हमेशा राजनीति के शिखर पर रहने की कोशिश में विवादित कथित नेता कम दलाल अमर सिंह की ओर से ऐसे काम होते रहे हैं जो आज की राजनीति के लिये बहुत घातक माने जाते है। और अमर सिंह जैसों को राजनीति की समझ रखने वाले लोग कतई पंसद नही करते हैं, लेकिन अपनी फितरत में माहिर अमर सिंह हमेशा ऐसा चमत्कार करने के चक्कर चलाते रहते हैं ताकि सूरज की रोशनी से उनका चेहरा हमेशा चमकता रहे, लेकिन वो इस बात को भूल जाते है कि सूरज शाम ढलते ही डूबना शुरू कर देता है और रात को सूरज की रोशनी पूरी तरह से खत्म हो जाती है। ऐसे में कोई भी किसी को भी नही देख सकता। ठीक ऐसा ही अमर सिंह के साथ होने जा रहा है। आज के हालात तो ऐसे हो गये हैं जिसके अनुसार यह कहा जा सकता है कि अब अमर सिंह की दुकान बंद होने वाली है।
अमर सिंह की दुकान बंद करने संबधी सवाल उठाने वाले आदमी से इस तरह के सवाल उठना लाजिमी है कि इतने वजूद वाले आदमी का वजूद आखिर क्यों और कैसे खत्म होगा? जिस तरह का माहौल अमर सिंह को लेकर पूरे देश, खास कर सुप्रीम कोर्ट की तनी हुई नजर देख करके अब लगने लगा है कि अमर सिंह की दुकान के बंद होने मे सिर्फ चंद दिन ही बचे है। हमेशा अदालत से अपने पक्ष मे निर्णय कराने वाले अमर सिंह इस बार इस तरह से सुप्रीम कोर्ट के हंटर की चपेट में आये जिससे बच पाना किसी भी सूरत में नही दिख रहा है। संसद नोट कांड में अमर सिंह के हमसफर संजीव सक्सेना के अलावा सुहेल हिन्दुस्तानी की गिरफ्तारी के बाद इस बात की सभांवनाएं तेजी से चल निकली हैं कि अमर सिंह किसी भी समय गिरफ्तार किये जा सकते हैं।
देश के प्रमुख राजनेताओं के बीच जारी गहमा गहमी के बीच ऐसी खबरें व्यापक हो चली हैं कि अमर सिंह के करीबी संजीव सक्सेना के तीस हजारी कोर्ट में दिए बयानों के आधार पर सीबीआई अमर सिंह से संसद नोट कांड में पूछताछ कर सकती है। दिल्ली क्राइम ब्रांच की ओर से बताया जा रहा है कि अमर सिंह के कहने पर ही संजीव सक्सेना 2008 में हुए विश्वास मत के दौरान बीजेपी सांसदों को करोड़ों रुपए देने गया था। इस काम में अमर सिंह का ड्राइवर भी उसके साथ था। संजीव सक्सेना ने खुद को अमर सिंह का सेक्रेटरी बताया था। नोट के बदले वोट कांड में कुछ दिन पहले कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तगड़ी फटकार लगाई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने लगभग तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं की थी। संजीव सक्सेना की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया है कि सांसद नोट कांड में हुई फंडिग के बारे में कई अहम सुराग मिले हैं। अभी पुलिस इस मामले में संजीव सक्सेना का फोन खंगाल रही है ताकि और जानकारियां जुटा सके।
सनद रहे कि 2008 में हुए संसद नोट कांड में बीजेपी के 3 सांसदों ने संसद में सरेआम नोट लहराए थे। इनमें अशोक अरगल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा का नाम शामिल है। देश के संसदीय इतिहास मे पहली बार संसद को शर्मसार करने वाली इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। 3 साल पूरे होने के बाद भी पुलिस यह नहीं पता लगा पाई थी कि सांसदों के पास यह पैसा कहां से आया? अब संजीव सक्सेना की गिरफ्तारी के साथ ही दिल्ली पुलिस ने यह दावा किया है कि नोट के बदले वोट मामले में जल्द ही अमर सिंह और कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं से पूछताछ हो सकती है। अमर सिंह ने इससे पहले गिरफ्तार किए गए संजीव सक्सेना से किसी तरह का कोई संबंध होने से साफ इनकार किया है लेकिन संजीव के इस बात को खुलेआम बोल देने कि संसद में लहराने वाला धन अमर सिंह ने दिया था। इसके उलट संजीव सक्सेना खुद को उनका सचिव बता रहा था। उसने यह भी कहा था कि वह बीजेपी के सांसदों को पैसा अमर सिंह के कहने पर देने गए थे। इस काम के लिए जिस कार का इसतेमाल किया गया था वह अमर सिंह की निजी कार थी। इस काम में उनके साथ उनका ड्राइवर भी मौजूद था। संजीव सक्सेना के इस बयान के बाद अमर सिंह जरूर इस मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। जल्द ही सीबीआई उनसे पूछताछ करके इस मामले में उनकी भूमिका के बारे में खुलासा कर सकती है।
2009 में मनमोहन सरकार के विश्वास मत के समय हुए संसद नोट कांड ने अमर सिंह की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिल्ली क्राइम ब्रांच पुलिस ने यह दावा किया है कि संजीव सक्सेना ही बीजेपी के सांसदों के पास 1 करोड़ रुपए के नोट लेकर गया था। उस समय उसके साथ अमर सिंह का ड्राइवर भी मौजूद था। यह वहीं कांड था जिसने विश्वास मत के दौरान संसद को शर्मसार कर दिया था। कई सांसदों ने सरेआम संसद में नोट लहराते हुए यह आरोप लगाया था कि उन्हें नोट के बदलने वोट देने का लालच दिया गया था।
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी झेंप मिटाने के लिए कैश फार वोट मामले के एक आरोपी संजीव सक्सेना को गिरफ्तार कर लिया। संजीव सक्सेना को समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह का नजदीकी बताया जाता है। हालांकि अमर सिंह ने इस बात से इनकार किया है कि सक्सेना से उनका कोई लेना देना है, पर उन्होंने इतना जरूर स्वीकार किया कि संजीव सक्सेना का उनके यहां आना जाना था। गौरतलब है कि 22 जुलाई, 2008 को भाजपा सांसद अशोक अरगल, फग्गन सिंह कुलस्ते व महावीर भगोरा ने संसद भवन को उस समय सख्ते में डाल दिया था जब उन्होंने वोट के लिए एक करोड़ मिलने की बात संसद को बताई। उन्होंने कहाकि उन्हें यह रकम अविश्वास प्रस्ताव के दौरान संप्रग सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए मिला है। इन सांसदों ने बकायदा उन रुपये को संसद के भीतर लहराए भी थे।
यहां पर इस बात का जिक्र बेहद जरूरी हो जाता है कि कि उस समय मनमोहन सरकार भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु करार के विरोध में वामपंथी दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के कारण अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही थी। कैश फार वोट मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही है। लेकिन वह भी दो साल से इस मामले में हीवा हवाली कर रही थी पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के ढीले रवैये पर सवाल उठाया और दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा। मामला फंसता देख अपराध शाखा सक्रिय हुई।
अमर सिंह के बारे में कुछ बातें ऐसी है, जिसे हर कोई जानता है, उसकी चर्चा हो या नहीं लेकिन आंकलन हर कोई कर सकता है। हर कोई जानता है कि अमर सिंह राजनैतिक के रूप में उतने लोकप्रिय नहीं है जितने अमर को उनके संबधों के चलते जाना जाता है, अमर सिंह की एक सबसे बड़ी खासयित यह है कि जब भी वो किसी के खिलाफ मोर्चा खोलते है तो बिना सबूत के कोई तथ्य उजागर नहीं करते, लेकिन यह सबूत कहां से और कैसे जुटाये जाते हैं, यह किसी ने कभी भी जानने की कोशिश नहीं की। अमर सिंह एक राजनीतिज्ञ होने के बाद भी जिस तरह का खुफिया काम करते है उसे देख कर लगता है कि खुफिया विभाग को अमर सिंह से सीख लेनी चाहिये ताकि उनका खुफिया काम आसान हो जाये। ऐसी भी अफवाहें उड़ती रहती हैं कि अमर सिंह सीडी बनवाकर रिकार्ड रखने में सिद्धहस्त व्यक्ति हैं जिसका इस्तेमाल वे अपने तरह की राजनीति में करते हैं।
अब आप समझ ही गये होगे की अमर सिंह की इतनी तारीफ के पीछे मेरा मकसद क्या रहा होगा ? असल में अमर सिंह को नेता कम ब्लैकमेलर ज्यादा समझा जाता है। कभी सपा महासचिव के रूप मे कम मुलायम सिंह यादव के हमराज के रूप मे अपनी पहचान बनाने वाले अमर सिंह को मुलायम सिंह यादव के भाई रामगोपाल यादव से पंगे लेने के कारण सपा से नमस्ते कर लेनी पडी उसके बाद मुलायम सिंह को पूरे उत्तर प्रदेश मे वजूद हीन करने की गरज से अमर सिंह ने लोकमंच नाम का एक जातीय संगठन खडा कर लिया लेकिन अपने प्रभाव को काबिज करने मे लगे अमर सिंह के लिय सुप्रीम कोर्ट का ताजा हंटर किसी घातक कंरट से कम नही माना जा सकता है।
लेखक दिनेश शाक्य इटावा में सहारा समय के पत्रकार हैं.


