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भगत सिंह की जयंती पर गोष्ठी का किया गया आयोजन, दिवगंत कवि वीरेन डंगवाल को भी दी गई श्रद्धाजंलि

रुद्रपुर: शहीद आजम भगत सिंह के जन्म दिवस पर क्रान्तिकारी नौजवान सभा, ऊधम सिंह नगर द्वारा गोष्ठी को आयोजन किया गया। इससे पूर्व केएनएस द्वारा दो दिवसीय अभियान के तहत स्थानीय ट्रांजिट कैम्प में नुक्कड़ नाटक ‘‘अच्छे दिन’’ की कई प्रस्तुतियां भी की गईं। इस गोष्ठी में यह बात उभऱ कर सामने आयी कि आज जब हम शहीदे आज़म भगत सिंह को याद कर रहे हैं, तब हमारा समाज बेहद संकटों के दौर से गुजर रहा है। आम मेहनतकश जनता लगातार ‘बुरे दिन’ की ओर जा रही है और पूँजीपतियों-धन्नासेठों के लगातार ‘अच्छे दिन’ आ रहे हैं। इस दौरान ‘भगत सिंह की बात सुनो, संघर्षों की राह चुनो’ शीर्षक पर पत्र का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार ने किया। साथ ही कार्यक्रम के अंत में कवि वीरेन डंगवाल जी की मृत्यु पर शोक प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि दी गई।

रुद्रपुर: शहीद आजम भगत सिंह के जन्म दिवस पर क्रान्तिकारी नौजवान सभा, ऊधम सिंह नगर द्वारा गोष्ठी को आयोजन किया गया। इससे पूर्व केएनएस द्वारा दो दिवसीय अभियान के तहत स्थानीय ट्रांजिट कैम्प में नुक्कड़ नाटक ‘‘अच्छे दिन’’ की कई प्रस्तुतियां भी की गईं। इस गोष्ठी में यह बात उभऱ कर सामने आयी कि आज जब हम शहीदे आज़म भगत सिंह को याद कर रहे हैं, तब हमारा समाज बेहद संकटों के दौर से गुजर रहा है। आम मेहनतकश जनता लगातार ‘बुरे दिन’ की ओर जा रही है और पूँजीपतियों-धन्नासेठों के लगातार ‘अच्छे दिन’ आ रहे हैं। इस दौरान ‘भगत सिंह की बात सुनो, संघर्षों की राह चुनो’ शीर्षक पर पत्र का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार ने किया। साथ ही कार्यक्रम के अंत में कवि वीरेन डंगवाल जी की मृत्यु पर शोक प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि दी गई।

    कला, संस्कृति, पत्रकारिता, साहित्य और जनसरोकारों से जुड़े लोगों के जुड़ाव से आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों ने आजादी के जिस पौधे को अपने खून से सींचा था, वो आज मुरझा रहा है। उनका सपना हमारी आँखों में झांक रहा है। उन्होंने युवाओं को आगे आने का आह्वान किया। मज़दूर सहयोग केन्द्र के मुकुल ने कहा कि भगतसिंह के क्रान्तिकारी विचारों को नष्ट करने की तमाम साजिषों के बावजूद वे आम मेहनतकश जनता के आदर्श बने हुए हैं। वे कोई हीरो नहीं बल्कि क्रान्तिकारी धारा के प्रतीक पुरुष हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के अडसठ सालों के दौरान जनता बार-बार ठगी जाती रही। अब मेक इन इण्डिया के नाम पर एक और ठगी जारी है। मोदी सरकार दुनियाभर के मुनाफाखोरों को लूटने का एक और रास्ता मुहैया करा रही है। इसका पर्दाफाश और संघर्षों के नये तरीकों को विकसित करके ही सच्चे अर्थों में भगतसिंह को याद किया जा सकता है।
    इंकलाबी मज़दूर केन्द्र के दिनेश ने भगतसिंह की विकास यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि उस दौर में अंग्रेजो द्वारा लाये जा रहे खतरनाक ट्रेड डिस्प्यूट बिल के खिलाफ बहरे कानों को सुनाने के लिए उन्होंने संसद में बम का धमाका किया था। आज किसानों की जमीन छीनने व श्रमकानूनी अधिकारों में कटौती के लिए उससे भी खतरनाक बिल लाये जा रहे हैं। ऐसे में आज ज्यादा जुझारू संघर्ष की जरूरत है। शिक्षक राजीव अग्रवाल ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री मोदी सिलकॉन वैली में बैठकर देश का सौदा कर रहे हैं, तब भगतसिंह की प्रासंगिकता और बढ़ गयी है। उन्होंने आज संघर्ष का रूप बदलकर उसे रचनात्मक रूप देने की बात की। नैस्ले कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष ऋषिपाल ने भगतसिंह के आदर्श को आगे बढ़ाने की बात की। वहीं वोल्टास इम्पलॉइज यूनियन के महामंत्री पुरुषोत्तम कुमार ने उन्हें सच्चा जननायक बताया।
    जनता जिंदाबाद के नरेश कुमार ने सिलकॉन वैली की चर्चा करते हुए सवाल उठाया कि आखिर विकास का पैमाना क्या है? हमारे प्रधानमंत्री दुनिया भर में हाथ फैलाए घूम रहे हैं, यह देश के लिए शर्म की बात है। जरूरत इस बात की है कि हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए अपनी जरूरतों का अधिकतम देश की धरती से ही प्राप्त करें, इसके लिए खेती, बागवानी, पशु-पालन और देश की जरूरतों के अनुरूप उद्योग इत्यादि का विकास करें।
    वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अयोध्या प्रसाद भारती ने कहा कि आज भगतसिंह की धर्मनिर्पेक्ष छवि को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। जरूरत है कि लोगों में इसके प्रति जागरूकता पैदा की जाए और भगत सिंह के विचारों का आम मेहनतकश जनता में व्यापक प्रसार किया जाए।
    गोष्ठी में रिद्धी सिद्धी कर्मचारी संघ के संजय सिंह, महेन्द्रा सीआईई के संजीत विश्वास, टाटा ऑटोकॉम के पुष्कर, थाई सुमित के संजय यादव, मुकेश कुमार, भूपेन्द्र, कयूम आदि ने भी शिरकत की। गोष्ठी के अन्त में शिक्षक, अमर उजाला के संपादकीय सलाहकार रहे वरिष्ठ साहित्यकार व जनकवि वीरेन डंगवाल के निधन पर दो मिनट मौन रखकर शोक प्रकट करते हुए श्रद्धाजंलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि यह अजीब संयोग है कि श्री डंगवाल जिस भगतसिंह को अपना आदर्श मानते थे, उन्हीं के जन्मदिन पर वे हमारे बीच नहीं रहे। वक्ताओं ने कहा कि हमें भगत सिंह और वीरेंन डंगवाल से सीखते हुए एक बेहतर समाज और राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।

प्रेषक-अयोध्या प्रसाद भारती, रुद्रपुर, उत्तराखंड

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