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दुख-सुख

धूमिल के गांव खेवली में बिलख रही है 95 साल की नेत्रहीन पन्ना माई

विख्यात कवि धूमिल के बनारस स्थित गांव खेवली की पन्ना माई बिलख रहीं हैं.. अपने खून यानि बेटों से ही दया की भीख मांग रहीं हैं.. करुण वेदना से टकटकी लगाएं हैं लेकिन अपने ही जान लेने पर उतारू हैं.. एक तरफ नवरात्र में हिंदू मां की भक्ति में लीन हैं तो दूसरी तरफ बनारस शहर से 12 किलोमीटर दूर खेवली में 95 साल की नेत्रहीन पन्ना माई को मरने के लिए उनकी औलादों ने ही छोड़ दिया है..

विख्यात कवि धूमिल के बनारस स्थित गांव खेवली की पन्ना माई बिलख रहीं हैं.. अपने खून यानि बेटों से ही दया की भीख मांग रहीं हैं.. करुण वेदना से टकटकी लगाएं हैं लेकिन अपने ही जान लेने पर उतारू हैं.. एक तरफ नवरात्र में हिंदू मां की भक्ति में लीन हैं तो दूसरी तरफ बनारस शहर से 12 किलोमीटर दूर खेवली में 95 साल की नेत्रहीन पन्ना माई को मरने के लिए उनकी औलादों ने ही छोड़ दिया है..

जब तक पन्ना माई में ताकत थी वो अपने बच्चों और बच्चों के भी बच्चों की खिदमत करती रहीं लेकिन अब वो मात्र ढांचा रह गई हैं… अब वो उन्हीं बच्चों के लिए बोझ बन गईं हैं.. पन्ना माई जब जवान थीं तब धूमिल जन्मे रहे होंगे.. धूमिल का बचपन देखने वाली पन्ना आज जीने के लिए जद्दोजहद कर रहीं हैं.. आज धूमिल जिंदा होते तो वो भी मर्माहत होते.. खुद तो बच्चे पक्के मकान में रहते हैं और पन्ना माई भैंसों के साथ खुले आसमान के नीचे दिन रात पड़ीं रहती हैं.. रात गहराने पर भैंसों को भी सुरक्षित जगह ले जाया जाता है लेकिन पन्ना माई अब किस काम की हैं सो बच्चे उन्हें खाट पर ही रहने देते हैं..

अब सोचिए क्या जर्जर हो चुकी पन्ना माई मौसम की मार को झेल सकती हैं.. बात बात पर उन्हें पीटा जाता है.. कहते हैं बेटे बहू पोते सब जुल्म करते हैं.. चौंकाने वाली बात है कि यदि कोई पड़ोसी पन्ना माई की मदद करना चाहता है तो परिवार पड़ोसियों से भी मार पीट को उतारू रहता है और तो और नाराजगी पन्ना माई को मारपीट कर ही उनकी शांत होती है.. सवाल है आखिर वो जिंदा कैसे बचेंगी… अरे मां अगर बोझ हो गई है और उसका चेहरा नहीं पसंद है या सेवा से भागना चाहते हो तो उस पर जुल्म करने की बजाय उसे वृद्धाश्रम में ही डाल दो लेकिन मां को इतना कष्ट तो मत दो… सोचो अगर पन्ना मां ने तुम्हें भी जन्म लेते ही भैसों के पास छोड़ दिया होता तो क्या इतनी बर्बरता के लिए आज तुम जिंदा होते..

टीवी जर्नलिस्ट अश्विनी शर्मा की रिपोर्ट.

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