बाराबंकी। केन्द्र सरकार के इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बढ़े आर्थिक साम्राज्य तथा अब तक राजनीति में रहकर कमाई गई अरबों की सम्पत्ति उनके व यूपीए सरकार के लिए गले की हड्डी बनती नजर आ रही है। यही नहीं आरोप यह भी लगा है कि पुत्र को विधानसभा पहुंचाने की बेचेनी में वर्मा ने अपने ही विभाग को घोटाले का आधार बना डाला। फिलहाल समाजवादी चिंतक विचारक व गांधी जयन्ती ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने यह सनसनीखेज आरोप लगाकर बाराबंकी व प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी है।
प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस का जलवा कायम करने के लिए जिन बेनी प्रसाद वर्मा पर कांग्रेस नेतृत्व श्रीमती सोनिया गांधी व महासचिव राहुल गांधी ने बड़ी जिम्मेदारी डाल कांग्रेस सत्ता का सपना पाल रखा है। वही वर्मा अब राजनीति व उम्र के इस पड़ाव पर आय से अधिक मामले व राजनीति के व्यवसाय में कमाई गई अरबों की दौलत के चलते नैतिक सवालों के घेरे में घिरते नजर आ रहे है। समाजवादी विचारक एवं गांधी जयन्ती ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने उन की अवैध रूप से बनाई गई अकूत सम्पत्ति की जांच के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, केन्द्रीय निर्वाचन आयोग, केन्द्रीय सर्तकता आयोग को पत्र भेजकर जांच की मांग की है। वहीं विधानसभा चुनाव से पूर्व इनके द्वारा अपने पुत्र राकेश वर्मा व दिग्विजय सिंह के दामाद राजा रत्नाकर सिंह के क्षेत्र में इस्पात मंत्रालय की रकम से निर्माण कार्यों के नाम पर अरबों रकम के किये जा रहे घोटाले को तत्काल रोकने व इसकी जांच की मांग ने हड़कम्प मचा दिया है।
केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा अपने गृह जनपद में मंत्रालय का सरकारी धन मतदाताओं को लुभाने एवं मतदाताओं को खरीदने हेतु कर रहे है जिसकी निन्दा करते हुए जनपद के गांधी जयन्ती ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने कहा कि मेरी राय में यह कार्य लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार इस धन को जिन प्रदेशों में इस्पात की खानें हैं, जहॉ हजारों मजदूर मजदूरी कर अपना जीवन यापन करता है जिनके बच्चों की शिक्षा एवं किसी दैवीय आपदा या ऐसी जगह धन खर्च किया जाये, जहॉ इस्पात मंत्रालय को लाभ हो तथा जनहित में उक्त धन खर्च किया जाना चाहिए। श्री शर्मा ने बताया कि उपरोक्त मंत्रालय के धन की फिजूल खर्ची एवं उसके रोकथाम के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, केन्द्रीय निर्वाचन आयोग, केन्द्रीय सर्तकता आयोग, एवं मुख्य निर्वाचन आयुक्त, को पत्र के माध्यम से सीबीआई द्वारा जांच कराकर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया। श्री शर्मा ने बताया कि यदि वे इस पर तत्काल रोक नहीं लगाते हैं तो उच्च न्यायालय की शरण में जाकर इस धन के अपव्यय पर अंकुश लगाया जायेगा।
श्री शर्मा ने यह भी खुलासा किया कि बेनी प्रसाद वर्मा ने कुछ वर्ष पूर्व कहा था कि यदि वे मंत्री बनते हैं और मंत्री रहते हुए उनी सम्पत्ति बढ़ती है तो हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह उनकी सम्पत्ति के बारे में सवाल कर सकते है। परन्तु आज वे अकूत सम्पत्ति के मालिक कैसे बन बैठे। यह सोचने का विषय है। सपा से निष्कासन के बाद उन्होंने समाजवादी क्रान्ति दल बनाया उस में वे कामयाब नहीं हुए और अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अपनी पत्नी को अध्यक्ष बनाया तथा स्वयं कांग्रेस में शामिल हो गये वह केवल दल बदल की राजनीति करने वाले व्यक्ति हैं, ऐसे नेता जिनका न कोई विचार है औन ही दर्शन वह केवल और केवल अपने पुत्र राकेश वर्मा को दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के चुनाव लड़ाने की जुगत लगाये बैठे हैं, साथ ही रामनगर विधानसभा से कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह के दामाद रतनाकर सिंह को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इन दोनों विधानसभाओं में इस्पात मंत्रालय के धन का अपव्यय प्रारम्भ कर दिया गया है।
श्री शर्मा ने कहा कि यदि इस्पात मंत्रालय का सरकारी धन बांटा गया है तो इसकी वापसी होनी चाहिए समाजवादी क्रान्ति दल और कांग्रेस के संयुक्त नेता चुनाव के समय मतदाताओं को यह बताने के लिए कि विधि और नियम सब उनके नीचे हैं इसलिए पूर्व में भी जब वे भारत सरकार के केन्द्रीय संचार मंत्री थे तब भी चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव के दिन तक दूर संचार सलाहकार समिति का सदस्य बनाते रहे। जिनकी संख्या लगभग 150 से अधिक थी। उसी प्रकार से इस समय भी सारा देश भ्रष्टाचार से लड़ रहा है तो वे सरकारी खजाने का प्रयोग वोट खरीदने व नोट बांटने में लगे हुए है। इस पूरे मामले की जांच कर बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा बनाई गई अरबों की अकूत सम्पत्ति की जांच की जाये व दरियाबाद रामनगर कुर्सी क्षेत्र में इस्पात मंत्रालय के नाम पर किये जा रहे निर्माण के नाम पर घोटालों की जांच कर कार्यों पर रोक लगायी जाये।
बाराबंकी से रिजवान मुस्तफा की रिपोर्ट.


