: शहीदे आजम भगत सिंह के भतीजे का बयान : पंचकूला : शहीदे आजम सरदार भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू ने अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया गया था अब भ्रष्टाचार भारत छोड़ो का नारा बुलंद होना चाहिए। भ्रष्ट और बेईमान लोगों की जगह ईमानदार लोग आने चाहिए और देश की व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव हो। सभी सच्चे अर्थों में गुलामी से मुक्ति हो। आज देश आजाद जरूर हो गया है लेकिन सही मायने में यह आजादी नहीं है। भगत सिंह ने जिस आजादी का सपना देखा था यह आजादी वह नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आमजन जागरूक हो गया है। ऐसे में अन्ना हजारे और उनके कुछ साथियों ने देश में अलग जगाई है। हर वर्ग की आंदोलन में हिस्सेदारी है। बावजूद इसके सरकार उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलना चाहती है। उन्होंने हजारे और उनकी टीम पर पुलिस कार्रवाई को सरकार का एक घिनौना, संवेदनहीन, क्रूर और निर्दयी कदम बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अन्ना हजारे तथा बाबा रामदेव को दूसरी लड़ाई का नाम दे रहे हैं, जबकि यह आज़ादी की दूसरी नहीं, बल्कि पहली लड़ाई है। कहा कि फिरंगियों की जगह पर देश के ही भ्रष्ट लोगों कें के बैठने से देश आजाद नहीं कहा जा सकता।
शहीदे-आजम-भगत सिंह ने बरसों पहले कह दिया था कि शासक बदल जाने से व्यवस्था नहीं बदल जाती, शहादत से पूर्व ही उन्होंने यह भविष्यवाणी कर
दी थी कि लगभग 15 सालों के बाद देश आजाद हो जाएगा, लेकिन उस के बाद भी देश की स्थिति में काई खास अंतर आने वाला नहीं है। अगर व्यवस्था न बदली गई तो भष्टाचार, शोषण, अत्याचार, भाई-भतीजावाद और लूट-खसोट का बाजार इसी तरह से गर्म रहेगा। अगर समाजवाद न आया तथा देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति न बदली, तो कोई भी आजादी व्यर्थ है। जब शोषण और अत्याचार इंतिहा पर होगा तब एक बार फिर जन-जागरण होगा। आज शहीद भगत सिंह की वह भविष्यवाणी बिल्कुल सत्य होती नजर आती है। आज देश जाग उठा है और व्यवस्था को बदलने को आतुर दिखाई दे रहा है और आजादी की लोग, संगठन तथा समाचार-पत्र इस संघर्ष को आजादी दी है।
कहा कि व्यवस्था से बाहर रहकर व्यवस्था को नहीं बदला जा सकता। कीचड़ को हटाने के लिए कीचड़ में तो घुसना ही पड़ेगा। जब तब भ्रष्ट लोगों का स्थान ईमानदार और सच्चे लोग नहीं ले लेते तब तक एक मजबूत लोकपाल विधेयक के संसद में पारित होने की बात कोई कैसे सोच सकता है। लोकपाल विधेयक बन भी गया तो इससे समाज में कोई बहुत बड़ी क्रांति होने वाली नहीं है। अनेक सख्त कानून आज भी मौजूद हैं, जिन्हें सत्ता पक्ष अपने अनुकूल तोड़ता-मरोड़ता रहता है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे भ्रष्टाचार एवं भ्रष्ट आचरण वाले नेताओं की भर्त्सना करें तथा सच्चे और ईमानदार लोगों का साथ देकर उनकी शक्ति बढ़ाए।
महेंद्र सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.


