छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में जो मामला आया है, उसे सुनकर किसी का भी दिल दहल सकता है। किसी व्यक्ति की हैवानियत की फितरत कितनी बेदर्दी हो सकती है, इसे यह घटना कहती है। अकलतरा क्षेत्र के गोपालनगर के लाफार्ज कालोनी निवासी रेलवे कर्मचारी प्रेमूराम ठाकुर की 5 साल की मासूम बच्ची मिताली ठाकुर को एक सिरफिरे युवक ने दर्रीघाट (बिलासपुर) के पास अरपा नदी में फेंक दिया। इस हृदय विदारक घटना के बारे में जिसे भी पता चला, उसे निश्चय ही सदमा लगा। दूसरी ओर मिताली को नदी की तेज धार में फेंके जाने के हादसे के बाद उसके परिवार के लोगों के आंसू थमने के नाम नहीं ले रहा है। पूरी लाफार्ज कालोनी में मातम पसरा है, वहीं हर दिन उसकी खोजबीन की जा रही है, मगर अब तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है। जब मासूम बच्ची को नदी में फेंका गया, उस दौरान लगातार हो रही बारिश के कारण, वैसे ही अरपा नदी समेत आगे में मिलने वाली महानदी भी उफन रही थी।
दरअसल, आरोपी प्रकाश भार्गव, लाफार्ज कालोनी के अपार्टमेंट में रहा था और उसका मिताली के परिवार से जान-पहचान थी। घटना के दिन वह मिताली को घुमाने के लिए लेकर आया और बाद में फिरौती की नीयत से उसका अपहरण कर लिया और बिलासपुर जा रहा था, मगर रास्ते में उसने घर के लोगों को फोन पर तीन लाख रुपये देने की मांग की। इसके बाद मिताली के परिवार के लोग सक्रिय हुए। बाद में जिस मोबाइल नंबर से फोन आया था, उसकी जांच की गई तो वह प्रकाश भार्गव का निकला। जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसके बयान सुनकर सभी आसमान तले जमीं खिसक गई।
आरोपी प्रकाश ने बताया कि वह 80 हजार रुपये के कर्ज से लदा था और कर्ज की समस्या से निपटने के लिए उसने मिताली का अपहरण कर फिरौती मांगने का प्लान बनाया। रास्ते में वह दर्रीघाट के पास रूका। पुलिस को उसने जो बयान दिया है, उसके मुताबिक पहले उसने मिताली के गले दबाकर मारने का मन बनाया, इस दौरान बच्ची ने मासूमियत से गला क्यों दबाने की बात कही। इसके बाद वह बच्ची को घर छोड़ने के मूड में आ गया। इसी बीच उसकी शैतानी खोपड़ी में यह बात आ गई कि उसके घरवालों को पता चलेगा कि मिताली को वही लेकर आया था, उसके बाद उसने पकड़े जाने के भय से बच्ची को उफनती नदी अरपा में फेंक दिया।
इधर जैसे ही परिवार को फोन से मिताली के अपहरण की सूचना मिली, उसके बाद पुलिस भी जांच में जुट गई। कुछ ही घंटों में आरोपी प्रकाश को पुलिस ने दबोच लिया। फिलहाल आरोपी प्रकाश जेल में है, मगर मानवता के दृष्टिकोण से सवाल यही है कि क्या, मासमू मिताली को तेज धार बहती नदी में फेंकने के पहले उसका हाथ नहीं कांपा? जिस तरह घटना को उसने अंजाम दिया, उसने पूरे मानवता को शर्मशार कर दिया।
लेखक जांजगीर, छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार हैं। पिछले दस बरसों से पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और स्वतंत्र लेखक, व्यंग्यकार तथा ब्लॉगर हैं।


