: राज्यपाल से हवाई जहाज व हेलीकॉप्टरों की खरीद में घपले की शिकायत : नागरिक उड्डयन विभाग से हटाए गए क्लर्क ने जानमाल के खतरे का अंदेशा जताया : लखनऊ : नागरिक उड्डयन विभाग व लखनऊ एयरपोर्ट में 3000 करोड़ के घोटाले की शिकायत राजभवन तक पहुंच गई है। शिकायतकर्ता कोई और नहीं बल्कि नागरिक उड्डयन विभाग से हटाए गए एक बाबू देवेन्द्र कुमार दीक्षित ने ही कैबिनेट सचिव शशांक शेखर का नाम लिए बिना आरोप लगाया है कि लगभग 3000 करोड़ के घोटाले में प्रदेश शासन में सर्वोच्च पद पर बैठा यह अफसर प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से संलिप्त है।
वे अपने पद, पहुंच एवं धनबल के प्रभाव से आरटीआई के तहत घोटाले से सम्बंधित सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने दे रहे हैं। राज्यपाल से अपने जानमाल के खतरे का अंदेशा जताते हुए कहा है कि उसकी या उसके परिवार की हत्या कराई जा सकती है। श्री दीक्षित ने राज्यपाल को दी शिकायत में कहा है कि उसने आरटीआई के तहत जिन बिन्दुओं पर सूचनाएं नागरिक उड्डयन विभाग से मांगी हैं उसकी जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी या सीबीआई से कराई जाये। नागरिक उड्डयन विभाग में 1987 से लेकर 2002 तक क्लर्क के पद पर नौकरी करने वाले शिकायतकर्ता ने कहा है कि विभाग और लखनऊ एयरपोर्ट में घोर भ्रष्टाचार व्याप्त है। वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं एवं देशद्रोही गतिविधियों के संचालन का विरोध 1988 से किया जाता रहा है। इसके लिए अधिकारियों द्वारा षड़यंत्र के तहत उसे उत्पीड़ित किया गया। फर्जी मुकदमों में फंसाने के साथ-साथ उसे असंवैधानिक तरीके से सेवा से पृथक कर दिया गया। इससे सम्बंधित एक मुकदमा वाद संख्या 7191(एस/एस) 2002 इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है।
उल्लेखनीय है कि नागरिक उड्डयन विभाग से सेवामुक्त क्लर्क ने विभाग के प्रमुख सचिव के जनसूचना अधिकारी से आरटीआई के तहत एक जनवरी 2007 से 31 जुलाई 2010 तक के मध्य त्यागपत्र देने वाले या वीआरएस लेने वाले पायलट व अभियंताओं के नाम, हवाई जहाज व हेलीकॉप्टरों के क्रय हेतु स्वीकृत धन, आहरित धन, क्रय आदेश, बेचे गए हवाई जहाज और हेलीकॉप्टरों की संख्या, बेचने के कारण, बेचने में अपनाई गई प्रक्रिया, यूपी सरकार के अधीन हवाई पट्टिïयों के निर्माण, रख-रखाव के लिए स्वीकृत धन, राजकीय नागरिक उड्डयन विभाग व लखनऊ एयरपोर्ट के पास उपलब्ध वाहनों की संख्या आदि की विस्तृत सूचना मांगी है। नागरिक उड्डयन विभाग से हटाए गए शिकायतकर्ता क्लर्क ने डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट को बताया कि 1989 में विभागीय निदेशक शशांक शेखर के रहते चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती में भी घोटाला हुआ था।
इसके साथ ही उसने आरटीआई के तहत नागरिक उड्डयन विभाग के जनसूचना अधिकारी से चतुर्थ श्रेणी कर्मियों व 1989 में वर्क सुपरवाइजरों के पद पर हुए साक्षात्कार, पद की संख्या, बुलाए गए अभ्यर्थियों की संख्या, उपस्थित हुए अभ्यर्थियों की संख्या तथा चयनित अभ्यर्थियों की संख्या की जानकारी मांगी है। यही नहीं उसने वर्तमान में राजकीय नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक के पद की अनिवार्य योग्यता, यूपी एयर सर्विसेज सोसाइटी के अधिकारियों की चल एवं अचल सम्पत्ति की सूचना मांगी है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि कार्यालय प्रमुख सचिव नागरिक उड्डïयन विभाग के जनसूचना अधिकारी द्वारा उसे कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इसकी शिकायत उन्होंने यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त रणजीत सिंह पंकज से की है। सीआईसी ने सूचना न दिए जाने के लिए विभाग के जनसूचना अधिकारी के खिलाफ 25 हजार रुपए जुर्माने की नोटिस भेजी है।
((लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक डेली न्यूज एक्टीविस्ट में प्रथम पेज पर इस खबर का प्रकाशन हो चुका है.))


