतर रहकर गश्त लगाई जाती है) के नजदीक वॉच टावर बना लिया था। जिसे भारतीय सेना और इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस ने गिरा दिया। पिछले वर्ष अगस्त 2014 में चीनी सैनिक लद्दाख के बुर्तसे क्षेत्र में भारतीय बॉर्डर में 25 किलोमीटर अंदर तक घुस आयी थी। अगले दिन जब जवान फिर गश्ती पर निकले, तब भी चीनी सैनिकों ‘यह चीनी इलाका है, वापस जाओ‘ लिखा झंडा ले रखा था। जिसके बाद भारतीय गश्ती दल के साथ क्विक रिएक्शन टीम भी गई, लेकिन चीनी सैनिकों ने जगह छोड़ने से मना कर दिया था।
इसी तरह सितंबर 2014 में 30 चीनी सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को पार कर भारतीय बॉर्डर में 500 मीटर अंदर घुस आये थे और उन्होंने कैंप लगा लिए थे। तब मामले की खबर मिलते ही इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के 70 जवानों को इलाके में तैनात किया गया था। चीनी सेना ने 2014 में 334 बार भारतीय इलाके में घुसपैठ की। यह घुसपैठ लद्दाख के आसपास के इलाकों में हुई है। पिछले साल अगस्त में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब भारत यात्रा पर थे, तब भी लद्दाख में 10 दिन से ज्यादा समय तक घुसपैठ विवाद के चलते भारत-चीन की आर्मी आमने-सामने थी। हालांकि, नवंबर 2014 में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि छुटपुट घटनाएं कई क्षेत्रों में होती रहती हैं। इन्हें एक-दो दिन के भीतर ही सुलझा लिया जाता है। इन्हें आप घुसपैठ की बड़ी घटना नहीं कह सकते। चीन से सटे बड़े हिस्से पर बॉर्डर इमेजनरी है। वहां दोनों ओर की आर्मी एक-दूसरे की तरफ चली जाती हैं।
क्या है विवाद?
भारत और चीन के बीच विवादित इलाका 4000 किलोमीटर का है। लेकिन चीन का मानना है कि सीमा विवाद वाला क्षेत्र महज 2000 किलोमीटर का है। इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर में से अक्साई चीन को चीन के ही सुपुर्द कर दिया है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच अब तक 18 दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है।


