सोलह साल के किशोर की बलि चढ़ाने वाला एक तांत्रिक आज पकड़ा गया। खुद को कभी पुरूष तो कभी स्त्री के तौर पर प्रचारित करने वाला यह तांत्रिक एसटीएफ के फंदे में फंस ही गया। इसकी गिरफ्तारी मेरठ में हुई। शशिकांत उर्फ शशिबाला नामक इस तांत्रिक पर दस हजार रूपयों का ईनाम भी था। एक सप्ताह पहले यानी 7 अगस्त को को मेरठ के शास्त्रीनगर क्षेत्र में एक किशोर की बलि चढ़ाये जाने की सूचना दर्ज करायी गयी थी। नरबलि का शिकार हुए गौरव यहीं शास्त्रीनगर के रहने वाले चंदन सिंह का बेटा था और कालेज में पढाई कर रहा था। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश भी था। नागरिकों ने लगातार धरना और प्रदर्शन के माध्यम से अपना आक्रोश भी जताया था। मामले पर बढ़ता जन-दबाव देखकर यह जांच एसटीएफ को सौंप दी गयी थी।
एसटीएफ के डीएसपी अनिल कुमार झा और दारोगा धर्मेंद्र कुमार यादव ने इस तांत्रिक को आज रविवार को धर दबोचा। एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तारी के समय तांत्रिक शशिकांत के पास जले हुए शव की राख भी बरामद हुई। दावों के अनुसार शशिकांत ने बताया कि वह कोलकाता के स्वर्गीय वीरनाथ का शिष्य है जिनकी समाधि कोलकाता के माताटीला में है। शशिकांत ने बताया कि सिद्धि प्राप्त करने के लिए श्मशान-सिद्धि का अनुष्ठान करता है और नरमुंड रखता है। बांझ महिलाओं की गोद भरने और भूत-प्रेत उतारने के लिए झाड़-फूंक जैसे कामों को भी उसने कुबूल किया और बताया कि इसी तरह वह अपने ठगी के धंधे को चलाता है। श्मशान सिद्धि हासिल करने के लिए ही उसने गौरव की बलि दी थी।


