शूद्रों का इतिहास लिखनेवाले और राम (कथित भगवान) का अस्तित्व ख़ारिज करनेवाले श्री शर्मा को गार्ड ऑफ़ ऑनर क्यों नहीं …? : बिहार के अख़बारों में आज पेज थ्री की खबर है -महान इतिहासकार, बिहार के गौरव रामशरण शर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए.वजीर-ए-बिहार नीतीश कुमार आदरणीय शर्मा जी घर अंतिम दर्शन करने गए तो यह तस्वीर हर हिंदी अख़बार में छपी है. एक भूतपूर्व कामरेड पत्रकार ने महान इतिहासकार के लेखन पर लिखकर अपने कामरेडसिप को प्रमाणित करने की कोशिश की है. अपने भूतपूर्व कामरेड या किन्हीं नगमानिगार ने यह लिखने की हिम्मत नहीं जुटाई कि बिहार गौरव रामशरण शर्मा के निधन के बाद जब वजीरे बिहार ने राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की घोषणा की तो २१ अगस्त को बांस घाट पर अंत्येष्टि से पूर्व उन्हें “गार्ड ऑफ ऑनर” क्यों नहीं दिया गया…?
बांसघाट पर बिहार सरकार के मंत्री श्री पीके शाही और सत्ता के लिए कांग्रेस से जद ( यू )में आये किसी विभाग के मंत्री रामाश्रय सिंह मौजूद थे. मैंने सरकार के दोनों प्रतिनिधियों से पूछा -राजकीय सम्मान की घोषणा के बाद “गार्ड ऑफ ऑनर” क्यों नहीं दिया गया. पीके शाही ने कहा कि मैं पता करता हूँ, कोई चूक हुई है”. तत्काल उन्हों ने किसी ब्यूरोक्रट्स से मोबाइल पर बात की और मीडिया को बताया कि ” गार्ड ऑफ ऑनर” परंपरागत तरीके से दिया जाता रहा है, लेकिन यह नियम (विधिसंगत) नहीं है. सरकार के वाहन से शर्मा जी का शव बांस घाट लाया गया और किसी सरकारी मुलाजिम ने उनके शव पर राष्ट्रध्वज समर्पित किया.
जाहिर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृत्यु पूर्व रुबन इमरजेंसी के आईसीयू में जाकर व मृत्यु उपरांत शर्मा जी के निवास पर जाकर शर्मा जी का औपचारिक दर्शन किया था. जब आदरणीय शर्मा जी मीडिया की भाषा में पंचतत्व में विलीन हो रहे थे, वजीर -ए -बिहार उड़नखटोले से बिहार के बाढ़ क्षेत्र का दर्शन कर रहे थे. मुख्यमंत्री जी को यह बताने कि हिम्मत करनी चाहिए कि जिन्हें उन्हों ने बिहार गौरव कहा उनकी अंत्येष्टि में राजकीय सम्मान की घोषणा के बावजूद “गार्ड -ऑफ़ -ऑनर” क्यों नहीं…? क्या रामनामी राज्यसत्ता ने राम (कथित देवता ) का अस्तित्व नकारने वाले आदरणीय रामशरण शर्मा का मृत्यु उपरांत राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर अपमान किया है.?
बाबरी मस्जिद विध्वंस को राष्ट्र गौरव मानने वाली भाजपा गठबंधन सरकारों से धर्मनिरपेक्षता के एक विश्व प्रसिद्ध सिद्दांतकार लेखक-इतिहासकार को किसी सम्मान की अपेक्षा ही क्यों होगी. किसी लोकलेखक के लिए मुख्यमंत्री की अनुशंसा से पद्म भूषण -पद्मश्री सम्मान की आकांक्षा भी क्यों होगी..? अपने जीवन में सरकारों का मुंह देखकर कभी हाथ ना पसारने वाले रामशरण शर्मा के लिए मृत्यु उपरांत राजकीय सम्मान में अंत्येष्टि की मांग किसने की थी..? नीतीश कुमार जी, ज्ञान की सम्पदा सबसे बड़ी सम्पदा और सबसे बड़ी ताकत होती है और अगर आपने ज्ञान परंपरा के इस लोक- प्रतीक के साथ मजाक की नोटिस नहीं ली तो आपकी छवि धूल में मिल जाएगी.
लेखक पुष्पराज सोशल एक्टिविस्ट हैं.


