देवरिया। देवरिया जिले में भ्रष्टाचार से सम्बन्धित की गयी शिकायतों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न हो सके इसके लिए भ्रष्टाचारियों ने एक नया नुस्खा ईजाद कर लिया है। वे सम्बन्धित विभाग से मिल कर पत्रावलियों को ही गायब कर दे रहे हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण पत्रावली जिलाधिकारी के कार्यालय से गायब हो गयी है। जिस में नगर पालिका परिषद देवरिया द्वारा करीब 45 लाख रुपये की गड़बड़ी की जांच अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व द्वारा की गयी थी। इस पत्रावली को पिछले एक महीने से ढूंढा जा रहा है। परन्तु वह नहीं मिल रहा है। इसी तरह से स्वास्थ्य महकमें में एक निविदा को निरस्त किये जाने वाली फाइल ही गायब कर दी गयी। जिसको लेकर कई दिनों से सीएमओ कार्यालय में हंगामा मचा हुआ है।
इस सम्बन्ध में पूछे जाने पर जिलाधिकारी सच्चिदानन्द दुबे ने कहा कि यदि सरकारी पत्रावली नहीं मिलती है तो दोषी कर्मचारी के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई कर उसे जेल भेजा जायेगा। नगर पालिका परिषद में 1 दिसम्बर 2009 को करीब 45 लाख रुपये की लागत से लोडर मशीन, हाइड्रोलिक ट्रिपर ट्रक, ट्रैक्टर एवं फागिंग मशीनें खरीदी गयीं। आरोप है कि लखनऊ की एक फर्म ने पुराने एवं जर्जर हालत की उक्त मशीनों को डेन्ट-पेन्ट करके उसकी आपूर्ति कर दी। उधर नगर पालिका के जिम्मेदार कर्मचारी/अधिकारियों ने भारी कमीशन लेकर सम्बन्धित फर्म को 45 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया। नगरपालिका के जिम्मेदार लोगों ने लापरवाही की हदों को पार करते हुए न तो मशीनों की जांच की और न ही इन गाड़ियों का सेल लेटर एवं गाड़ी से सम्बन्धित अन्य पेपर ही मांगा। जिससे बिना पंजीकरण किये ही ये गाड़ियां नगर पालिका में शो पीस के रूप में खड़ी है।
कहा जाता है कि इस सम्बन्ध में कांग्रेसी नेता एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रामायण राव ने प्रदेश शासन से इसकी शिकायत की थी। जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी देवरिया जुहेर बिन सगीर को इस मामले में गंभीरतापूर्वक कार्रवाई के लिए कहा गया था। बताते है कि श्री सगीर ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व नेबू लाल से इस मामले की जांच करायी। अपर जिलाधिकारी ने 45 लाख रुपये की गड़बड़ी से सम्बन्धित इस मामले में नगर पालिका में फैले भ्रष्टाचार को इंगित करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी को जांच कर पत्रावली दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई किये जाने की अनुशंसा के साथ सौंप दी।
बताते हैं कि तत्कालीन जिलाधिकारी श्री सगीर इस मामले में कोई कार्रवाई करते, इसके पहले ही उनका स्थानान्तरण सहारनपुर के लिए हो गया। इस बीच भ्रष्टाचार के खेल में लिप्त लोगों ने अपने को बचाने के लिए जांच पत्रावली को ही गायब कर दिया। चर्चा है कि पत्रावली को गायब करने में नगर पालिका के एक कर्मचारी का बहुत बड़ा हाथ है, जो नगर पालिका अध्यक्ष का अत्यन्त खास है। जबकि दूसरी तरफ जिलाधिकारी के कैम्प कार्यालय में तैनात एक लिपिक राजेश को बलि का बकरा बनाने की साजिश कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा किया जा रहा है।
इस बाबत अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व नेबू लाल ने कहा कि उन्हों ने जांच करने के बाद सम्बन्धित पत्रावली को जिलाधिकारी के कैम्प कार्यालय पर भिजवा दिया था। लेकिन वह पत्रावली वहां नहीं मिल रही है। श्री लाल ने बताया कि जांच में यह तथ्य उभर कर सामने आया कि इस मामले में नगर पालिका ने वित्तीय नियमों की अनदेखी कर सम्बन्धित फर्म को भुगतान कर दिया है। सम्भवतः इसी वजह से दोषियों ने खुद को बचाने के लिए उक्त पत्रावली को ही गायब करा दिया है।
इसके अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी के यहां भी एक ठेका निरस्तीकरण से सम्बन्धित पत्रावली गायब है। जानकारों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में निर्माण कार्यों के लिए टेण्डर कराने का निर्णय लिया गया। इस सम्बन्ध में तत्कालीन जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर से अनुमति मिलने के बाद कार्य में पारदर्शिता रखने के मददेनजर आरईएस के एक अभियन्ता एवं एक एसडीएम को भी टेण्डर की प्रक्रिया की देखरेख के लिए नामित किया गया। टेंडर फार्म की बिक्री 20 अगस्त से 20 सितम्बर तक होनी थी। 25 सितम्बर को निविदा आमंत्रित होना था और उसी दिन ठेका फाइनल करना था। लेकिन इसके पूर्व ही अचानक 13 अगस्त को कुछ समाचार पत्रों में टेण्डर निरस्तीकरण का विज्ञापन छप गया। कहा जाता है कि इस वजह से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों में हंगामा मचा हुआ है।
इस सन्दर्भ में बताते हैं कि एक कुछ दिनों पूर्व सम्बन्धित पटल के बाबू को निर्वतमान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर आरएस रावत ने टेंडर निरस्त करने का दबाव डाला। यहां तक कि एक अभियन्ता ने सम्बन्धित बाबू को सीएमओ कार्यालय में सीएमओ के सामने ही जान माल की धमकी तक दे डाली और दुर्व्यवहार किया। जिसकी शिकायत लिपिक ने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से की है। पुलिस अभी भी इस मामले की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार 19 अगस्त को उपरोक्त निविदा निरस्त करने का निर्णय तत्कालीन सीएमओ डाक्टर रावत ने गोरखपुर के एक होटल में बैठकर एक ठेकेदार के दबाव डालने की वजह से लिया है।
अब आलम यह है कि टेन्डर के निरस्तीकरण की पत्रावली भी ढूंढे़ नहीं मिल रही है। अधिकारी और कर्मचारी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इस सम्बन्ध में वर्तमान सीएमओ डाक्टर आरएन सिंह ने पत्रावली को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उसका पता लगाया जा रहा है। जानकारों की माने तो भ्रष्टाचार की शिकायतों से सम्बन्धित दर्जनों फाइलों को या तो गायब कर दिया गया है या दबा दिया गया है। यदि ये पत्रावलियां उच्चाधिकारियों के सामने पहुंच जायें तो कइयों को अपना दिन जेल में गुजारना पड़ सकता है।
सरकारी पत्रावलियों के गुम होने के मामले में जिलाधिकारी सच्चिदानन्द दुबे का कहना है कि पत्रावलियों का गायब होना एक गम्भीर प्रकरण है। इस मामले में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी और दोषी पाये जाने पर सम्बन्धित कर्मचारी को जेल भेजा जायेगा।
देवरिया से ओपी श्रीवास्तव की रिपोर्ट.


