इटावा : जिला जेल से पेशी पर लाये गये एक कैदी का अपनी बहन से पुलिस गाड़ी में बैठे-बैठे बात करना गुनाह हो गया। कचहरी हवालात में तैनात दरोगा ने कैदी को बुरी तरह से पीट-पीट कर मरणासन्न कर दिया। कचहरी हवालात के बाहर हुये इस वाकये के बाद कचहरी मे हडकंप मच गया। पहले तो पुलिस पूरे मामले को दबाने की कोशिश में लगी रही लेकिन जब मीडिया के बढ़ते दखल को देखा तो घायल कैदी को उपचार के लिये जिला अस्पताल लाये। इस दौरान पूरे परिसर में अफरातफरी का माहौल बना रहा, लोग एक दूसरे से इस बारे में सच जाने के लिए पूछताछ करते रहे।
शनिवार को जिलाकारागार से हवालात लाये गये एक कैदी को लेकर उस समय हड़कम्प मच गया जब कैदियों को लेकर हवालात आई गाडी में रहने के दौरान वह अपनी मौसेरी बहन से बात कर रहा था, इसी दौरान कब सारे कैदी गाड़ी से उतर गये उसे पता नहीं चला। इस पर आक्रोशित दरोगा ने उसका सिर पकड़कर खींचा लेकिन सिर गाड़ी की जाली में टकराने से उसके सिर से खून बहने लगा। इस मामले की जानकारी मीडिया को लगते ही अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया और फोटोग्राफर उसकी फोटो लेने का प्रयास करने लगी, जिस पर पुलिस ने कहा कि घायल कैदी को लेकर जिला अस्पताल पहुंच रहे है। इधर पुलिस उसे लेकर अस्पताल के बजाय सीधे थाना सिविल लाइन पहुंची, जहां उसे काफी देर रखने के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया। इस बारे में मडैंया शिव नरायन मोहल्ला निवासी स्व. राम किशोर लोधी के पुत्र मनोज ने यह बताया कि वह मोबाइल चोरी के आरोप में पिछले 24 दिसम्बर 2006 से धारा 379 और 411 के तहत जेल में बन्द है। इस बारे में दरोगा सीपी सिह सोलंकी ने बताया कि इस कैदी ने खुद को ब्लेड मारकर घायल किया है। अब सवाल उठता है कि जिला जेल से बन्द गाड़ी में हवालात लाये गये इस कैदी के पास आखिर ब्लेड कहां से आया? यह जांच का विषय हो सकता है। पुलिस विभाग के उच्चधिकारियों को इस मामले की जांच गम्भीरता से करानी होगी।
2006 से इटावा जेल में कैद मनोज कुमार को आज करीब 11 बजे तमाम कैदियों के साथ पुलिस वैन से अदालत में पेशी पर लाया गया। इसी दौरान कैदी की बहन भी वैन के पास आ गई और कैदी पुलिस वैन में ही बैठे-बैठे अपनी बहन से बात करने लगा, इसी पर नाराज होकर कैदियों को जेल से लाने वाले दरोगा सोलंकी ने कैदी को पुलिस बैन में बुरी तरह से पीट डाला, जिससे कैदी बुरी तरह से घायल हो गया। पुलिस पूरे मामले की पड़ताल मे जुटी हुई है। कैदी को खूनखच्चर दिशा मे इटावा के डा. भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में दाखिल कराया गया है। मौके पर आये पुलिस उपाधीक्षक एमपी सलोनिया ने जांच करके पुलिस का ही पक्ष लिया और आरोपी दरोगा को निर्दोष करार दिया, लेकिन कैदी मनोज कुमार तो दरोगा को दोषी ठहरा रहा है। साथ ही कई अन्य कैदियों ने भी दरोगा को ही दोषी करार दिया और कैदी का पक्ष लिया।
इससे पहले 18 जुलाई को भी एक उम्रकैद की सजा पाये एक कैदी ने दो सिपाहियों की आंखों मे मिर्च डाल दी, जिससे पुलिस और प्रशासनिक अमले मे हड़कंप मचा हुआ है। अदालत में पेशी के दौरान कैदियों के भागने की घटनाएं अमूमन सामने आती रहती हैं, शतिर कैदी पुलिस को चकमा देकर भागने का हमेशा प्रयास करते रहते हैं। इटावा में आज एक शतिर कैदी ने दो पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च डाल कर भागने की कोशिश की लेकिन साहसी पुलिस कर्मियों ने मिर्च डाले जाने के बाद भी कैदी को पकड़ लिया और भागने नहीं दिया। अब वारदाती कैदी के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।
मिर्च डालने की वारदात को अंजाम देने वाले कैदी ने अपने 3 अन्य साथियों की मदद से भरथना के नगला जगे गांव मे साल 2006 मे 12 साल के लडके की हत्या कर दी थी और इसी मामले में मनोज समेत सभी को 12 जुलाई को उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। सिपाहियों की आंखों मे मिर्च डाले जाने की घटना के बाद कचहरी मे हड़कंप मच गया। शिवमंगल सिंह नामक सिपाही कैदी मनोज उर्फ बंटी के अलावा दो कैदी को अदालत मे पेशी के बाद वापस हवालात ला रहा था, बीच रास्ते मे कैदी मनोज ने अपने वकील से मिलने की जिद शुरू कर दी और जबरदस्ती करके वकील की ओर जाना शुरू कर दिया। जब सिपाही ने इनकार कर दिया तो कैदी ने शिवमंगल की आंखों में मिर्च डाल दी और भागने की कोशिश की, इसी बीच एक अन्य पुलिसकर्मी प्रणवीर सिंह ने कैदी को पकड़ने की कोशिश की तो कैदी उसकी आंखों में भी मिर्च डाल दी। आंखों में मिर्च डाले जाने की जलन होने के बाद भी दोनों सिपाहियों ने कैदी को पकड़ लिया और उसके भागने के मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया।
आंखों में मिर्च डाले जाने की वारदात के बाद कैदी ने साफ इनकार किया है उसने मिर्च नहीं डाली है, लेकिन पुलिस उपाधीक्षक ने अपनी पड़ताल में पाया कि सिपाहियों की आंखों में कैदी की ओर से मिर्च डाली गई है। अब इस शातिर कैदी के खिलाफ मामला तो दर्ज किया ही गया है, साथ ही कैदी को इटावा से बाहर भी स्थानांतरण किया जा रहा है। उधर कानून के जानकार कहते हैं कि शातिर अपराधियों को अदालत में पेशी के लिये ले जाने के लिये पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होते हैं, इसी वजह से ऐसी वारदातों को अंजाम देने मे शातिर कैदी कामयाब हो जाते हैं।
इटावा से दिनेश शाक्य की रिपोर्ट.


