
मक्का: मक्का में हज यात्रा के बीच शैतान को कंकड़ी मारने के दौरान बड़ी भगदड मच गई। जिसमें 717 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 800से ज्यादा हाजी घायल हो गए हैं। मरने वालों में 14 भारतीय भी शामिल हैं। ये हादसा तब हुआ जब लाखों हाजी शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरी कर रहे थे। 15 दिन के भीतर हज के दौरान ये दूसरा बड़ा हादसा है। हज की अदायगी का आज आखिरी दिन है और आज ही मक्का में ईद का दिन है। हाजी आज ही के दिन मीना, मुज़दलफा और मैदान-ए-अराफात से वापसी के बाद जमेरात में शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा करते हैं।
इस साल 30 लाख से ज्यादा लोग हज करने गए हैं। ये सभी लोग शैतान को पत्थर मारने की रस्म अदा करते हैं और सऊदी वक्त के मुताबिक दिन के 12 बजे तक जमेरात पर कंकडी मारने का वक़्त होता है इसलिए लोग काफी जल्दबाज़ी में होते हैं। हालांकि, शैतान को जहां सांकेतिक कंकड़ी मारी जाती है उस जगह पहुंचने के लिए काफी चौड़े रास्ते के अलावा पांच मंजिला फ्वाइओवर भी बनाए गए हैं, लेकिन लाखों की भीड़ और हाजियों की जल्दबाज़ी से ये हादसा होता है। हादसे की जगह आपात स्थिति से निपटने वाले 4000 जवान तैनात हैं, जबकि 220 एंबुलेंस भी मौके पर हैं। एक हाजी के मुताबिक मक्का में जिस रास्ते से पत्थर मारने के लिए जाने का इंतजाम है उससे लौटने की मनाही होती है, लेकिन कुछ लोग उसी रास्ते से वापस आ रहे थे। जिससे ये हादसा हुआ है। हालांकि, सऊदी सरकार की ओर से ये नहीं बताया गया है कि हादसा कैसे हुआ। शैतान को पत्थर मारने के दौरान हादसे का ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2006 में इस तरह के हुए हादसे में 346 लोग मारे गए थे। 2004 में 251, 1998 में 118 और 1994 में 270 लोग मारे गए थे।आपको बता दें कि इस साल हज के लिए 1।30 लाख भारतीय हज पर गए हैं। हालांकि, अभी पता नहीं चला है कि इस हादसे में किसी भारतीय की मौत हुई है या नहीं।
इससे पहले 11 सितंबर को जुमे की शाम मस्जिद-ए-हरम में हुए क्रेन हादसे में 107 लोग मारे गए थे। ये हादसा इसलिए हुआ क्योंकि मस्जिद के विस्तार का काम चल रहा है और भारी बारिश के कारण एक बड़ी सी क्रेन मस्जिद की दीवारें तोड़ती हुई जमीन पर आ गिरी जिससे 100 से ज्यादा लोग मारे गए। मस्जिद के जिस हिस्से में ये हादसा हुआ था वहां करीब एक हज़ार लोग मौजूद थे।
जानकारी के मुताबिक हज की रस्म पांच दिनों में अदा की जाती है। पहले दिन हाजी मक्का से मीना के लिए रवाना होते हैं। मीना में रात गुजारने के बाद दूसरे दिन सुबह हाजी मीना से मैदान-ए-अराफात के लिए रवाना होते हैं। मैदान-ए-अराफात पहुंचना हज का सबसे जरूरी रुकन (रस्म) होता है। तीसरे दिन ईद होती है और इस दिन लोग कुर्बानी के बाद शैतान को पत्थर मारने के लिए हाजी जमेरात में जाते हैं। इस दौरान हादसे की आशंका होती है। हाजी तीन दिन में किसी भी दिन पत्थर मार सकते हैं, लेकिन ईद के दिन ज्यादातर हाजी पत्थर मारने की जिद करते हैं और इस तरह ये हादसे होते हैं।


