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दास्ताने ज़ी मरूधा- नये मुगले आज़म की जंग

 

कहते हैं की कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं हो सकती, कुछ लोगों की फितरत भी कुछ ऐसी होती है। जिन्हें जो आसरा देता है ये उसी को काट लेते हैं। ऐसे ही नालायक शख्स हैं आलोक शर्मा जिनको अलादीन का चिराग समझकर चैनल की किस्मत को चमकाने के लिये लाया गया, पर जो सब कुछ अच्छा चल रहा था, वो उसी को जला कर खाक करने पर आमादा है। जमाने भर से लड़कर जिसने उसे खुद से भी ज़्यादा इज्ज़त बख्शी, चौगुना ज़्यादा सैलरी दिलवाई, उसके खिलाफ ही यह बंदा आज कंपनी के आला अफसरों की शह पाकर खुली बगावत कर रहा है।

 

कहते हैं की कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं हो सकती, कुछ लोगों की फितरत भी कुछ ऐसी होती है। जिन्हें जो आसरा देता है ये उसी को काट लेते हैं। ऐसे ही नालायक शख्स हैं आलोक शर्मा जिनको अलादीन का चिराग समझकर चैनल की किस्मत को चमकाने के लिये लाया गया, पर जो सब कुछ अच्छा चल रहा था, वो उसी को जला कर खाक करने पर आमादा है। जमाने भर से लड़कर जिसने उसे खुद से भी ज़्यादा इज्ज़त बख्शी, चौगुना ज़्यादा सैलरी दिलवाई, उसके खिलाफ ही यह बंदा आज कंपनी के आला अफसरों की शह पाकर खुली बगावत कर रहा है।

 

 

पिछले महीने जिस शख़्स के इस्तकबाल में सबने मिठाइयाँ बाँटी थीं, जिसकी तरीफ़ में सब लोग कसीदे कसते थका नहीं करते थे, वो भाई खुले में उन्हीं पत्रकार दोस्तों की फजीहत करने में जरा भी नहीं चूकते। अब मजाल देखिये जनाब की, कि अभी चैनल में आए जुम्मा जुम्मा चार दिन नहीं हुए और चले हैं सबों के अज़ीज़ चैनल हैड का ही काम तमाम करने। जिन्होंने दो साल में ईंट से ईंट जोड़ के ज़ी मरुधरा की ऊंची इमारत बनाई और एक-एक नायाब आदमी को इकट्ठा कर कुनबा तैयार किया, जिसकी बदौलत ज़ी मरुधरा को आज राजस्थान रियासत की सारी आवाम रोजाना देखे बगैर रह नहीं सकती।

 

अब ये खुराफाती आदमी वैष्णव भाई जैसी शख़्सियत की दौलत और शोहरत से जल भून कर सरेआम कंपनी के अंदर और बाजार में नामाकूल माहौल बना रहा है। नजदीकी और उम्दा कामगारों को बलि का बकरा बना कर उनकी जगह अपने खासमखासों को भरने की कवायद पर काम जारी है। सरकार का काम देख रहे तजुर्बेकार शख़्स की रोजाना फजीहत की जा रही है ताकि उसकी जगह एक खास मोहतरमा को लाया जा सके, पुरानी टीम को निकाल कर, अपने-अपनों और पुरानों की बढ़ोत्तरी का मुकम्मल इंतज़ाम भी किया जा रहा है। बॉम्बे की एक प्लेसमेंट एजेंसी जिसके मार्फत इन महाशय का दाखिला हुआ है, उसी रास्ते एक नयी टीम का बंदोबस्त किया जा रहा है। इसमें मुलाजिम को उसकी तंख्वाह से तीन से चार गुना ज़्यादा पैसा दिया जाता है जिसका एक हिस्से मुलाजिम अपने पास रखता है दूसरा हिस्सा बॉम्बे में नौकरी लगवाने वाले एजेंट को और बाकी हिस्सा कंपनी में सौदा तय करवाने वाले अफ़सरान को हर महीने पहुँच जाता है। ऐसी भारी तनख़्वाह के बोझ को चैनल कैसे और कब तक झेल पाएगा। जब ये हजरत करोड़ों के वादे कर खुद के मोटे पैकेज, बड़े केबिन बड़े ओहदे का इंतजाम तो कर लेते हैं पर इश्तेहारों के नाम पर चैनल का दामन पूरा सूना कर दिया है कब तक ये अपनी नाकाबिलियत को न्यूज़ टीम की नाकामी बताकर मैनेजमेंट की आंखों में धूल झोंक पायेगा। बाहर बाजार में और अब कंपनी के आला अफसरों को भी इत्मिनान हो चुका है कि इस शेखचिल्ली में कोई दम नहीं है।

 

   अफसोस है की जब कंपनी में एक तरफ पुरुषोत्तम भाईजान जैसे मेहनती और वफादार लोगों कि अनदेखी कऋ जाएगी तो  ऐसे  नए लोग क्या कमाल करेंगे यह तो वक़्त ही बयान करेगा। खैर जो हो रहा है शायद उसका इल्म किसी भी नेकदिल इंसान को पहले हो ही नहीं सकता क्योंकि आलोक जैसे आस्तीन के साँपों कि असलियत तो बाद में ही जाहिर होती है। ये हजरत अपने खास गुर्गों अनुराग आदि को लाने का मुकम्मल इंतजाम कर रहा है ऐसे नकारों के साथ दो दिन का गुजारा करना कोई भी प्रोफेशनल अपनी तौहीन समझता है इसी के मद्देनजर सरकारी महकमों को देखने वाले हमारे भाई ने तो इस्तीफा दे दिया है मुझे इस बात कि फिक्र नहीं कि मेरे जैसे खादिमों कि नौकरी अब ज़्यादा दिन नहीं चल पाएगी क्योंकि अब और जिल्लत रोजाना सही नहीं जाती। पर यह समझना नामुमकिन है कि क्यों इस शख़्स कि बदजूबानी और बदतमीजी को चैनल हैड चुपचाप इस तरह बर्दाश्त कर रहे हैं। ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके मद्देनजर ऐसे एहसान फरामोश को सरताज बनाये रखना ज़रूरी है।  पर उम्मीद है कि वक़्त रहते जल्द ही इस बेगैरत इंसान कि नकेल कसी जाएगी। एक बात मुकम्मल है कि भाईजान के कहर के सामने ये शर्मा महज़ कुछ दिनों का मेहमान रह गया है चाहे इससे पहले इसने पालिटिक्स कर कितनों को उड़ाया होगा पर ये मच्छर हमारे मसीहा का **$छ भी नहीं उखाड़ पाएगा। 

 

 

 

 

 

Frustrated @ Zee Marudhara Rajasthan

 

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