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वाह रे गोरखपुर नगर निगम! तेरे खेल बहुत निराले

गोरखपुर। गोरखपुर नगर निगम की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। यहां सड़कों की पिचिंग नाले के कीचड़ और मिट्टी से हो रही है तो टेलीफोन बूथों पर दबंगों का कब्जा है, कहीं टेलीफोन बूथों पर कबाड़ियों का तो कहीं मनी एक्सचेंजरों का कब्जा है। सड़कों और नालियों की दुर्दशा देखनी हो तो गोरखपुर से बड़ा उदाहरण पूर्वांचल में काई और नगर नहीं हो सकता है। पार्षद और आम नागरिक जनससमयाओं को लेकर दौड़ लगा रहे हैं और नगर आयुक्त हैं कि लोगों से केवल धन का रोना रो रहे हैं, जबकि शासन का फरमान है कि साफ-सफाई में काई लापरवाही न बरती जाय पर नगर आयुक्त की सेहत पर इसका कोई असर नहीं है। पार्षद नगर निगम में धन और संसाधनों की कोई कमी नहीं बताते हैं, कहते है कमी को छिपाने के लिए नगर आयुक्त धन की कमी का अनावश्यक रोना रो रहे है।

गोरखपुर। गोरखपुर नगर निगम की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। यहां सड़कों की पिचिंग नाले के कीचड़ और मिट्टी से हो रही है तो टेलीफोन बूथों पर दबंगों का कब्जा है, कहीं टेलीफोन बूथों पर कबाड़ियों का तो कहीं मनी एक्सचेंजरों का कब्जा है। सड़कों और नालियों की दुर्दशा देखनी हो तो गोरखपुर से बड़ा उदाहरण पूर्वांचल में काई और नगर नहीं हो सकता है। पार्षद और आम नागरिक जनससमयाओं को लेकर दौड़ लगा रहे हैं और नगर आयुक्त हैं कि लोगों से केवल धन का रोना रो रहे हैं, जबकि शासन का फरमान है कि साफ-सफाई में काई लापरवाही न बरती जाय पर नगर आयुक्त की सेहत पर इसका कोई असर नहीं है। पार्षद नगर निगम में धन और संसाधनों की कोई कमी नहीं बताते हैं, कहते है कमी को छिपाने के लिए नगर आयुक्त धन की कमी का अनावश्यक रोना रो रहे है।
गेरखपुर नगर निगम की साफ -सफाई को लेकर सांसद योगी आदित्यनाथ और नगर विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कई बार तीखी टिप्‍पणियां की। नगर निगम में महापौर भाजपा का है और बोर्ड में बहुमत भी भाजपा का ही है,  पर इसके बाद भी भाजपा के पार्षदों की नहीं सुनी जा रही है पहले बसपा पार्षदों की खुलकर सुनी जाती थी पर जब से नगर आयुक्त के पद पर सूर्यलाल सिंह की तैनाती हुई है बसपाई भी नागरिक समस्याओं को लेकर सफर कर रहे है। महानगर में साफ-सफाई से लगायत निर्माण कार्यों तक में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। साल-छह माह के भीतर की बनी सड़कें टूट गई हैं और उनमें भ्रष्टाचार के खेल को दबाने के लिए मिट्टी और कूड़ा कचरा डालकर ढंका जा रहा है। नगर के चौराहों पर बने टेलीफोन बूथों पर दबंगों का कब्जा है, उन बूथों में कही कबाड़खाना तो कही दूसरा धंधा चल रहा है। विजय चौक पर बने टेलीफोन बूथ पर एक मनी एक्सचेंजर का कब्जा है।

नगर निगम की लापरवाही का नमूना देखना हो तो दो सड़कों का भ्रमण कर ही इसका आंकलन किया जा सकता है। एक सड़क नगर आयुक्त की नाक के नीचे विजय चौक सुमेर सागर रोड है तो दूसरी मेडिकल कालेज से अशोक रोड होते हुए हड़हवा फाटक को जाने वाली। इन दोनों सड़कों की हालत बदतर है राहगीरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। विजय चौक से सुमेर सागर जाने वाली सड़क की दशा काफी समय से खराब है। यहां नालियां भठी पड़ी हैं, जिससे मुहल्ले का गंदा पानी सड़कों पर फैला रहता है और तो और इस रोड पर गाड़ियों की धुलाई करने वाली तीन-चार दुकानें हैं,  जहां दिनभर पंप चलता रहता है और उसका पानी सड़क पर बहता रहता है, जिससे सड़क पर कई जगह गड्ढा हो गया है और हर रोज स्कूली बच्चे, बूढ़े यहां तक की जवान भी दुर्घटना के शिकार हो रहे है। सड़क पा पानी लगा रहने और जगह जगह गड्ढे होने के चलते पूरा दिन जाम लगा रहता है।

यह ऐसी सड़क है जहां से हर रोज नगर विधायक खुद दिन में दो चार-बार आते जाते है। इसके अलावे तमाम वीआईपी भी इसी सड़क का उपयोग गोरखनाथ जाने और गोलघर तथा विजय चौक पर आने जाने के लिए करते हैं। सड़क की दुर्दशा के बारे में नागरिकों ने शिकायत किया तो नगर आयुक्त ने पहले धन की कमी का रोना रोया फिर किसी ने शिकायत की तो जवाब दिया ऐसी समस्याओं को सुनने के लिए उनके पास टाइम नहीं है। नगर आयुक्त का यह जवाब निश्चय ही गैर-जिम्मेदाराना है और नागरिक समस्याओं से पिंड छुड़ाने वाला। फिलहाल नगर आयुक्त को पता नहीं क्या सूझा कुछ दिनों के बाद दरियादिली दिखाई और उस सड़क पर बड़ी बड़ी गिट्टियां डलवा दी और उपर से मिट्टी। बरसात होने पर सड़क पर कीचड़ फैल गया और गिट्टियां बिखर गई जिससे हर रोज यहां वाहन दुर्घटनाएं घटित होने लगीं पर इससे क्या नगर आयुक्त की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

अशोक नगर -हड़हवा फाटक रोड की दशा तो और बुरी है। इस सड़क की मरम्मत की मांग ने जोर पकड़ा तो लोगों का मुंह बंद करने के लिए नगर आयुक्त ने बड़ी-बड़ी गिट्टियां और उस पर नाले से निकलने वाली सिल्ट गिराकर पैचिंग करा दी। नगर निगम की इस लापरवाही से जहां सड़क पर गंदगी फैल गई है वहीं संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। मुहल्ले के लो अब तो खुद को कोस रहे है इससे अच्छा था वे चुप ही रहे होते जैसे दो साल से गड्ढों के बीच सड़क पर गुजरते थे यह साल भी जैसे तैसे कट ही जाती।

नगर निगम मे सफाईकर्मियों की लंबी चौड़ी फौज है और इस पर करोड़ों रुपए बहाया जा रहा है,  पर सफाई का क्या हाल है यह किसी से छिपा नहीं है। एक तो नियमित सफाई होती नहीं है और अगर होती भी है तो नाले नालियों से निकलने वाली गंदगी या तो इकट्ठा कर सड़क पर ही छोड़ दी जाती है या फिर सफाई कर्मी कूड़े की ढेर में आग लगाकर अपने दायित्वों की इति श्री कर लेते हैं। सड़क पर छोड़ा गया कूड़ा शाम होते होते-होते गाड़ियों के आवागमन से पुनः उन्ही नालों में चला जाता है जहां से निकाला गया होता। यह तो खैर मानिए नवागत जिलाधिकारी काफी संवेदनशील है उनको शहर की गंदगी रास नहीं आई और उन्‍होंने प्रशासन के साथ मिलकर नगर में सफाई के लिए महा अभियान चलवा दिया पर नगर निगम की वर्षों पुरानी आदत कहां बदलने वाली है,  फिर नगर की साफ सफाई की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर है।

नगर में अंधाधुंध पालीथीन का प्रयोग हो रहा है पर इस पर नियंत्रण के लिए न तो कोई सामाजिक संस्था ही पहल कर रही है और न ही नगर निगम। नगर में पालीथीन की बढ़ती संस्कृति इतनी तेजी से बढ़ी है कि आज लोग इसका उपयोग दैनिक सामग्री ढोने से लगायत खान-पान की चीजों तक में करने लगे है, अगर पालीथीन की बढ़ती संस्कृति पर रोक लगाने के लिए शीघ्र ही कोई ठोस कदम न उठाया गया तो यह शहर कूड़े कचरों का शहर बन जाएगा। इस बारे में नगर आयुक्त सूर्यलाल सिंह से उनके दूरभाष पर बातचीत के लिए संपर्क किया गया तो उनने मुद्दे सुनते ही खुद को व्यस्त बताकर फोन काट दिया।

गोरखपुर से एसके सिंह की रिपोर्ट.

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