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और बीजेपी ने राहुल गांधी को नहीं कहा पप्पू

बीते कई दिनों से लगातार बढ़ती राहुल गांधी की लोकप्रियता और उनके भाषणों तथा बयानों में आई तेजी के चलते अब लगता है कि कांग्रेस के इस युवराज ने अपने विरोधियों यानी की बीजेपी कार्यकर्ताओं के मन में अपना रूतबा जमा दिया है. ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि अब बीजेपी के नेताओं द्वारा अपनी सोशल मीडिया पोस्टों और बयानों में कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गांधी को पप्पू नहीं कहा जा रहा. हालांकि किसी ने अब तक विशेष तौर पर इस तरफ ध्यान नहीं दिया है. अगर बीते कुछ महीनों की राजनितिक गतिविधियों पर बारीकी से नजर ड़ाले तो गुजरात विधानसभा चुनावों के ही समय से राहुल गांधी के लिए इस्तेमाल होने वाले शहज़ादा और पप्पू शब्द का प्रयोग बंद हो चुका है.

राहुल जिस तरह से पूरी पार्टी में व्याप्त जेनेरेशन गैप को कम करते हुए युवाओं को आगे ला रहे हैं, उससे कहीं न कहीं साफ़ तौर पर उनकी मानसिक परिपक्वता परिलक्षित हो रही है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मुद्दों जहां तृणमूल और डीएमके जैसे दल अपना पक्ष स्पष्ट नहीं कर पा रहे थे राहुल ‘लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट’ करते हुए नजर आए.  जस्टिस लोया वाले मामले पर भी जिस तरह राहुल ने अपने बयानों को पैने ढंग से पेश किया, नहीं न कहीं उनकी छवि एक फायर ब्रांड लीडर के तौर पर उभर कर नजर आई.

जहां सोनिया गांधी की पहचान एक शांत नेता के तौर पर रही वहीं अब राहुल उनकी छवि की परछाईयों से निकल कर अपना रास्ता खुद बनाते नजर आ रहे हैं. इसी तरह पंजाब में अमरिंदर सिंह को शांत करने के लिए राहुल ने खुद नेताओं तक पहुंच कर एक बार फिर अपनी राजनितिक मजबूती दिखा दी. गुजरात में बीजेपी  की राह  मुश्किल करने के लिए ही अपनी सधी हुई कूटनीति के तहत राहुल ने हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकुर जैसे युवा नेताओं को प्रोत्साहन दिया.

इसके अलावा एनसीपी के बड़े नेता शरद पंवार समेत राहुल गांधी आए दिन बड़े और कद्दावर नेताओं से मुलाक़ात करते रहते हैं, जिसके चलते उनके राजनितिक कद में भी खासा इजाफा हुआ है. ध्यान देने वाली बात यह है कि बीजेपी से कई गुना अधिक कई बार कांग्रेस पार्टी के ही घटकों में राहुल का  मजाक उड़ाया जाता था लेकिन अब वहां भी उन्हें राहुल जी कह कर संबोधित किया जाने लगा है. इसी के चलते अब कहीं न कहीं पार्टी में प्रियंका गांधी को बतौर नेता लाए जाने के लिए उठने वाली मांगे भी शांत हो गई हैं.

इस इस घटनाक्रम को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफा ने फेसबुक पर जो कुछ लिखा है, वह पूरा इस प्रकार है-

Well, whether the BJP top brass wanted to or not, the shift in ground situation compelled it to drop the prefix “Pappu” that it had used with gusto and glee for several years now. That is has disappeared from use has gone unnoticed almost, with just the political hawks commenting on the new respect that the Congress President seems to have earned.

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