लखनऊ। उत्तर प्रदेश की डरी हुई और घिरी हुई सरकार अपने ही बुने जाल में फंसने के बाद बाहर निकलने नए-नए हथकंडे अपना रही है। प्रदेश की मायावती सरकार अब चारो तरफ से घिरने के बाद अपने फैसलों से नई मुसीबतों में फंसती नजर आ रही है। सरकार ने आज जहाँ सीएमओ हत्याकांड की सीबीआई जाँच पर पर सफाई दी तो भ्रष्टाचार का नया रिकार्ड कायम करने वाले विभाग राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यानी एनआरएचएम के मद में खर्च हुए पैसे का विशेष आडिट केंद्र सरकार के सीएजी से करने का फैसला लिया है।
यह फैसला ठीक उसी तरह है जैसे समूचे विपक्ष की मांग के बावजूद सीएमओ हत्याकांड की सीबीआई जाँच का फैसला तब किया गया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का इस सिलसिले में फैसला आने वाला था। तब मामला सिर्फ सचान हत्याकांड का था पर जैसे ही अदालत के कड़े तेवरों के बाद सीबीआई का दायरा बढ़ता नजर आया सरकार ने दोनों पूर्व सीएमओ की सीबीआई जाँच का एलान कर अपनी पीठ थपथपा दी। पर जैसे ही राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का मामला गरमाया और अदालत से एक बार फिर किसी आदेश की आशंका सरकार को हुई तो पेशबंदी में सरकार ने आज सीएजी से विशेष आडिट का फैसला किया।
हालांकि सभी जानते है कि सीएजी केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का आडिट करती रही है। दरअसल एक तरफ अदालतें भूमि अधिग्रहण मामले पर सरकार के फैसलों की धज्जियां उड़ा रही हैं तो दूसरी तरफ कानून व्यवस्था से लेकर घपले घोटाले भी अदालतों की प्राथमिकता पर आ गए हैं। चुनाव सामने है और उपलब्धियों के नाम पर सरकार की झोली में किसानो की हड़पी गई जमीन से लेकर हत्या, बलात्कार, घोटाले और घपलों का अंबार है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि उत्तर प्रदेश में पिछले चार साल में मायावती सरकार ने जो कुछ भी किया विपक्ष ने उसका जमकर प्रतिकार भी किया और सवाल भी उठाया।
राजनैतिक टीकाकार सीएम शुक्ल ने कहा -विपक्षी नेता राजधानी की सड़कों पर बुरी तरह पिटे गए और एक समाजवादी पार्टी के एक युवा नेता के सर पर तो पुलिस अफसर के बूट की फोटो भी बहुत चर्चित रही। मुलायम सिंह सड़क पर उतरे तो रीता बहुगुणा जोशी से लेकर सूर्य प्रताप शाही पर लाठियां भी बरसी पर कुछ विद्वानों को यह सब कभी दिखाई नहीं पड़ा। उत्तर प्रदेश में मायावती ने अपने राजनैतिक प्रतिद्वंदियों से किस स्तर पर निपटती है यह देखना हो तो किसी भी जिले में चले जाएं, पता चल जाएगा। पर यह तो साफ़ है कि विपक्ष के आंदोलनों के बाद अदालतों के कड़े तेवर से मायावती चारो तरफ से घिरती जा रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जमीन की तिजारत में इस सरकार के शीर्ष पर बैठे लोगों ने अरबों का धंधा किया तो राजधानी तक आने वाली केंद्रीय योजनाओं में जमकर लूटपाट हुई। जब सरकार के संरक्षण में मंत्री लूटने में जुटे हो तो सांसद विधायकों के दमन शोषण को कौन रोकता। इसी वजह से कई जगहों पर हत्या और बलात्कार के मामले में मंत्री से लेकर विधायक तक फंसे। सरकार की साख बुरी तरह गिरी और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के भ्रष्टाचार और उसपर पर्दा डालने के चक्कर में हुई हत्याओं ने इस सरकार को और फंसा दिया है।
सीबीआई जांच की आंच जल्द ही सत्ता के शीर्ष तक पहुँच सकती है। यही वजह है विपक्ष और हमलावर होता जा रहा है। राहुल गांधी ने आज पूर्वांचल में मायावती सरकार पर हमला बोला तो समाजवादी पार्टी ने लखनऊ में। समाजवादी पार्टी ने आज कहा कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती परिवार कल्याण विभाग में लूट व हत्याओं की जांच की आंच अपने दरवाजे तक आती देखकर घबड़ाहट व बौखलाहट में निर्णय लेने लगी हैं। सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि विभाग के दो सीएमओ डा. विनोद आर्या व डा बीपी सिंह की हत्या व डिप्टी सीएमओ डा. वाईएस सचान की जेल में हत्या की जांच सीबीआई से कराने की मांग जब उनके परिजन कर रहे थे, तो मुख्यमंत्री इसके लिए राजी नहीं थी।
उन्होंने कहा कि मामला हाईकोर्ट जाने पर व सीबीआई जांच के आदेश होने की आशंका पर अपनी किरकिरी बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। यह उनकी सोची समझी रणनीति के तहत की गई कार्रवाई है जिसका उद्देश्य अपने आपको पाक साफ दिखाना है। समाजवादी पार्टी मांग करती है कि सीबीआई जांच में दो सीएमओ व डा. सचान की हत्या के साथ राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की रकम के बंदरबांट की भी पूरी जांच होनी चाहिए, तभी पूरे रहस्य खुलेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले में अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं पाएगा। इसलिए इस संपूर्ण प्रकरण की जांच तक कैबिनेट सचिव, गृह सचिव व स्पेशल डीजी को उनके पदों से हटाया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे अपने पद का दुरुपयोग कर साक्ष्य मिटाने व गवाहों को प्रभावित करने का काम करते रहेंगे। साभार : जनसत्ता


