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भिखारी ठाकुर ने रंगकर्म को सामाजिक आंदोलन से जोड़ा था

नयी दिल्ली। दिल्ली के राजेन्द्र भवन में भिखारी ठाकुर राष्‍ट्रीय प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित एक संगोष्‍ठी में वरिष्ठ साहित्कार मैनेजर पाण्डेय ने कहा कि लोक कलाकार भिखारी ठाकुर एक ऐसे कलाकार थे,  जिन्हों ने रंगकर्म को एक सामाजिक आंदोलन से जोड़ कर अपनी अलग पहचान बनाते हैं। भिखारी ठाकुर एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व हैं जो भारतीय ग्राम्‍य जीवन, ग्राम्‍य प्रतिभा को राष्‍ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतराष्‍ट्रीय स्वरूप में स्थापित करते हैं,  भिखारी ठाकुर राष्‍ट्रीय प्रतिष्‍ठान द्वारा आयोजित इस संगोष्‍ठी में बोलते हुए हंस पत्रिका के कार्यकारी संपादक संजीव ने अपने बीज वक्‍तव्‍य में कहा कि भिखारी ठाकुर ने भले ही भोजपुरी में अपनी रचनाएं की परन्तु उनका दर्शन न सिर्फ राष्‍ट्रीय, बल्कि अंतराष्‍ट्रीय हैं,  उनकी रचनाएं समाज को सही दिशा देने की अपील करती हैं।

नयी दिल्ली। दिल्ली के राजेन्द्र भवन में भिखारी ठाकुर राष्‍ट्रीय प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित एक संगोष्‍ठी में वरिष्ठ साहित्कार मैनेजर पाण्डेय ने कहा कि लोक कलाकार भिखारी ठाकुर एक ऐसे कलाकार थे,  जिन्हों ने रंगकर्म को एक सामाजिक आंदोलन से जोड़ कर अपनी अलग पहचान बनाते हैं। भिखारी ठाकुर एक ऐसे व्‍यक्तित्‍व हैं जो भारतीय ग्राम्‍य जीवन, ग्राम्‍य प्रतिभा को राष्‍ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतराष्‍ट्रीय स्वरूप में स्थापित करते हैं,  भिखारी ठाकुर राष्‍ट्रीय प्रतिष्‍ठान द्वारा आयोजित इस संगोष्‍ठी में बोलते हुए हंस पत्रिका के कार्यकारी संपादक संजीव ने अपने बीज वक्‍तव्‍य में कहा कि भिखारी ठाकुर ने भले ही भोजपुरी में अपनी रचनाएं की परन्तु उनका दर्शन न सिर्फ राष्‍ट्रीय, बल्कि अंतराष्‍ट्रीय हैं,  उनकी रचनाएं समाज को सही दिशा देने की अपील करती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्‍ठ विद्वान डा. नित्यानंद तिवारी ने कहा कि सामाजिक विद्रूपता के प्रति एक कलाकार द्वारा किया गया हस्तक्षेप अपने आप में दुर्लभ है। श्री तिवारी ने कहा कि यूं तो पं. राहुल जी ने भिखारी ठाकुर को भोजपुरी का शेक्सपीयर कहा है परन्तु भिखारी की रचनाओं में सामाजिक दुःख दर्द के प्रति प्रतिरोध उन्हें विशिष्‍ठ श्रेणी में ले जाती है। भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजित दूबे ने सरकार से मांग किया कि भोजपुरी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के साथ-साथ दिल्ली के मंडी हाउस के आस पास भिखारी ठाकुर की प्रतिमा लगनी चाहिए।

प्रसिद्ध एंकर्मी श्री महेन्द्र सिंह ने कहा भिखारी ठाकुर जहां रंगकर्म में शेक्सपीयर के समतुलय हैं वहीं सामाजिक बुराइयों को दूर करने में राजाराम मोहन राय के समान थे। बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो. आर.के. दुबे ने कहा कि अकादमी भिखारी ठाकुर पर और अधिक शोध के लिए प्रयास करेगी। युवा लेखक मनोज भावुक ने कहा कि भोजपुरी साहित्य के इस विशाल व्यक्तित्व पर और शोध की आवश्‍यकता है। गोष्‍ठी को संतोष पटेल, युवा शोधार्थी सुश्री श्रद्धा ने भी संबोधित किया। इन लोगों ने कहा कि आज के दौर में भिखारी की सामाजिक चेतना प्रासंगिक है। कार्यक्रम का संयोजन मुन्ना पाठक एवं स्वागत कुलदीप श्रीवास्तव ने किया।

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