नई दिल्ली : २६ अगस्त लोक सभा में औपचारिक और गैर औपचारिक स्तर पर एक दम साफ़ हो गया कि भारतीय जनता पार्टी अन्ना हजारे की टीम की तरफ से पेश किये गए जान लोक पाल बिल का समर्थन नहीं करती है. अन्ना हजारे का आन्दोलन अब राजनीति से धीरे-धीरे अलग हो रहा है. कांग्रेस पिछले तीन महीने से अन्ना से जान छुड़ाने की कोशिश कर रही है, आज बीजेपी की भी अन्ना से किनारा करने की कोशिश सामने आ गयी. बीजेपी के बड़े नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने साफ़ कहा कि अन्ना हजारे के साथियों ने जो बिल बनाया है उसमें बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिनको कानून की शक्ल नहीं दी जा सकती. वहीं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि अन्ना हजारे के साथी राजनीतिक प्रक्रिया को अपमानित करने की कोशिश कर रहे हैं.
अन्ना के समर्थन में अब तक सबसे बड़ी राजनीतिक आवाज़ बीजेपी की मानी जा रही थी लेकिन उसके भी किनारा करने से अन्ना का आन्दोलन राजनीतिक समर्थन के रेंज से बाहर होता जा रहा है. आज दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ी जातियों के एक मंच से भी अन्ना के विरोध में ज़बरदस्त आवाज़ सुनने में आई. कल के राजनीतिक घटनाक्रम से साफ़ हो गया था कि केंद्र सरकार ने अन्ना हजारे से सीधी बात का जरिया निकाल लिया था और साफ़ संकेत दे दिया था कि अन्ना टीम के सदस्यों से अब सरकार बात नहीं करेगी. केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख और अन्ना हजारे की मुलाकात का उद्देश्य केवल यह साबित करना था. आज दिन भर भी सरकार ने अन्ना हजारे से बातचीत का सीधा रास्ता खुला रखा, उनकी टीम वालों से कोई संवाद स्थापित नहीं हुआ. ऐसा शायद इसलिए हुआ कि प्रणब मुखर्जी से मिलकर आने के बाद अन्ना टीम एक ख़ास मेंबर अरविंद केजरीवाल ने जो कुछ कहा था उसे कुछ ही मिनटों के अंदर प्रणब मुखर्जी ने गलत बता दिया और नसीहत दे डाली कि अन्ना के साथियों को गंभीर विषयों पर असत्य बात नहीं करना चाहिए. लगता है कि अन्ना टीम वाले यह गलती बार बार कर रहे हैं.
कल बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर जब अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण बाहर निकले तो जो बातें उन्होंने मीडिया से बतायी वह अरुण जेटली के बयान से बिलकुल उल्टी थी. ज़ाहिर है अन्ना टीम ने बीजेपी नेताओं से हुई बातचीत का सही ब्योरा प्रेस को नहीं बताया था. अन्ना टीम ने कहा था कि उनके जन लोकपाल बिल की ज़्यादातर बातों को आडवानी जी ने सही माना था लेकिन आज यह बात बिलकुल साफ़ हो गयी कि अन्ना हजारे के बिल को उसके मूल रूप में पास कराने के लिए बीजेपी बिलकुल तैयार नहीं है .बीजेपी की दिन भर किनारा करने की कोशिश के बीच जब डॉ. मुरली मनोहर जोशी से यह पूछा गया कि आरएसएस तो पूरी तरह से अन्ना हजारे का समर्थन कर रही है तो उन्होंने कहा कि आरएसएस ने मार्च २०१० में एक प्रस्ताव पास किया था कि जो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करेगा, उसका समर्थन किया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि अन्ना हजारे और रामदेव के आन्दोलन उसके बहुत बाद में शुरू हुए इसलिए यह कहना ठीक नहीं है कि आरएसएस अन्ना के साथ है. वह तो भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने घोषित कार्यक्रम को लागू कर रहा है.
अनुसूचित जातियों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी आज दिल्ली में एक प्रेस वार्ता करके दावा किया कि उनका भी एक बहुजन लोकपाल बिल है जिसे सरकार के पास भेज दिया गया है. इस संगठन के नेता उदित राज, शबनम हाशमी, अज़ीज़ बर्नी आदि ने दावा किया कि उन्हें डर है कि अन्ना हजारे और सरकारी लोक पाल बिल के पास हो जाने के बाद बहुजन अर्थात दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बदले की भावना से काम करेगा. उन्होंने सवाल किया कि जब महारष्ट्र में राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों पर लाठियां बरसाई थीं तो अन्ना हजारे ने उसका विरोध क्यों नहीं किया. २००२ में गुजरात में मुसलमानों के क़त्ले आम के बाद भी अन्ना हजारे ने नरेंद्र मोदी की तारीफ क्यों की. आज का दिन अन्ना हजारे के आन्दोलन के बिखराव की शुरुआत का दिन साफ़ नज़र आ रहा था.
लेखक शेष नारायण सिंह जाने-माने पत्रकार हैं. लखनऊ से प्रकाशित हिंदी दैनिक जनसंदेश टाइम्स के नेशनल ब्यूरो चीफ हैं.


