: माया सरकार की नींद अब खुली ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के घोटालों पर : एनआरएचएम का विशेष आडिट महालेखाकार को सौंपा गया : शिकायतें दर्ज कराने के लिए कॉल सेंटर भी खोलने का फैसला : एक डीजी और तीन सीएमओ की हत्या के बाद हुई कार्रवाई : लखनऊ : एक महानिदेशक और तीन सीएमओ की हत्या की सनसनीखेज वारदातों के बाद खरबों रूपयों के घोटाले वाले महकमे के लोकर यूपी की बसपा सरकार की नींद खुली। सरकार ने अब तय किया है कि यूपी में चल रहे केंद्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की खामियों की जांच भारत के महालेखाकार से करायी जाएगी। इन हत्याओं को लेकर लगातार बैकफुट पर आती जा रही प्रदेश की मुख्यमंत्री का यह फैसला प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
वजह यह कि इस घोटाले में सचिवालय पंचम तल यानी मुख्यमंत्री कार्यालय के कुछ आला अफसर और मुख्यमंत्री के बेहद करीबी कुछ मंत्रियों और बसपा के कुछ एमपी तथा एमएलए वगैरह पर भी छींटें साफ तौर पर देखी जाने लगी हैं। सूबे के स्वास्थ्य घोटालों पर मायावती आज आखिर इस बात पर राजी हो ही गयीं कि इस रकम में हुई गड़बडियों का विशेष आडिट भारत के महालेखाकर से करायी जाए। प्रदेश के आला अफसरों के साथ काफी देर तक चली बैठक के बाद मायावती ने आज शाम इस फैसले को मंजूरी दे दी। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप मिश्रा द्वारा अनुरोध पत्र सी0ए0जी0 को भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन भारत सरकार की योजना है। इस योजना का संचालन केन्द्र सरकार द्वारा जारी गयी गाइड लाइन्स के आधार पर किया जाता है। इसके अन्तर्गत सभी कार्ययोजना की वित्तीय स्वीकृतियां भारत सरकार द्वारा परियोजनावार प्रदान की जाती हैं, जिसके कार्यान्वयन का नियमित रूप से अनुश्रवण भारत सरकार द्वारा भी किया जाता है।
प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री को समीक्षा के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में कुछ खामियां नजर आयीं थी। अतः इस योजना के कार्यान्वयन में हर स्तर पर पारदर्शिता बरतने के उददेश्य से उन्होंने कुछ सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश दिये थे। इसके तहत मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के कार्यों के नियमित अनुश्रवण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रबन्धकीय ढांचा को प्रभावी बनाने, समस्त वित्तीय प्रस्तावों के परीक्षण तथा कार्यक्रमों के अन्तर्गत वित्तीय व्यवस्थाओं के पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया है। साथ ही जनपदों में बेहतर वित्तीय प्रबन्धन एवं नियंत्रण हेतु वित्त एवं लेखाधिकारी के 72 पदों का सृजन किया गया है, जिस पर तैनाती कर दी गयी है। साथ ही साथ वित्तीय अनुशासन बेहतर बनाने के लिए फाइनेन्शियल मैनुअल तैयार करके अगले 15 दिन में लागू करने के लिए निर्देशित किया गया है, जिससे प्रत्येक स्तर पर वित्तीय अनुशासन कायम रखा जा सके।


