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पेड़ काटने के बाद वन संरक्षण का नाटक शुरू किया मायावती ने

लखनऊ :  दलित महापुरूषों के नाम पर बड़े स्‍मारक व उद्यान वगैरह की अरबों रुपयों की योजनाएं पूरी करने के नाम पर मायावती ने अपने चार साल के कार्यकाल में लाखों की तादात में बड़े दरख्‍तों को तो जमींदोज करने के बाद अब वृक्ष संरक्षण का नारा दिया है। उनके मसौदे के अनुसार अब पेड़ काटने का दोषी पाये जाने पर जिम्‍मेदार लोगों को दस हजार रुपयों का जुर्माना अदा करना होगा। अब तक यह रकम पांच हजार रुपये थी। विधान मंडल के मानसून सत्र में इस आशय का एक अधिनियम लाने का फैसला भी सरकार कर चुकी है।

लखनऊ :  दलित महापुरूषों के नाम पर बड़े स्‍मारक व उद्यान वगैरह की अरबों रुपयों की योजनाएं पूरी करने के नाम पर मायावती ने अपने चार साल के कार्यकाल में लाखों की तादात में बड़े दरख्‍तों को तो जमींदोज करने के बाद अब वृक्ष संरक्षण का नारा दिया है। उनके मसौदे के अनुसार अब पेड़ काटने का दोषी पाये जाने पर जिम्‍मेदार लोगों को दस हजार रुपयों का जुर्माना अदा करना होगा। अब तक यह रकम पांच हजार रुपये थी। विधान मंडल के मानसून सत्र में इस आशय का एक अधिनियम लाने का फैसला भी सरकार कर चुकी है।
मायावती का अब मानना है कि वृक्ष संरक्षण आज की बड़ी जरूरतों में है। इतना ही नहीं, भट्ठा पारसौल में जमीन को लेकर अपनी किसान विरोधी छवि बन जाने से बेहाल मायावती अब किसानों की रहनुमा भी बनने की जुगत में हैं। इसी के चलते उन्‍होंने प्रदेश के किसानों की हमदर्द बनते हुए कृषि संरक्षण की भी कई योजनाओं को मंजूरी दे दी है। अब यह बात दीगर है कि यह सारी योजनाएं कुल मिलाकर बमुश्किलन आठ-दस करोड़ की ही हैं। मायावती की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रि परिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 में संशोधन किये जाने का निर्णय लिया गया है। इस अधिनियम के प्राविधनों के अनुसार किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके विरुद्ध यह विश्वास करने का कारण है कि उसमें किसी वन, बाग या सार्वजनिक भूग्रहादि में स्थित वृक्ष से भिन्न किसी वृक्ष के सम्बन्ध में इस अधिनियम के अधीन अपराध किया है, ऐसी धनराशि, जो दस हजार रुपये से अधिक न हो, से उस अपराध के लिये प्रशमन के रूप में स्वीकार करने के लिये प्राधिकृत किये जाने हेतु अधिनियम की धारा 15(1) में संशोधन किया जाएगा।

किसानों पर अपनी कृपा के छींटे डालने की कवायद के अनुसार यूपी में बायोपेस्टीसाइड्स, बायोएजेन्ट्स, इकोफ्रैण्डली एवं बीज शोधक रसायनों पर किसानों को वर्ष 2011-12 के दोरान अनुदान की सुविधा के साथ ही धान, मक्का एवं बाजरा के संकर बीजों के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना को भी मंजूरी दे दी गयी है। इसके तहत अनुदान दिया जाएगा, लेकिन पचीस फीसदी हिस्‍सा अनुसूचित जाति वर्ग के खाते में जुड़ेगा। सरकार तो इस बात से भी चिंतित है कि कृषि भूमि में सूक्ष्म तत्वों की कमी हो रही है। इसे दूर करने के लिए सरकार ने कुल 8 करोड़ रुपये मंजूर किये हैं। सरकार को उम्‍मीद है कि इस बार पचास लाख कुंतल से ज्‍यादा मक्‍का पैदा होगा। किसानों को इसके लिए प्रति हेक्‍टेयर दस हजार रुपयों का लाभ मिलने की उम्‍मीद सरकार बांधे बैठी है।

वरिष्‍ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट.

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