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युवा जान चुका है अन्‍ना हजारे का आंदोलन देश की आवश्‍यकता है

गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभागार में समाज के विभिन्न तबकों ने अन्ना हजारे के आन्दोलन को देश की आवश्‍यकता बताते हुए समस्त देशवासियों से इसमें प्राण प्रण से लगने का आह्वान किया। ‘अन्ना का आन्दोलन-एक विमर्ष’  विषय पर गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (गोजए) और प्रेस क्लब गोरखपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एक संगोष्‍ठी में चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, समाजसेवी, शिक्षक, साहित्यकार, पत्रकार सभी ने अन्ना के आंदोलन के समर्थन के साथ केन्द्र के दमनकारी रुख की घोर निंदा की।

गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभागार में समाज के विभिन्न तबकों ने अन्ना हजारे के आन्दोलन को देश की आवश्‍यकता बताते हुए समस्त देशवासियों से इसमें प्राण प्रण से लगने का आह्वान किया। ‘अन्ना का आन्दोलन-एक विमर्ष’  विषय पर गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (गोजए) और प्रेस क्लब गोरखपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एक संगोष्‍ठी में चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, समाजसेवी, शिक्षक, साहित्यकार, पत्रकार सभी ने अन्ना के आंदोलन के समर्थन के साथ केन्द्र के दमनकारी रुख की घोर निंदा की।
संगोष्‍ठी की अध्यक्षता कर रहे दैनिक स्वतंत्र चेतना के प्रधान संपादक और गोजए के प्रधान संरक्षक रामचन्द्र गुप्त ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों भारत छोड़ों के गांधी जी के नारे ने पहली बार देश को एक सूत्र में पिरोया था। इसके बाद जयप्रकाश नारायण ने समग्र क्रांति के आह्वान पर देश की जनता को जागृत किया था। आज जन लोकपाल के नाम पर अन्ना की हुंकार ने देश में अभूतपूर्व क्रांति ला दी है। ना तो गांधी ने किसी को बुलाया था, ना जेपी ने और ना ही अन्ना ने किसी को बुलाया, पर जिस प्रकार आज देश की जनता अन्ना से जुड़ रही है, उसने सरकार समेत सभी राजनैतिक दलों की हवा खराब कर दी है। होना तो यह चाहिये था कि विपक्षी सांसद अन्ना के जन लोकपाल बिल को गोद ले लेते और संसद में इसकी पैरवी करते, पर किसी को जनाक्रोश की इस स्थिति का अंदेशा नहीं था। अब तमाम राजनैतिक दल इस मुद्दे को भुनाने का प्रयास करेंगे। आज अन्ना को लेकर सरकार की स्थिति सांप छछूंदर की हो चली हैं, सरकार न तो अन्ना को निगल पा रही है, ना उगल पा रही है।

वरिष्‍ठ अधिवक्ता व सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुरेश शुक्‍ला ने कहा कि भ्रष्‍टाचार से खोखले हो चुके देश के लिये जन लोकपाल बिल जीवन रक्षक दवा के समान है। उन्होंने कहा कि प्रायः हर भारतवासी भ्रष्‍टाचार को शिष्‍टाचार समझ कर अपना चुका है। हम कहीं भ्रष्‍टाचार करते हैं, कहीं सहते हैं, दोनों देश के लिये घातक हैं। जनता को मनोबल के साथ अपनी ताकत का अहसास कराना होगा। वरिष्‍ठ बाल रोग चिकित्सक, आइ.एम.ए. के अध्यक्ष और इंसेफेलाइटिस उन्मूलन अभियान के चीफ कंपेनर डा. आर.एन.सिंह ने कहा कि अन्ना की आत्म शक्ति के आगे सरकार पूरी तरह बेबस दिख रही है, बिना कारण गिरफ्तारी और फिर बेबसी में रिहाई। जनता से ताकत पाकर सरकार आज भस्मासुर की स्थिति में आ चुकी है। जनता को उसे उसकी गति तक पहुंचाना ही होगा।

गोजए अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने स्वागत के क्रम में कहा कि अन्ना ने जहां जनता को उसकी ताकत का एहसास कराया, वहीं सरकार को उसकी औकात बतायी है। आज पूरी तरह दमन पर उतर चुकी सरकार ने तो लोकतंत्र को भी हाशिये पर रख दिया है। जनलोकपाल से चली यह लड़ाई अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ लोकतंत्र के रक्षा की लड़ाई में बदल चुकी है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्‍वविद्यालय के इतिहास विभाग के उपाचार्य डा. चन्द्रभूषण अंकुर ने कहा कि जन लोकपाल बिल की लड़ाई चार माह पुरानी हो चुकी है। कानून के दायरे में लड़ी जा रही इस लड़ाई को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की शपथ के साथ संसद में बैठे सांसद और उनमें चुनी गयी सरकार ने जिस प्रकार आईना दिखाने का प्रयास किया है, वह उसकी बेहयायी का द्योतक है। आज अन्ना देश की सवा अरब जनता की आवाज बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सभी क्रांतियां सफल तो भले ही नहीं होती, पर उनका असर तो पड़ता ही हैं।  अन्ना को दबाना अब आसान नहीं है।

वरिष्‍ठ कवि नरसिंह बहादुर चन्द ने कहा कि संस्कार हीन, चरित्रहीन, स्वार्थी और अहंकारी सरकार से न्याय की उम्मीद नहीं, देश की जनता को अपना हक खुद लड़ कर लेना ही होगा। सोशल एक्टिविस्ट मुकुल पाण्डेय ने कहा कि सरकार के रवैये से आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ गयी है। अन्ना ने मार्ग दिखा दिया हैं, हमें बढ़ कर मंजिल पानी है। शिक्षाविद् समाज सेवी मंकेश्‍वर पाण्डेय ने कहा कि अन्ना ने अपना सर्व स्वदेश के लिये कुर्बान कर दिया, उनका निजी स्वार्थ भी देश हित की ओर ही मुड़ता है। उन्होंने देश की जनता के मन के अन्तर्द्वन्द को देश की सरकार के सामने खड़ा कर दिया है। वे आज देश के सर्वमान्य प्रहरी के रुप में स्थापित हो चुके है। वरिष्‍ठ विधि पत्रकार बृज बिहारी लाल श्रीवास्तव अधिवक्ता ने कहा कि भ्रष्‍टाचार से ऊबा पूरा देश आज अन्ना से खुद को जोड़ चुका है। जो जहां हैं, वह वहीं से लड़ रहा है। भ्रष्‍टाचार के लिये हम भी दोषी है, थोड़े से स्वार्थ में हमने भी भ्रष्‍टाचार को बढ़ाया, अब यह नासूर का रुप लेने लगा है, हम सभी को इस महायज्ञ में आहुति देनी होगी, अन्यथा एक नहीं हजार अन्ना भी इस मिटा नहीं पायेंगे।

वरिष्‍ठ चिकित्सक डा. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि दोहरे चरित्र की सरकार अब भ्रम की स्थिति में आ चुकी है। अन्ना आज पूरे विश्‍व में चरचा का केन्द्र बन चुके हैं। वरिष्‍ठ शायर-पत्रकार महेश अश्‍क ने कहा कि अन्ना के आन्दोलन से एक आशा जागी है। हमें इस आशा को परवान चढ़ाना होगा। समाजसेवी एवं पूर्व छात्र नेता हृदय नारायण भट्ट ने कहा कि अन्ना के जन लोकपाल बिल में ग्राम सचिव से लगायत प्रधानमंत्री तक के भ्रष्‍टाचार को रोकने की ताकत है। समाजसेवी एवं एच.एस.शिक्षण संस्थान के प्रबंधक राजेश मणि पत्रकार ने कहा कि हमें स्व को हटाकर एक जुट होकर संघर्ष करना होगा। अन्ना के आसूं की कीमत इस सरकार से वसूलनी होगी। यह सरकार लोकतंत्र के नाम पर एक गाली बन चुकी है।

इसके पूर्व विषय प्रवर्तन करते हुए गोजए महामंत्री डा. मुमताज खान ने कहा कि अन्ना के आन्दोलन ने देश और विदेश में एक बड़ी चरचा का रुप ले लिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, पर जिस प्रकार सरकार देश की सवा अरब जनता की आवाज का गला घोंटने पर आमादा है, वह निन्दनीय है। आज परिवर्तन समय की मांग है। अन्ना में देश को एक आदर्श नेतृत्व दिखता है, जिसने पहले अपना सब कुछ देश को देकर, अब अपना जीवन भी देश के नाम समर्पित कर दिया है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रेस क्लब गोरखपुर के उपाध्यक्ष सुशील वर्मा ने कहा कि भारतीय पुनर्जागरण का यह आन्दोलन अनुशासन की दृष्टि से भी अप्रतिम है। इसके नायक अन्ना के अह्वान पर हमे लाठी और गोली दोनों के लिये तैयार रहना होगा।

इस अवसर पर प्रमुख रुप से गोजए उपाध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव गणेश, कोषाध्यक्ष वागीश चन्द्र श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री नीरज श्रीवास्तव, कार्यालय प्रभारी विनय गुप्ता, प्रेस क्लब अध्यक्ष सत्येन्द्र पाल, उपाध्यक्ष अजीत सिंह, सचिव मोहम्मद अनीस खान, कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रमणि त्यागी, कार्यालय सहायक उदय राय, समाजसेवी भीष्‍म चौधरी, साहित्यकार सत्यनारायण मिश्र, वरिष्‍ठ कवि शुष्‍क, कमलेश सिंह, सोनी निगम, उदय प्रकाश्‍ा पाण्डेय, धीरज श्रीवास्तव, अमर श्रीवास्तव, आर.पी. सिंह, कनक हरि अग्रवाल, एस.के.सिंह, विनोद शाही, चन्द्रप्रकाश मणि, मनोज यादव, रहीम, मनोज मिश्रा, अस्मित श्रीवास्तव, राज लुहारुका, धर्मेन्द्र दूबे टाटा, अमित किशोर, संजय गर्ग, वकील अहमद, शिवम सिंह, अनिल गोयल, मुर्तजा रहमानी, गोपाल राय गौतम, अनुरंजन ठाकुर, अकील अहमद, भानु प्रताप, वीरेन्द्र विक्रम सिंह, संजीव जैसवाल, अरुण सिंह, रमेश चौहान, अमन सौसन, गोरख दादा, विनोद श्रीवास्तव, आशीष भट्ट, रोहित गुप्ता, सतीश गोयल, अरविन्द श्रीवास्तव, संजय सिंह, ओम प्रकाश सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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