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दुख-सुख

दीवाली पर अंधेरे में रहा एक अखबार का दफ्तर

बुलंदशहर के तीसरे नंबर का एक अखबार दीवाली के दिन अँधेरे में डूब रहा। मेरठ से प्रकाशित इस अख़बार के ब्यूरो चीफ ने फुंकी हुई टयूबलाइट और बल्ब बदलने से इनकार कर दिया। दरअसल इस अखबार के दफ्तर के चपरासी ने ब्यूरो चीफ से कहा कि दफ्तर की टयूबलाइट फुक गयी है और कई बल्व भी फुंके हुए है। इन्हे बदलवा दीजिये तो ब्यूरो चीफ ने कड़ी फटकार लगाई और कहा क़ि पहले टयूब लाइट के बिल लाओ तब बदलवाऊंगा। इसके बाद चपरासी फर्जी बिल बनवा लाया।

बुलंदशहर के तीसरे नंबर का एक अखबार दीवाली के दिन अँधेरे में डूब रहा। मेरठ से प्रकाशित इस अख़बार के ब्यूरो चीफ ने फुंकी हुई टयूबलाइट और बल्ब बदलने से इनकार कर दिया। दरअसल इस अखबार के दफ्तर के चपरासी ने ब्यूरो चीफ से कहा कि दफ्तर की टयूबलाइट फुक गयी है और कई बल्व भी फुंके हुए है। इन्हे बदलवा दीजिये तो ब्यूरो चीफ ने कड़ी फटकार लगाई और कहा क़ि पहले टयूब लाइट के बिल लाओ तब बदलवाऊंगा। इसके बाद चपरासी फर्जी बिल बनवा लाया।

बिलों को पास करने के लिए मेरठ ऑफिस भेज दिया गया। लेकिन दीवाली के बाबजूद टयूबलाइट नही मंगाई गयी। दीवाली के दिन दफ्तर बंद रहा और अँधेरे में डूबा रहा। अगले दिन गोवर्धन के दिन ब्यूरो चीफ द्वारा 5 बल्ब मंगाए गए। जबकि बिल 10 सीएफएल के भेजे गए। ऑफिस के एक पुराने कर्मी ने बताया क़ि हर दूसरे माह सीएफ़एल के बिल भेजे जाते है और बल्ब लगवा दिए जाते हैं। इसी प्रकार ऑफिस के जनरेटर में बाइक से निकला हुआ मोबिल ऑयल और मिट्टी का तेल डाला जाता है। इस ऑफिस के निचे बाइक रिपेयरिंग वालों की दुकान है। वन्ही बिल नए मोबिल ऑयल और डीजल के भेजे जाते है। बताया गया है कि इसकी भनक अब एचआर अफसरों को भी लग गयी है।

आरजी की रिपोर्ट.

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