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प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों को शर्मिन्दा करने की हद तक गलत और झूठ बोल रहे हैं

Sanjaya Kumar Singh : प्रधानमंत्री देशवासियों को शर्मिन्दा करने की हद तक गलत और झूठ बोल रहे हैं। इसमें किसी को शर्मिन्दा करना और किसी को बिना बात भाव देना भी शामिल है। ठीक है, यह उनका विशेषाधिकार है कि वे अपनी छवि कैसी रखना चाहते हैं पर हमारा काम भी उन्हें बताते रहना है कि हम आपको समझ रहे हैं। कुछ भी बोल देने के अपने अभियान के क्रम में आज उन्होंने अफ्रीकी अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बराबरी कर दी या यूं कहें कि उन्हें नेल्सन मंडेला के बराबर कह दिया। जिस तरह वे और उनके समर्थक हर बात में राहुल गांधी से तुलना करते रहते हैं उसी तरह नेल्सन मंडेला और प्रकाश सिंह बादल में समानताएं नाम मात्र की हैं और वह सिर्फ यह कि मंडेला ने उम्रकैद के 25 साल जेल में काटे हैं तो प्रकाश सिंह बादल 17 साल जेल में रहे हैं। बदले में नौ साल मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री हैं। जबकि नेल्सन मंडेला रंगभेद विरोधी अश्वेतों के नेता थे और उम्रकैद काटने के बाद अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।

Sanjaya Kumar Singh : प्रधानमंत्री देशवासियों को शर्मिन्दा करने की हद तक गलत और झूठ बोल रहे हैं। इसमें किसी को शर्मिन्दा करना और किसी को बिना बात भाव देना भी शामिल है। ठीक है, यह उनका विशेषाधिकार है कि वे अपनी छवि कैसी रखना चाहते हैं पर हमारा काम भी उन्हें बताते रहना है कि हम आपको समझ रहे हैं। कुछ भी बोल देने के अपने अभियान के क्रम में आज उन्होंने अफ्रीकी अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बराबरी कर दी या यूं कहें कि उन्हें नेल्सन मंडेला के बराबर कह दिया। जिस तरह वे और उनके समर्थक हर बात में राहुल गांधी से तुलना करते रहते हैं उसी तरह नेल्सन मंडेला और प्रकाश सिंह बादल में समानताएं नाम मात्र की हैं और वह सिर्फ यह कि मंडेला ने उम्रकैद के 25 साल जेल में काटे हैं तो प्रकाश सिंह बादल 17 साल जेल में रहे हैं। बदले में नौ साल मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री हैं। जबकि नेल्सन मंडेला रंगभेद विरोधी अश्वेतों के नेता थे और उम्रकैद काटने के बाद अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।

प्रकाश सिंह बादल पंजाब, पंजाबियत और पंजाबियों की रक्षा और उनके हितों के लिए आवाज उठाते हैं और इसीलिए जेल में रहे हैं हालांकि अभी मुख्यमंत्री हैं। पांच साल राष्ट्रपति रहकर 95 साल की आयु में मृत्यु से पहले 79 वर्ष की आयु में वे सक्रिय राजनीति से अलग हो गए थे जबकि प्रकाश सिंह बादल 2007 में 80 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने और 87-88 साल की आयु में अभी भी मुख्यमंत्री हैं। मंडेली ने दो शादी की थी और उनकी एक पत्नी जीवित हैं जबकि बादल की पत्नी का निधन हो चुका है। प्रकाश सिंह बादल की योग्यताएं अपनी जगह हैं और वो कम नहीं हैं। प्रशंसनीय भी हैं पर उनकी तुलना नेल्सन मंडेला से करना निश्चित रूप से नेल्सन मंडेला का अपमान है।

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसम्बर 1927 को पंजाब के छोटे से गांव अबुल खुराना के जाट सिख परिवार में हुआ था। वे चौथी बार इस पद पर काबिज होने वाले पंजाब के पहले मुख्यमंत्री हैं। प्रकाश सिंह बादल की पत्नी सुरिंदर कौर का देहांत हो चुका है। इनका एक बेटा और एक बेटी हैं। प्रकाश सिंह बादल के बेटे सुखबीर सिंह बादल पंजाब के फाज़िल्का निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। प्रकाश सिंह बादल की बेटी का विवाह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के बेटे से संपन्न हुआ है। प्रकाश सिंह बादल कई दशकों से राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें पंजाब की राजनीति के बेहद सम्मानित वरिष्ठ व्यक्ति का दर्जा मिला हुआ है। प्रकाश सिंह बादल एक कुशल राजनीतिज्ञ और अपने धर्म के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।

नेल्सन मंडेला (18 जुलाई 1918 – 5 दिसम्बर 2013) दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पहले वे दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोंतो वे सिजवे के अध्यक्ष रहे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने 27 वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में बिताये जहाँ उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था। 1990 में श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नये दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। वे दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्व में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गये। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने उनके जन्म दिन को नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। 5 अगस्त 1962 को उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिये उकसाने और बिना अनुमति देश छोड़ने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। उन पर मुकदमा चला और 12 जुलाई 1964 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी गयी।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.


पत्रकार Nadim S. Akhter अख्तर मोदी के नए झूठ के बार में लिखते हैं: ”जब अँधेरे का बादल हटता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है तो नेल्सन मंडेला की जगह प्रकाश सिंह बादल आ जाते हैं। शुक्रिया प्रधानमंत्री जी!!! देश को नयी राह दिखाने के लिए। अब लगे हाथों मार्टिन लूथर और मदर टेरेसा के आधुनिक बिम्ब का निर्माण भी कर ही दीजिये। और सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और महात्मा गांधी के भी। जब से आपने बादल साहब को नयी उपाधि दी है, यही सोच रहा हूँ कि पंजाब के स्कूलों में युगपुरुष प्रकाश सिंह बादल की जीवनी पढाई जा रही है या नहीं??!!!

 

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