नैनीताल: इस बार नैनीताल का प्रसिद्ध नंदा देवी मेला प्रभुत्व की लड़ाई का अखाड़ा बन गया है। मेले के दौरान स्थानीय खेल के मैदान में दुकानें लगाने के हक का मसला पहले हाई कोर्ट में पहुँचा गया है। अब इन्हीं दुकानों को लेकर नगर पालिका और जिला प्रशासन एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। इस मुद्दे पर मंगलवार की रोज नगर पालिका के चेयरमैन, सभासद, पालिका कर्मचारियों के साथ सड़कों पर उतर आए। नगर पालिका बोर्ड के जन प्रतिनिधि इस मसले में जिला प्रशासन के ऊपर बेजा दखलअंदाजी और उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए पालिका दफ्तर के आगे बकायदा धरने में बैठ गए। पालिका के प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने इतवार की रात को मेला क्षेत्र में पालिका द्वारा आवंटित दर्जनों दुकानों को जबरन हटा दिया और दूर-दराज इलाकों से आए छोटे-छोटे फुटपाथी कारोबारियों के साथ बदसलूकी भी की। जबकि जिला प्रशासन का तर्क है कि पालिका ने ये दुकानें निविदा के बगैर अलॉट की थी।पर बात महज इतनी नहीं है।
दरअसल इस बार नंदा देवी मेले का आगाज ही खटास के साथ हुआ है। मेले का आयोजन पिछले कई दशकों से राम सेवक सभा कर रही है। शुरूआती दौर में मेले में व्यापार गौण था। सत्तर के दशक तक मेले के दौरान एकाध दर्जन चूड़ी-चरेऊ और स्थानीय खान-पान की दुकानें ही लगा करती थी। अस्सी के दशक के बाद मेले में व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ने लगी। देखते-देखते यह मेला एक बड़े व्यापारिक मेले में तब्दील हो गया। मेले के दौरान स्थानीय फ्लैट्स में आठ सौ से एक हजार तक छोटी-बड़ी दुकाने सजने लगीं। इन दुकानों से आयोजक संस्था को हर साल करीब पच्चीस से तीस लाख रुपए की आमदनी होती थी। इस साल राम सेवक सभा उधर मेले की तैयारियों में जुटी थी। मेला शुरू होने के तकरीबन हफ्ता भर पहले उच्च न्यायालय, नैनीताल के एक महिला वकील ने फ्लैट्स में मेले के दौरान लगने वाली दुकानों को लेकर नैनीताल हाई कोर्ट में एक जन हित याचिका दायर कर दी। हाई कोर्ट ने मामले में नगर पालिका को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। नगर पालिका ने दस सितंबर को एक जरूरी मीटिंग बुलाकर फ्लैट्स में लगने वाली दुकानों में पचहत्तर फीसदी हिस्सा पालिका को देने का प्रस्ताव पास कर दिया। इस मामले में चौदह सितंबर को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। नगर पालिका ने उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए कहा चूँकि फ्लैट्स मैदान नगर पालिका के प्रबंध में है। लिहाजा मेले के दौरान यहाँ लगने वाली दुकानों की आमदनी में से पचहत्तर फीसदी रकम नगर पालिका को मिलनी चाहिए, पर मेले का आयोजन करने वाली संस्था राम सेवक सभा इसके लिए राजी नहीं थी। यह जन हित याचिका फ़िलहाल हाई कोर्ट के दो जजों की बैंच के सामने विचाराधीन है।
उधर सोलह सितंबर को उच्च न्यायालय, नैनीताल के एकल पीठ ने नगर पालिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर पालिका के दस सितंबर के प्रस्ताव के मद्देनज़र मेले के दौरान दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया नगर पालिका द्वारा सम्पन्न करने के आदेश दे दिए। साथ ही हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन को दुकानों की नीलामी प्रक्रिया और मेले के दौरान नगर पालिका को जरूरी सुरक्षा मुहैय्या करने के भी निर्देश दिए। नगर पालिका ने मेला-क्षेत्र में दुकानों के आवंटन अपने हाथ में ले लिया। जाहिर है कि राम सेवक सभा का नाराज होना लाजिमी था।
नाराजगी के माहौल के बीच 18 सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मेले का उदघाटन किया। राम सेवक सभा ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने भी उठाया। लेकिन मुख्यमंत्री ने इस विवाद में पड़ना मुनासिब नहीं समझा। वे इसे मुद्दे को आपसी समझ से सुलझाने की सलाह दे गए। नगर पालिका ने उच्च न्यायालय के आदेश पर दुकानें आवंटित कर दी। इस बीच प्रशासन ने पालिका द्वारा आवंटित कुछ अस्थायी फड़ों को हटाने से मामला फिर भड़क गया है। प्रशासन द्वारा हटाए दुकानदारों के साथ नगर पालिका भी सड़कों में पर उतर आई है। नगर पालिका के अध्यक्ष श्याम नारायण ने प्रशासन की इस कार्यवाई को नगर पालिका के कामों में सीधी दखलअंदाजी और हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ करार दिया है। प्रभुत्व और राजस्व की इस लड़ाई में मेले की रौनक फीकी पड़ती नजर आ रही है।


