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अपना निष्‍कासन चाहते थे धनंजय सिंह, मायावती ने निलंबन का नकेल डाला

[caption id="attachment_3598" align="alignleft" width="150"]कुमार सौवीर[/caption]लखनऊ: मायाराज के खिलाफ आखिरकार धनंजय सिंह ने बगावत कर ही दी। पूर्वांचल के इस बाहुबली का अमर सिंह का साथ रास आ गया और अब वे नये राजनीतिक पायदान खोजने के साथ ही फिलहाल बसपा का तियांपांचा करने पर आमादा हैं। बसपा से निलम्‍बन से हालांकि उनकी मंशा पूरी नहीं हो पायी है, लेकिन इतना तो तय ही है कि निष्‍कासन न होने के बावजूद वे अब बसपा और मायावती की नौकरशाही के खिलाफ अपना अभियान तेज कर रहे हैं। तय किया गया है कि वे अब यूपी से दूर ही रहें। वजह है उनकी यह आशंका कि यूपी की मुख्‍यमंत्री के खासमखास स्‍पेशल डीजीपी ब्रजलाल उनकी हत्‍या का तानाबाना बुन रहे हैं। इसके लिए जगह चुनी है दिल्‍ली। जाहिर है, इस तरह धनंजय अपनी बात को खासा विस्‍तार दे पायेंगे। बहरहाल, ताजा घटनाक्रम के मुताबिक जौनपुर के इस सांसद ने वहां के 27 में से दस ब्‍लाक प्रमुखों का इस्‍तीफा करा दिया है।

कुमार सौवीर

लखनऊ: मायाराज के खिलाफ आखिरकार धनंजय सिंह ने बगावत कर ही दी। पूर्वांचल के इस बाहुबली का अमर सिंह का साथ रास आ गया और अब वे नये राजनीतिक पायदान खोजने के साथ ही फिलहाल बसपा का तियांपांचा करने पर आमादा हैं। बसपा से निलम्‍बन से हालांकि उनकी मंशा पूरी नहीं हो पायी है, लेकिन इतना तो तय ही है कि निष्‍कासन न होने के बावजूद वे अब बसपा और मायावती की नौकरशाही के खिलाफ अपना अभियान तेज कर रहे हैं। तय किया गया है कि वे अब यूपी से दूर ही रहें। वजह है उनकी यह आशंका कि यूपी की मुख्‍यमंत्री के खासमखास स्‍पेशल डीजीपी ब्रजलाल उनकी हत्‍या का तानाबाना बुन रहे हैं। इसके लिए जगह चुनी है दिल्‍ली। जाहिर है, इस तरह धनंजय अपनी बात को खासा विस्‍तार दे पायेंगे। बहरहाल, ताजा घटनाक्रम के मुताबिक जौनपुर के इस सांसद ने वहां के 27 में से दस ब्‍लाक प्रमुखों का इस्‍तीफा करा दिया है।

लखनऊ विश्‍वविद्यालय के छात्र नेता के तौर पर अपना जीवन शुरू करने वाले धनंजय सिंह का साथ पहले लखनऊ के माफिया अरूणशंकर शुक्‍ल उर्फ अन्‍ना के अलावा अम्‍बेडकर नगर के माफिया अभय सिंह से हुआ। हालांकि बाद के दिनों में इन तीनों ने अपना साम्राज्‍य अलग-अलग कर लिया। लेकिन इस दौड़ में धनंजय सिंह तब खासे आगे निकल गये, जब एक पुलिस मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दावा किया कि धनंजय सिंह नाम का अपराधी मार गिराया गया है। इसके कुछ ही दिनों बाद धनंजय सिंह नमूदार हो गये और बताया कि पुलिस उन्‍हें जान से मारने पर आमादा है और उनके नाम पर मारा गया व्‍यक्ति निर्दोष था। पुलिस इन आरोपों का जवाब नहीं दे पायी, और इसके बाद धनंजय सिंह ने राजनीति का दामन थामते हुए अगले चुनाव में बाकायदा चुनौती दे दी। उनकी मां ने अपने बेटे की जान बचाने की भावुक अपील की और धनंजय चुनाव जीत गये। हालांकि इसके बाद भी उन पर आरोपों की झड़ी लगातार लगती रही। अपने ही करीबी मित्र अरूण उपाध्‍याय के भाई की हत्‍या का आरोप उनपर लगा। लाश बरामद हुई मिर्जापुर से। अरूण ने तब ऐलानिया कहा कि जब तक इस हत्‍या का बदला नहीं ले लिया जाएगा, वे अपने भाई की तेरहवीं नहीं करेंगे। वह चुनौती अभी बकाया है। इसके बाद पिछले चुनाव में इंडियन जस्टिस पार्टी के उम्‍मीदवार की लाश एक पेड़ से लटकती मिलने पर उसका ठीकरा भी धनंजय सिंह पर फूटा। लेकिन बाद में वे बरी हो गये। अपने ही एक करीबी मित्र अतुल सिंह के चंदवक स्थित कालेज की प्रबंध समिति में उनके हस्‍तक्षेप से उनकी मित्रता पर भी संदेह के बादल खूब घिरे।

हालांकि इन सबके बाद भी भागादौड़ी का उनका जीवन थम नहीं सका। टिकट के लिए हर बार हर एक दर पर उन्‍होंने माथा टेका, समय मिलते ही अपने लिए माकूल पनाहगाह तलाश कर दलबदल भी किया। उनका यह आखिरी पड़ाव बसपा था, जहां से सांसद चुने जाने के बावजूद वे खुद को मिसफिट पा रहे थे। उनके पिता का टिकट बसपा ने काट दिया। साथ ही उनके विरोधी पाणिनी सिंह को उनकी छाती पर बिठाते हुए टिकट से नवाज दिया। बौखलाये धनंजय को मौका मिल गया और उन्‍होंने सीधा आरोप लगा दिया स्‍पेशल डीजीपी ब्रजलाल उनकी हत्‍या करने पर आमादा हैं। बसपा में असहज धनंजय ने शुरू से ही विरोध करना शुरू कर दिया था। पिछले एक महीने से तो उन्‍होंने अपने काफिले में बसपा के झंडे तक लगाने बंद कर दिये थे। लेकिन अमर सिंह से मुलाकात बसपा सुप्रीमो को इस कदर खटक गयी कि उनका कहर धनंजय सिंह पर टूट पड़ा। हालांकि जानकार बताते हैं कि धनंजय सिंह ने बिसात कुछ इस कदर बिछायी ताकि बसपा से उन्‍हें निष्‍कासित कर दिया जाए, ताकि वे अपनी मनमर्जी से अपने पैंतरे भांज सकें। लेकिन मायावती ने उनपर नकेल डाले रखने के लिए उन्‍हें केवल निलंबित ही किया, ताकि वे कहीं और न जा सकें। हां, अब धनंजय को बेइज्‍जत करने के लिए उन्‍हें न तो पार्टी के कार्यक्रमों में बुलाया जाएगा और न ही किसी बड़े नेता से उनकी भेंट ही हो पायेगी।

लेकिन अपने में मस्‍त धनंजय को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सुरक्षा का हवाला देते हुए अब वे अपने लिए मुफीद दिल्‍ली पहुंच चुके हैं और अब वहीं से बसपा पर हमला बोलेंगे। लेकिन इतना तो तय ही है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में धनंजय का विरोध पार्टी पर खासा भारी पड़ सकता है।

लेखक कुमार सौवीर लखनऊ के जाने-माने और बेबाक पत्रकार हैं. कई अखबारों और न्यूज चैनलों में काम करने के बाद इन दिनों आजाद पत्रकारिता कर रहे हैं.उनसे संपर्क 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.

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