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दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को रोकने के लिए बच्चों ने लगाई सुप्रीम कोर्ट से गुहार

नई दिल्ली: हाल ही में विश्व बैंक द्वारा विकासशील देशों के शहरों में प्रदूषण के स्तर को लेकर जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों के 381 शहरों में दिल्ली की स्थिति सबसे खराब है। दिल्ली में वायु प्रदुषण खतरनाक स्तर पर है। इस रिपोर्ट से व्यस्क वर्ग चाहे परेशान हो न हो, लेकिन राजधानी के बच्चों में वायु-प्रदुषण के बढ़ते खतरनाक स्तर को लेकर जरूर जागरूकता दिखाई दे रही है। जिसके लिए वह कोर्ट में जाने से भी नहीं हिचक रहे हैं।  6 से 14 वर्ष के तीन बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर शहर में वायु प्रदूषण कम करने की गुहार लगाई है।

नई दिल्ली: हाल ही में विश्व बैंक द्वारा विकासशील देशों के शहरों में प्रदूषण के स्तर को लेकर जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों के 381 शहरों में दिल्ली की स्थिति सबसे खराब है। दिल्ली में वायु प्रदुषण खतरनाक स्तर पर है। इस रिपोर्ट से व्यस्क वर्ग चाहे परेशान हो न हो, लेकिन राजधानी के बच्चों में वायु-प्रदुषण के बढ़ते खतरनाक स्तर को लेकर जरूर जागरूकता दिखाई दे रही है। जिसके लिए वह कोर्ट में जाने से भी नहीं हिचक रहे हैं।  6 से 14 वर्ष के तीन बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर शहर में वायु प्रदूषण कम करने की गुहार लगाई है।

बच्चों ने अपनी अर्जी में कहा है कि शहर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सरकार इसे रोकने में अब तक नाकाम रही है। इन बच्चों ने दीवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर भी परेशानी जाहिर की है। अर्जुन गोपाल, आरव भंडारी और जोया राव भसीन नाम के तीन बच्चों ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। बच्चों ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि वायु प्रदूषण के मसले पर कोर्ट के दिशा निर्देशों का भी पालन नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा।
  गौरतलब है कि एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 10 सालों में दुनिया में वायु प्रदूषण के शिकार सबसे ज्यादा लोग दिल्ली में होंगे। इस रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर प्रदूषण स्तर को काबू में नहीं किया गया तो साल 2025 तक दिल्ली में हर साल करीब 32,000 लोग प्रदूषित वायु के शिकार होंगे।

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