
नई दिल्ली: पूर्व सैनिकों के लिए ‘वन रैंक वन पेंशन’ की घोषणा के बाद अब अर्द्धसैनिक बलों ने भी इसकी मांग कर डाली है। जिसके लिए वह पूर्व सैनिकों के नक्शे-कदम पर चलते हुए नवबंर में धरना प्रदर्शन करेंगे। माना जा रहा है कि इस मांग को मानने से सरकार पर सालाना 3 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। उन्होंने कहा है कि वह सेना से ज्यादा विषम परिस्थितयों में काम करते हैं। ऐसे में उन्हें भी ‘वन रैंक वन पेंशन’ का लाभ मिलना चाहिए।
पूर्व अर्द्धसैनिकों ने इस मांग को लेकर नवंबर को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का फैसला किया है। इससे पहले पूर्व सैनिकों के भी इसी तरह के धरने के बाद सरकार को ‘वन रैंक वन पेंशन’ की घोषणा करनी पड़ी थी। सशस्त्र बलों की तर्ज पर अर्द्धसैनिकों ने ऐसे समय में ‘रैंक वन पेंशन’ की मांग को लेकर प्रदर्शन की धमकी दी है जब बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। गौरतलब है कि बिहार में अर्द्धसैनिक बलों में रिटायर व कार्यरत अर्द्धसैनिकों की संख्या काफी ज्यादा है।
पूर्व सैनिकों के लिए की गई ‘वन रैंक वन पेंशन’ की घोषणा से केंद्र सरकार पर सालाना 8,300 करोड़ रूपए का भार पड़ेगा। हालांकि पूर्व सैनिक अब भी इस घोषणा से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। केंद्र सरकार को पूर्व सैनिकों से वार्ता के दौरान यह डर सता रहा था कि दूसरे सुरक्षा बलों की ओर से भी ऐसी ही मांग उठ सकती है। अर्द्धसैनिक बलों ने फेसबुक और ट्विटर पर पहले ही ‘वन रैंक वन पेंशन’ अभियान छेड़ दिया है। अर्द्धसैनिक बलों के 9 लाख रिटायर कर्मचारी 26 सिंतबर को सरकार को आखिरी नोटिस देंगे। इससे पहले 22 सिंतबर को आईटीबीपी अधिकारियों ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर इस मामले को उठाया था। जिसके बाद राजनाथ ने उन्हें भरोसा दिया था कि इस मामले को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।


